बिजनेस टुडे मोस्ट पावरफुल वुमन अवॉर्ड्स के 17वें संस्करण का आयोजन किया जा रहा है. पहले दिन का कार्यक्रम खत्म हो चुका है और अब 4 अक्टूबर को दूसरे दिन का कार्यक्रम आयोजित होगा. बिजनेस टुडे इंडियाज़ मोस्ट पावरफुल वुमेन अवॉर्ड्स का मकसद ऐसी महिलाओं को सम्मानित करना है जिन्होंने अपने संस्थानों में उत्कृष्ट योगदान दिया है.
कोरोना महामारी की वजह से इस बार वर्चुअल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है. कार्यक्रम के पहले दिन टिवेरा वेंचर की फाउंडर अल्पना परीदा, वे बियॉन्ड मीडिया की को-फाउंडर मीनाक्षी मेनन, एमजी मोटर इंडिया के एमडी राजीव चाबा, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर की एमडी अमीरा शाह, अवाना कैपिटल की फाउंडर अंजलि बंसल, बीएसएच हाउसहोल्ड एप्लायंसेस के सीईओ नीरज बहल और ओरिफ्लेम के साउथ एशिया हेड फ्रेडरिक विडेल जुड़े.
लॉकडाउन में कैसे बदली जिंदगी?
इन बिजनेस वुमन से पूछा गया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपने बिजनेस को कैसे संभाला और इस दौरान उन्हें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा. टिवेरा वेंचर की फाउंडर अल्पना ने कहा कि इस महामारी के दौरान टेक्नॉलजी ने हर किसी की जिंदगी बदल दी है. गैजेट्स से जहां एक तरफ समय की बचत हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लोगों का वर्चुअल सर्किल भी बढ़ता जा रहा है. लोग खाने से लेकर सफाई तक में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. वहीं मीनाक्षी मेनन ने कहा कि पहले की तुलना में लोग अब हर चीज को लेकर जागरुक हुए हैं. हर चीज के प्रति अब लोगों का नजरिया बदल गया है. स्मार्ट फोन हो या कोई नई टेक्नॉलजी, लोग अब हर चीज को समझना चाहतें हैं. ऑनलाइन शापिंग का चलन भी बढ़ा है, जिससे नए बिजनेस को भी मौका मिल रहा है.
वर्क फ्रॉम होम कितना आसान?
ये पूछे जाने पर कि ऑफिस में काम करने की तुलना में घर से काम करना आसान है या मुश्किल और इस दौरान किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? इस सवाल के जवाब में अल्पना ने कहा कि लॉकडाउन के शुरू में लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, कैसे करें फिर अपने आप रिस्क लेने की क्षमता आ गई. हम चीजों के सही होने का इंतजार नहीं कर सकते. वहीं मीनाक्षी का कहना है कि वर्क फ्रॉम होम को लेकर अब लोगों में स्पष्टता आ गई है, लोग योजनाएं बनाकर काम कर रहे हैं और ये सबसे प्रोडक्टिव फेज है.
महिलाओं पर ज्यादा बोझ
बीएसएच हाउसहोल्ड एप्लायंसेस के सीईओ नीरज बहल का कहना है कि पहले ऑफिस में काम की वजह से महिलाओं को कभी-कभी देर तक रुकना पड़ता था, वर्क फ्रॉम होम जाने से महिलाओं को इससे राहत मिली. वो काम के साथ घर को भी समय दे पा रहीं हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि वर्क फ्रॉम होम से महिलाओं के ऊपर काम का ज्यादा बोझ भी पड़ा है. उन्हें बच्चे से लेकर घर के सारे काम करने पड़ते हैं. ऐसे में घर के सदस्यों को ये समझने की जरूरत है कि वो घर की वर्किंग है और घर का सारा भार उस पर डालना सही नहीं है.