साहित्य आज तक 2022 की तैयारियां जोरों पर हैं. अभी हम आपको गीत-संगीत जगत से जुड़ी उन हस्तियों के बारे में बता रहे हैं, जो साहित्य, शब्द और संस्कृति के इस महाकुंभ में अपना जलवा बिखेरेंगे. देश में भारतीय भाषाओं के साहित्य के सबसे बड़े मंच 'साहित्य आज तक 2022' की घोषणा के साथ ही आपके मन में यह कयास शुरू हो गया होगा कि इस साल इसमें कौन कब शिरकत करेगा.
हम आपको इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सहमत साहित्यकारों, गीतकारों और कलाकारों की जानकारी यहीं दे रहे हैं. आपको इतना तो हम बता ही चुके हैं कि देश की राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित मेजर ध्यानचऺद नेशनल स्टेडियम में यह मेला इस साल 18 नवंबर से 20 नवंबर तक होने जा रहा है.
हर साल की तरह इस साल भी हमारे अतिथियों की फेहरिस्त ज़रा लंबी है. इस बार साहित्य आज तक 2022 में एक ऐसे व्यक्ति भी शामिल होने जा रहे हैं जिनको सुनने के लिए लोग विदेश से चले आते हैं. इनके फॉलोवर सिर्फ भारत में नहीं बल्कि विदेश में भी करोंड़ो की संख्या में हैं. बिना इंतजार कराए हम आपको बता देते हैं कि ये व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि कथावाचक मोरारी बापू हैं.
मोरारी बापू की हर कथा का हर शब्द एक संदेश लिए होता है, जो आम लोगों को सत्मार्ग की ओर प्रेरित करता है. सामाजिक सरोकारों के लिए वो अपने कथावाचन के माध्यम से करोड़ों रुपयों की रकम जुटाकर संस्थाओं और सामाजिक हितों के लिए दान करते रहे हैं. कई मामलों में उन्हें आधुनिक समय का पहला आध्यात्मिक संत या धार्मिक व्यक्ति भी कहा जाता है, जिन्होंने आधुनिक समय में लोगों को सुकून दिलाने के लिए रामकथा का उपयोग किया.
मोरारी बापू का जन्म 25 सितंबर, 1946 को गुजरात के भावनगर जिले के तलगाजरडा गांव में हुआ था. बापू का परिवार 'वैष्णव बाबा साधू निंबार्क वंश' से संबंधित है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को बापू कहकर पुकारा जाता है. बापू का ज्यादातर बचपन अपनी दादी और दादा के साथ व्यतीत हुआ.
मोरारी बापू ने कभी अपने बारे में बताया था कि उनकी दादी उन्हें घंटों तक लोक कथाएं सुनाती थीं और उनके दादा उन्हें राम चरित मानस की चौपाइयां सुनाते और याद कराते थे. बापू ने 12 साल की उम्र में ही रामचरित मानस को कंठस्थ कर लिया था. 14 साल की उम्र में उन्होंने राम कथा का वाचन शुरू कर दिया और अपनी पहली रामकथा साल 1960 में अपने ही गांव में सुनाई थी.
आज आलम यह है कि मोरारी बापू की कथा को सुनने के लिए देश-विदेश से उनके चाहने वाले आते हैं. ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशी धरती पर भी उनके प्रवचनों के दौरान होता है. जहां कहीं मोरारी बापू की कथा आयोजन होता है, वहां लाखों की भीड़ इकट्ठा हो जाती है. मोरारी बापू की जो बात उन्हें खास बनाती है, वो है उनके कथा सुनाने का अंदाज. वे अपनी कथा में गद्य, पद्य, छंद, दोहा, सूक्तियां और शायरी भी पढ़ते हैं.
मोरारी बापू के नाम अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका के कई देशों सहित समंदर में तैरते क्रूज़ शिप, दुनिया की सैर पर निकले हवाई जहाज़ पर कथा सुनाने का अनोखा गौरव शामिल है. इसके अलावा वे चीन की सीमा पर कैलाश पर्वत के नीचे भी कथावाचन कर अपनी तरह का अनोखा रिकॉर्ड बना चुके हैं.
मोरारी बापू की कथा में नामी-गिरामी राजनेता, उद्योगपति, सिनेमा जगत की हस्तियां भी श्रोता के तौर पर नजर आती हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मोरारी बापू की कथा में बतौर श्रोता तब उपस्थित हो चुके हैं, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे.
तो अगर आप भी सुनना चाहते हैं मोरारी बापू की कथा तो लिख लीजिए साहित्य आज तक 2022 की तारीखें. ये मेला 18, 19 और 20 नवंबर को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में सज रहा है.
याद रहे कि हर बार की तरह इस साल भी 'साहित्य आज तक कला, सिनेमा, संगीत, थिएटर, राजनीति और संस्कृति से जुड़े दिग्गजों से टेलीविजन के बड़े एंकर उनकी किताबों, प्रस्तुतियों, काम, समसामयिक विषयों पर खुले मंच पर चर्चा करेंगे. इस दौरान नाट्य, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रखी गई हैं.
साहित्य आज तक के पिछले संस्करणों में जिन गायकों ने हिस्सा लिया है उनमें शुभा मुद्गल, वडाली ब्रदर्स, मालिनी अवस्थी, हंस राज हंस, कैलाश खेर, नूरा सिस्टर्स, निज़ामी बंधु, रेखा भारद्वाज, विद्या शाह, मैथिली ठाकुर, उस्ताद राशिद अली, उस्ताद शुजात हुसैन खान, रुहानी सिस्टर्स, स्वानंद किरकिरे, अनूप जलोटा, पंकज उधास, इरशाद कामिल, मनोज मुंतशिर, संदीपनाथ, शैली के अलावा सलमान अली आदि शामिल हैं.
'साहित्य आज तक' के मंच पर अब तक जावेद अख्तर, अनुपम खेर, कुमार विश्वास, प्रसून जोशी, पीयूष मिश्रा, अनुराग कश्यप, चेतन भगत, आशुतोष राणा, कपिल सिब्बल, नजीब जंग, हंस राज हंस, मनोज तिवारी, अनुजा चौहान, रविंदर सिंह, चित्रा मुद्गल, अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, मालिनी अवस्थी, दारेन शाहिदी, उदय माहुरकर, हरिओम पंवार, अशोक चक्रधर, पॉपुलर मेरठी, गोविंद व्यास, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, राजेश रेड्डी, स्वानंद किरकिरे, नासिरा शर्मा, मैत्रेयी पुष्पा, शाज़ी ज़मां और देवदत्त पटनायक जैसी हस्तियां शामिल हो चुकी हैं.
साहित्य आज तक यानी शब्द, संगीत और संस्कृति के इस महाकुंभ में गायन, वादन, चर्चा, बहस, साहित्यिक परिचर्चा के अलावा मुशायरा और कवि सम्मेलन भी हो रहा है. तो कौन, कहां, कब, किस मंच की शोभा बढ़ाएगा, इसकी जानकारी आपको आने वाले दिनों में इसी जगह मिलती रहेगी, पर असली सूची रजिस्ट्रेशन की लाइन ओपेन होने के बाद ही पता चलेगी.