कुछ महीनों पहले ही डेनमार्क इस बात पर राजी हुआ कि वो ग्रीनलैंड में हुए इस कॉइल स्कैंडल की जांच में सहयोग करेगा, वो भी ह्यूमन राइट्स संस्थानों से लेकर मीडिया के शोरगुल के बाद. बर्थ कंट्रोल स्कैंडल के अलावा भी ग्रीनलैंडिक आबादी के साथ कई अमानवीय प्रयोग हो चुके हैं, जैसे बच्चों को उनके परिवारों से अलग करना ताकि वे एडवांस बन सकें. बता दें कि ग्रीनलैंड वैसे तो स्वतंत्र देश है लेकिन ऊपरी तौर पर डेनमार्क उस पर नियंत्रण रखता रहा.
कौन रहता है ग्रीनलैंड में
विस्तार के मामले में दुनिया के 12वें सबसे बड़े देश की आबादी लगभग 60 हजार है. इनमें स्थानीय आबादी को इनूएट कहते हैं, जो डेनिश भाषा ही बोलते हैं, लेकिन इनका कल्चर डेनमार्क से अलग है. बर्फ और चट्टानों से भरे इस देश में आय का खास जरिया नहीं, सिवाय सैलानियों के. इनूएट दुकानदार लोकल केक, बर्फीली मछलियां और रेंडियर की सींग से बने शो-पीस बेचकर पैसे कमाते हैं. मंगोलों से ताल्लुक रखती ये जनजाति एस्किमो भी कहलाती है, जो बेहद ठंडे मौसम में कच्चा मांस खाकर भी जी पाती है.
क्या प्रयोग हुआ था
साठ के दशक से लेकर अगले दशकभर में लगभग साढ़े 4 हजार महिलाओं के भीतर इंट्रायूटेराइन डिवाइस (IUD) लगा दी गई. ये प्रेग्नेंसी रोकने का एक तरीका है, जो आमतौर पर वही महिलाएं इस्तेमाल करती हैं, जिनकी संतानें हो चुकी हों और जो बर्थ-कंट्रोल दवाएं नहीं लेना चाहतीं. ग्रीनलैंड में हालांकि स्कूली बच्चियों के साथ ऐसा किया गया, जिसके लिए न तो उनकी, न ही उनके पेरेंट्स की इजाजत ली गई. ये सबकुछ रुटीन चेकअप के नाम पर हुआ. लड़कियों को ये तो समझ आया कि कुछ अलग हुआ है, लेकिन क्या, ये समझते काफी साल लग गए.
क्यों किया गया ऐसा
ये एक तरह का फर्टिलिटी कंट्रोल प्रोग्राम था, जो कथित तौर पर डेनमार्क की सरकार की अनुमति से चला. कॉइल कंट्रोवर्सी को बिल्कुल उसी तरह से देखा जाता है जैसे कोई भी साम्राज्यवादी देश अपने उपनिवेश यानी कंट्रोल में आए देश से करता है. डेनमार्क के डॉक्टरों ने ऐसा इसलिए किया ताकि ग्रीनलैंड की स्थानीय आबादी ज्यादा बढ़ न जाए और उनपर किसी तरह का खतरा न पैदा हो जाए. डेनिश वहां के लोगों को पिछड़ा हुआ मानते और नहीं चाहते थे कि उनके उपनिवेश में पिछड़ों की आबादी बढ़े.
जन्मदर कम होती गई
जब बर्थ कंट्रोल का ये तरीका अपनाया गया, पूरे ग्रीनलैंड में केवल 9 हजार महिलाएं फर्टाइल पीरियड में थीं. इनमें से आधी आबादी की फैमिली बनने से पहले ही फैमिली प्लानिंग कर दी गई. इसके बाद वहां जन्मदर 6 संतान से गिरकर 2.5 संतान प्रति महिला हो गई. बता दें कि ग्रीनलैंड तब तक हेल्थकेयर में डेनिश सरकार के अधीन ही था, काफी सालों बाद 1992 में उसने कोपेनहेगन से अपनी हेल्थ पॉलिसी का नियंत्रण वापस ले लिया.
महिलाएं नहीं हो सकीं प्रेग्नेंट
नब्बे के दशक में पहली बार इस डिवाइस कैंपेन का पता लगा, जब एक साथ बहुत सी स्वस्थ महिलाएं मां बनने की समस्या से जूझ रही थीं. पता लगा कि उनके गर्भाशय में दसियों सालों से IUD डली हुई है. जांच में समझ आया कि ऐसा अनजाने में नहीं, बल्कि पॉपुलेशन कंट्रोल की योजना बनाकर किया गया. इसे डेनमार्क बर्थ कंट्रोल स्कैंडल या कॉइल स्कैंडल भी कहा गया. कॉइल निकालने और इलाज के बाद भी स्थानीय महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहीं और प्रयोग का हिस्सा बन चुकी कम ही महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकीं.
छोटी उम्र की लड़कियों पर गंभीर असर हुआ
वे इंफेक्शन समेत कई गायनेकोलॉजिकल दिक्कतों से जूझती रहीं, जिसकी उन्हें वजह तक पता नहीं थी. ये वो समय था जब IUD आज की तरह छोटी और टी-शेप की नहीं, बल्कि काफी बड़ी और एस शेप होती थी. गर्भाशय में उसे डालने पर बच्चियां काफी समय तक दर्द में रहतीं.
पॉडकास्ट के बाद मचा हंगामा
इसी साल डेनिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ने spiral kampagnen (अंग्रेजी में कॉइल कैंपेन) नाम से एक पॉडकास्ट किया, जिसमें पीड़िताओं ने अपनी बात रखी. इसके बाद मचे हंगामे के बाद डेनिश हेल्थ मिनिस्टर मेग्नस जोहेन्ज ने कई पीड़िताओं से मुलाकात भी की. फिलहाल इसकी जांच चल रही है कि आखिर किसकी इजाजत से इस तरह का क्रूर बर्थ कंट्रोल कैंपेन चला और दशकों तक इसकी भनक कैसे नहीं लग सकी.
छोटे बच्चों को अनाथ बताकर किया एक्सपरिमेंट
ग्रीनलैंड की ह्यूमन राइट्स काउंसिल कथित तौर पर कई दूसरी व्यवस्थाओं की जांच की भी मांग कर रही है, जो डेनिश मेडिकल सिस्टम के तहत उनके देश में लागू रही. Little Danes प्रयोग इसमें सबसे ऊपर है. इस अमानवीय एक्सपरिमेंट के तहत 22 ग्रीनलैंडिक बच्चों को डेनमार्क भेज दिया गया, ये कहते हुए कि वे अनाथ हैं.
परिवार से अलग हुए इन बच्चों में से सिर्फ 6 बच्चे ही डेनिश नागरिक बन सके, जबकि बाकी कई तरह की साइकोलॉजिकल बीमारियों का शिकार हो गए. आधे से ज्यादा बच्चों की वयस्क होने से पहले ही मौत हो गई. साल 2020 में डेनिश सरकार ने लिटिल डेन्स नाम के इस प्रयोग पर सार्वजनिक माफी भी मांगी. साथ में जोड़ा कि वो सिर्फ पिछड़े हुए बच्चों को एडवांस बनाना चाहते थे और इसलिए उन्हें डेनिश फैमिलीज से जोड़ रहे थे.