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मेरे पिया गए रंगून, किया है वहां से टेलीफोन..., प्रिया मलिक और कशिश मित्तल के गीतों पर झूम उठे दर्शक

Sahitya AajTak 2022: संगीत के लिए IAS की नौकरी छोड़ने वाले कशिश मित्तल और लोक गायिका प्रिया मलिक ने 'साहित्य आजतक' के दूसरे दिन सूफी गाने और लोकगीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. 'आज जाने की जिद न करो'... और 'सइयां मिले लरकइंया मैं का करूं...' जैसे गीतों पर दर्शक झूम उठे.

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लोक गायिका प्रिया मलिक.
लोक गायिका प्रिया मलिक.

Sahitya Aajtak 2022: राजधानी दिल्ली में आयोजित 'साहित्य आजतक 2022' के दूसरे दिन 'साहित्य और संगीत' सेशन में सिंगर प्रिया मलिक और कशिश मित्तल ने लोकगीत सुनाकर बिहारी और पंजाबी तड़का लगाया. कार्यक्रम की शुरुआत कशिश मित्तल ने जहां पंजाबी सूफी गीत 'दमा दम मस्त कलंदर' से की. वहीं, प्रिया मलिक ने सेशन का समापन स्नेहलता की मैथिली रचना 'ए पहुना ये मिथिले में रहूं ना...' से की.

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संगीत और साहित्य की महफिल में कशिश मित्तल ने अपने सूफी संगीत से दर्शकों को मोह लिया. कशिश ने शुरुआत ही जहां सूफी गीत दमा दम मस्त कलंदर से की. वहीं अमीर खुसरो के सूफी गीत 'छाप तिलक सब छीनी रे...' सुनाकर दर्शकों मंत्रमुग्ध कर दिया.

कशिश मित्तल के गीतों पर झूम उठे दर्शक.
कशिश मित्तल.

कशिश ने जब वी मेट फिल्म का गीत 'आओगे जब तुम ओ साजना...' , गुलजार का 'छोड़ आए हम वो गलियां...', 'किन्ना सोणा तैनूं रब ने बनाया...', 'तेरे बिन नहीं लगदा दिल मेरा ढोलना...' जैसे कई गाने गाकर समां बांध दिया.

प्रिया मलिक ने जलवा बिखेरा

लोकगीत और खासकर मैथिली गीत के लिए मशहूर प्रिया मलिक ने अपनी शुरुआत स्वर कोकिला लता मंगेशकर द्वारा गाए गीत 'आपके मंजिल हूं मैं, मेरी मंजिल आप हैं...' से की.

इसके बाद उन्होंने महेंद्र मिश्र की रचना 'अंगूरी में डसले पिया नगिनिया रे...' से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया. प्रिया ने 'आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया...', 'जहां-जहां डाल पर सोने की चिड़ियां...' 'मेरे पिया गए रंगून, किया है वहां से टेलीफोन .., जैसे गीत सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं.

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सूफी संगीत का जलवा आज भी बरकरार

सिविल सेवा की नौकरी छोड़ संगीत की दुनिया में आने वाले कशिश मित्तल ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सूफी संगीत की लिरिक्स का क्रेज ही इतना है कि यह आज युवाओं के बीच काफी प्रचलित हो रहा है. उन्होंने कहा कि सूफी संगीत में बुल्ले शाह और अमीर खुसरो जैसे संगीतकारों का अहम योगदान रहा है.

साहित्य समाज का दर्पण

प्रिया मलिक ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है. उन्होंने कहा कि साहित्य और सुर दोनों एक साथ चलते हैं. दोनों एक-दूसरे की आयु को बढ़ाते रहते हैं. प्रिया ने कहा कि साहित्यिक संगीत लाखों लोगों के दिलों में बसता है. इसलिए सदाबहार गाने आज भी इतने प्रचलित हैं.


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