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अगर आपका बच्चा भी चूसता है अंगूठा और चबाता है नाखून तो....

अंगूठा चूसना और नाखून चबाना बुरी आदत है, जिससे बच्चे बीमार पड़ जाते है. मां-बाप को डर होता है कि इससे कई तरह के बैक्टीरिया बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाएंगे, जिससे बच्चा बीमार पड़ सकता है. लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है.

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क्या आपका बच्चा भी अंगूठा चूसता है?
क्या आपका बच्चा भी अंगूठा चूसता है?

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बहुत से मां-बाप को ये लगता है कि वो अपने बच्चे को धूल-मिट्टी और बाहरी माहौल से जितना बचाकर रखेंगे, बच्चा उतना ही स्वस्थ रहेगा. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? बिल्कुल नहीं. धूल-मिट्टी से बचाकर रखने के बावजूद ऐसे बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं जबकि गांवों में धूल, मिट्टी और खुले में खेलने वाले बच्चे अपेक्षाकृत ज्यादा स्वस्थ रहते हैं.

कुछ ऐसी ही सोच नाखून चबाने और अंगूठा चूसने को लेकर भी है. आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि अंगूठा चूसना और नाखून चबाना बुरी आदत है, जिससे बच्चे बीमार पड़ जाते है. मां-बाप को डर होता है कि इससे कई तरह के बैक्टीरिया बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाएंगे, जिससे बच्चा बीमार पड़ सकता है. लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है.

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक, ऐसे बच्चों का इम्यून सिस्टम, ऐसा नहीं करने वाले बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा स्ट्रांग और डेवलप होता है. न्यूजीलैंड में हुए इस शोध के अनुसार, नाखून चबाने वाले और अंगूठा चूसने वाले बच्चे कम बीमार पड़ते हैं. इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने एक हजार से ज्यादा बच्चों पर कुछ जरूरी परीक्षण किए. इस परीक्षण को Pediatrics में प्रकाशि‍त किया गया है. इस अध्ययन में पाया गया कि जिन मां-बाप ने अपने बच्चों के बारे में बताया था कि वो अंगूठा पीते थे और नाखून खाते थे, उनका इम्यून सिस्टम आगे चलकर और बेहतर ही हुआ.

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इस अध्ययन के लिए 5, 7, 9 और 11 साल के बच्चों के माता-पिता से उनकी आदतों के बारे में पूछा गया था. उसके बाद जब ये बच्चे 13 साल के हुए तो उनकी त्वचा का परीक्षण किया गया. उनकी त्वचा पर सामान्य संक्रमण, धूल, मिट्टी, पालतू जानवरों के संपर्क और घास से होने वाले संक्रमण का परीक्षण किया गया.

एक ऐसा ही टेस्ट तब किया गया, जब वे 32 साल के हो गए. ऐसे बच्चे जो अक्सर अपना अंगूठा चूसते थे और नाखून चबाते थे, उनमें इंफेक्शन होने का खतरा कम पाया गया. इस अध्ययन के पीछे दलील ये दी गई है कि बचपन में ही नाखून चबाने और अंगूठा चूस ने की आदत के चलते बच्चे में बाहरी माहौल के बैक्टीरिया से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम तैयार हो जाता है.

अध्ययनकर्ता रॉबर्ट जे हैनकॉक्स के अनुसार, बच्चों को हर समय कैद करके रखना या फिर उन पर बहुत अधिक पाबंदियां लगाना खतरनाक हो सकता है. इससे उनका इम्यून सिस्टम बाहरी माहौल के हिसाब से विकसित नहीं हो पाता है.

हालांकि अध्ययनकर्ता इस बात को स्वीकार करते हैं कि बच्चे में सफाई की आदत होनी चाहिए. सफाई से रहकर हम कई बीमारियों से बच सकते हैं.

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