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Sahitya AajTak 2024: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर इमोशनल हैं 'TV के राम-सीता', बोले- सोचा नहीं था...

अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया ने लखनऊ में साहित्य आजतक कार्यक्रम में शिरकत की. यहां अरुण और दीपिका ने अपने शो रामायण, राम-सीता का रोल करने पर मिली पॉपुलैरिटी, अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने पर रिएक्ट किया है.

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दीपिका चिखलिया-अरुण गोविल
दीपिका चिखलिया-अरुण गोविल

22 जनवरी का दिन राम भक्तों के लिए खास है. अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. देशभर के लोग राम मंदिर जा रहे हैं. टीवी शो रामायण के राम-सीता यानी अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया भी अयोध्या जाएंगे. इससे पहले दोनों एक्टर्स ने लखनऊ में साहित्य आजतक कार्यक्रम में शिरकत की. यहां अरुण और दीपिका ने अपने शो रामायण, राम-सीता का रोल करने पर मिली पॉपुलैरिटी, अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने पर रिएक्ट किया है. जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा...
 

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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर क्या भावनाएं हैं?
अरुण गोविल ने कहा- कभी कभी लगने लगता है ये सब क्या हो रहा है. कुछ बातें समझ नहीं आ रही हैं. सोचा नहीं था ये इस तरह से होगा. इतनी ऊर्जा होगी देश में राम के प्रति, एकजुटता होगी, ये नहीं मालूम था. हमने राम मंदिर के लिए संघर्ष किया. लाखों लोगों ने बलिदान दिए. आज वो पल आया है कैसे इस पल को जिया जाए समझ नहीं आता. सब कुछ नाकाफी लगता है. ये एहसास काफी बड़ा है. मन कहता है क्या बात है.


दीपिका बोलीं- ये पल होगा सोचा था. लेकिन ये नहीं पता था ये पल हम देख पाएंगे. हम इस ऐतिहासिक दिन के साथ खुद को कनेक्ट कर पाएंगे सोचा नहीं था. शुरू से मैं राममय रही हूं. इतनी जल्दी इसका परिणाम आएगा वो सोचा नहीं था. देश विदेश राममय हो चुका है. हम सालों से रामायण से जुडे हैं इसलिए ये इमोशनल मोमेंट है. लगता है हमारी जीत हुई है.

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रामायण करने के बाद लगता है राम के किरदार से बाहर नहीं निकल पाए?
अरुण बोले- कौन निकलना चाहता है इस किरदार से बाहर. रामजी ने इतना दिया है. मेरे शरीर की धरती, मन की धरती राममय रही होगी. कुछ तो ऐसा रहा होगा जो राम की शक्ति मेरे मन की ऊर्जा में समाई. इतना प्यार और सम्मान किसी को मिले तो उसे क्या चाहिए. जब रामायण मिली उससे पहले अच्छी कमर्शियल फिल्में कर रहा था. लेकिन मेरे मन में आता था राम का रोल करना चाहिए और मैंने किया. अगर मैं 200-400 फिल्में भी करता तो क्या वो मिलता जो आज मिल रहा है. 37 साल बाद लोग एक्टर को भूल जाते हैं. मुझे इससे बाहर निकलने की कोई गरज नहीं है. 22 जनवरी को वो पल आ रहा है, वो सबसे बड़ा पल होगा जिंदगी का. विश्व में सनातन धर्म को मानने वाले राममय हो चुके हैं. विदेश के लोगों को समझ आ रहा है राम क्या है. लगता है इसी पल को जीते रहे.

कभी नहीं करने थे ग्लैमरस रोल- दीपिका

मुझे कभी ग्लैमरस रोल नहीं करने थे. पहली फिल्म के बाद मैं इंडस्ट्री में नहीं रहना चाहता थी. मैं फ्लॉप थी. तब मैं 10वीं में थी 15 साल की थी. मैंने भगवान से कहा कि मुझे कुछ ऐसा काम दो कि लोग इज्जत दे. नहीं चाहती थी लोग मेरे पीछे चलने वाले लोग मुझे देखकर सीटी बजाएं. प्रभु की कृपा रही रामायण मिली. राम जी ने मेरी बात सुनी. ऐसा रोल दिया कि मुझे रिस्पेक्ट मिले, मुझे कमर्शियल सिनेमा नहीं करना था. मैं बहुत खुश और प्राउड हूं जो ऐसा रोल मिला.

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राम बनकर झेला वनवास- अरुण
अरुण को राम का रोल करने के बाद कई रोल्स से हाथ धोना पड़ा था. उन्हें काफी समय तक काम नहीं मिला था. वो कहते हैं- मुझे मेरे प्रोड्यूसर ने कहा कि आपकी राम की इमेज स्ट्रॉग हो गई है. अब हम आपको क्या दें. लोग मुझे जींस और जैकेट ना पहनने को कहते थे. कुर्ता धोती पहनने को कहते थे. कहते थे, आप और कुछ काम मत करे. मैंने कहा अगर काम नहीं करूंगा तो मैं अपनी जीविका कैसे चलाऊंगा. ऐसी मेरी इमेज बनी थी. मेरा वनवास जैसा हाल रहा था. मुझे काम नहीं करने दिया जा रहा था. लेकिन भगवान रास्ते निकाल देता था. एक्टिंग नहीं की लेकिन दूसरे काम करता था. मैंने फिल्मों में ग्रेड शेड रोल करने चाहे. लेकिन वो करने के बाद पहले दिन की शूटिंग देखी तो मैंने महसूस किया कि मेरा चेहरा इस रोल के लिए भी नहीं बना.

