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'रिंकिया के पापा' गाने पर बनते हैं मीम, लेकिन असली मतलब नहीं समझते लोग, बोले मनोज तिवारी

साहित्य आज तक के मंच पर मनोज तिवारी ने अपने पॉपुलर गाने गाकर हर किसी का दिल खुश कर दिया. मनोज तिवारी ने ये भी बताया कि उनके लिये साहित्य का मतलब सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि गढ़ना भी है. इसके अलावा उन्होंने भाग्यश्री और भोजपुरी सिनेमा पर भी बात की.

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मनोज तिवारी
मनोज तिवारी

साहित्य आज तक 2022 के दूसरे दिन भोजपुरी अभिनेता और नेता मनोज तिवारी ने शिरकत की. साहित्य आज तक के मंच पर आते ही मनोज तिवारी ने माता रानी का भजन गाया. मनोज तिवारी की आवाज में माता रानी का भजन सुनकर वहां बैठे लोगों झूम उठे. इसके बाद मनोज तिवारी ने अपने गानों पर बनने वाली मीम और बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री का भी जिक्र किया. 

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साहित्य का मतलब क्या है
साहित्य आज तक के मंच पर मनोज तिवारी ने बताया कि उनके लिये साहित्य का मतलब सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि गढ़ना भी है. वो कहते हैं कि पता चला बहुत पढ़ लें. इसके बाद सारा ज्ञान निगेटिविटी में निकल रहा है. साहित्य का मतलब खुशी मिलनी चाहिये. कई बार मैं अपने विरोधियों की तारीफ करता हूं. यही परिवर्तन का साहित्य है. 

'रिंकिया के पापा' गाने पर बनने वाले मीम पर बात करते हुए मनोज तिवारी ने कहा, पहले जो शादियां होती थीं. तीन साल के लिये गउना हो जाता था. फिर महिलाएं अपने पति का चेहरा देखती थीं.  इसको बदलने की जरूरत है. कोई मेरा साहित्य नहीं समझता है. लोग मीम बना देते हैं. 'रिंकिया के पापा' पर जितना मीम बना होगा. शायद ही उतना किसी गाने पर नहीं बना है. सच यही है कि मनोज तिवारी के गाने पर मीम बना. 

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'रिंकिया के पापा' गाने का मतलब समझाते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि पत्नी को भी दोस्त समझना चाहिये. अगर वो कहती है कि चाय बना दो, बना देना चाहिये. जैसे आपके घर पर बेटी है. वैसे ही आपकी पत्नी भी किसी की बेटी है. 

जब भाग्यश्री से हुई मनोज तिवारी की अनबन 
साहित्य आज तक के मंच पर मनोज तिवारी ने बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री और उनके साथ की गई फिल्म पर भी बात की. वो कहते हैं कि 'हमने भाग्यश्री के साथ एक फिल्म की थी. नाम था 'एगो चुम्मा दे दो राजाजी.' हमने फिल्म के नाम का विरोध किया. हमने कहा कि कहा कि ये नाम ऐसा रखोगे, तो लोग सोचेंगे कि भोजपुरी ऐसा ही नाम चलता है. पर रवि किशन ने कहा कि नहीं यही नाम अच्छा है.' 

मनोज तिवारी ने ये भी कहा कहीं भाग्यश्री ये सुनकर गुस्सा ना हो जाएं. बस इन्हीं दिलचस्प बातों और गानों के साथ मनोज तिवारी ने साहित्य की शाम को खुशनुमा बना दिया. 

 

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