उम्र से बड़े लोगों के पैर छूने पर क्या बोले?

पैर छूने पर अरुण ने कहा- अच्छा लगता है. आदर मिलता है प्रेम मिलता है. शुरू में जब उम्र से बड़े लोग पांव छूते थे तो अजीब लगता था. वो कहते थे हमें करने दो ऐसा. फिर मैं समझा मैं पैर छूने का माध्यम तो बन गया था लेकिन वो लोग राम के प्रति अपनी आस्था को नमन कर रहे हैं.

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इस पर दीपिका ने कहा- एक बार 90 साल की बुजुर्ग ने मेरे पैर छुए. मैंने मना किया तो कहतीं- हिंदुस्तान की करोड़ों लड़कियां हैं उनमें से सीता के रोल में भगवान ने तुम्हें चुना. ये बात सुनकर मैं उन्हें रोक नहीं पाई. बार बार ये सब फिर होता रहा. वो सोचते थे- सीता जी का आशीर्वाद उन्हें मेरे माध्यम से मिल रहा है. फिर मैंने लोगों को रोका नहीं. मैंने कहा ये आपकी आस्था है भरोसा है.

रामायण पर बहुत सारी फिल्में-शोज बने, लेकिन बस आपकी रामायण को स्वीकार किया. क्या ऐसा खास था?
अरुण बोले- मेरा मन था राम का रोल करूं. आत्मा से ये बात निकली थी. सागर साहब ने रामायण को सादगी से बनाया. कहीं छेड़छाड़ नहीं की. फिर दूसरे मेकर्स रामायण कमर्शियल करने लगे. वो बनाते थे शिव पुराण और दिखाते थे गणेश की कहानी. पैसा कमाने के लिए शो बनाए. रामायण को कमर्शियल किया गया इसलिए नहीं चली. सागर साहब की फैमिली में भी ये हुआ. एक रामायण बेटे मोती सागर और एक रामायण बेटे आनंद सागर ने बनाई. दोनों नहीं चलीं. क्या जरूरत थी रामायण बनाने की उन दोनों को. उन्होंने कमर्शियलिज्म के लिए रामायण बनाई. जब आप कमर्शियल चीजों को परमात्मा की चीजों में लेकर आएंगे और उसकी आत्मा से छेड़छाड़ करने लगेंगे तो वो नहीं चलेगा.

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रामायण के लिए कितना पैसा मिला था?
अरुण ने लोगों से पूछा- आप मूंगफली खरीदते हैं ना, वो पैसे जो मिले थे वो पीनट थे. वो काम मैंने पैसों के लिए नहीं किया था. मैं वो रोल करना चाहता था. सागर साहब ने मुझे पहले राम के रोल में रिजेक्ट किया था. भरत-लक्ष्मण का रोल दिया. लेकिन फिर कहां से क्या हुआ कि सागर साहब ने कहा- हमें तु्म्हारे जैसा राम नहीं मिलेगा. ये रोल मेरे लिए लिखा गया था. लक्ष्मण का रोल करने वाले एक्टर ने 4 एपिसोड के बाद शो छोड़ा. फिर सुनील जो शत्रुघ्न बने थे उन्हें लक्ष्मण का रोल दिया गया.

छोटी हाइट ने दिलाया सीता का रोल

दीपिका ने कहा ये हमारी डेस्टिनी थी कि हमें ये रोल करना था. पहली मूवी नहीं चली तो मैं इंडस्ट्री में खुद को मिसफिट मानती थी. मैं मां से कहती थी- सब अच्छा दिया है बस हाइट भी अच्छा दे देते. लेकिन जब सागर साहब ने मुझे रोल के लिए सलेक्ट किया तो कहा था- सीताजी की हाइट रामजी के हृदय तक आती थी. उनकी ये हाइट थी. हर चीज प्रभु के हिसाब से होती है.

कैसे राम के रोल के लिए तैयार हुए अरुण?

एक्टर ने कहा- राम ने इंसान बनकर अवतार लिया तो उन्हें इंसान दिखना था. इंसान की तरह बिहेव करना था. जहां जरूरत पड़े वहां ये भी कहना था देखो मैं सब जानता हूं. आपको ना इंसान दिखना था ना भगवान, बीच की लाइन पकड़नी थी. मेरी हिंदी अच्छी है. आवाज का थ्रो स्ट्रॉन्ग है. पूरी रामायण में मेरा ओरिजनल ट्रैक वही रखा है. मुझे कही डबिंग की जरूरत नहीं पड़ी. 

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