Sahitya AajTak 2024: शब्द-सुरों के महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2024' का कोलकाता में आज आगाज हो गया. दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में पहले दिन पौराणिक कथाकार, लेखक और वक्ता देवदत्त पटनायक ने अपने अनुभव साझा किए. पटनायक ने पौराणिक कथा बनाम मिथ्या और उपन्यास बनाम आख्यान पर कई जरूरी बातें बताई. सत्य क्या है इस सवाल के जवाब में लेखक ने कहा कि जब आप ये जानते हो कि आपके बिना भी दुनिया चलेगी. आप रहें न रहें ये दुनिया चलती रहेगी. यही सत्य है.
मिथ्या शब्द के बारे में बताते हुए देवदत्त पटनायक ने कहा कि मिथ्या शब्द का मतलब है खंडित शब्द. मनुष्य अक्सर मिथ्या में जीता है. रामायण महाभारत आख्यान है. ये मिथ्या नहीं है. संस्कृत में इतिहास का मतलब है कि जहां लेखक साक्षी है. वाल्मीकि रामायण इतिहास है. महाभारत को इतिहास कहा गया है. उन्होंने कहा कि ऋषि मंत्र को सुनते नहीं हैं, उन्हें देखते हैं.
धर्म क्या है?
इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जब हम धर्म शब्द इस्तेमाल करते हैं तो लोग धर्मशास्त्र की ओर जाते हैं. लेकिन, जब शक्तिशाली शक्तिहीन की रक्षा करता है तो वह धर्म है. धर्म अगर समझना है तो पुनर्जन्म को समझना होगा. जहां धर्म शब्द है वहां कर्म की भी प्रधानता है. उन्होंने बड़ी बारीकी से धर्म का मतलब समझाया. भगवान शब्द के बारे में पटनायक ने कहा कि जो दुनिया में भागीदारी करता है उसे हम भगवान कहते हैं.
कर्म के बारे में देवदत्त पटनायक ने कहा कि कर्म एक्शन और रिएक्शन दोनों है. पटनायक ने कर्म के बारे में विस्तार से समझाया. उन्होंने कई उदाहरण दिए. जब आप भोग ले रहे हैं वो कर्म है. ऋण से मुक्ति प्राप्त करना वो भी कर्म है.
धन किसे कहते हैं?
इस सवाल के जवाब पर देवदत पटनायक ने कहा कि जो भूख लगी है वो लक्ष्मी है. भूख लगने पर इंसान भोग लेता है उसे लक्ष्मी कहते हैं. हालांकि, इसके बारे में उन्होंने विस्तार से समझाया. कई मिसाल पेश किए. लक्ष्मी का मतलब वह चीज है जो आपकी भूख मिटाता है. उन्होंने कहा कि सरस्वती की दुनिया सिर्फ मनुष्य के पास है.
मंदिर क्या है?
मंदिर का मतलब समझाते हुए पटनायक ने कहा कि मंदिर एक स्थान है. भारत में मंदिर को लोग अलग-अलग तरह समझते हैं. इसके अलग अलग मतलब हैं. हिंदू धर्म में मंदिर का मतलब भगवान का घर है. हम उसमें प्राण प्रतिष्ठा करते हैं. भगवान के लिए हम भोग लगाते हैं, क्योंकि उन्हें भूख लगती है.
जीवन क्या है?
देवदत्त पटनायक ने कहा, जीवन का मतलब खाना है, भोग बिना जीवन नहीं है. वस्तुओं में जीव नहीं होता. इसलिए जीवन का मतलब भूख लगना है, तो हम भोग लेते हैं.
मृत्य क्या है?
लेखक ने बताया कि जब भूख नहीं लगेगी यह मृत्यु है. क्योंकि शव को भूख नहीं लगती है. उन्होंने हर शब्द के बारे में उदाहरण देकर समझाया. गरुण पुराण में मृत्यु के बारे में बताया गया है. स्वर्ग के बारे में उन्होंने कहा कि जब बहुत पैसा होता है तो वह स्वर्ग है. स्वर्ग की परिभाषा सबके लिए अलग-अलग है.
सौन्दर्य के बारे में लेखक पटनायक ने कहा कि यह भोग है. एक प्रकार का भोग खाना होता है. संस्कृति के बारे में पटनायक ने कहा कि जो मजबूत किसी कमजोर का भोग कर देता है तो यह संस्कृति है. कई तरह के ऋण होते हैं. इंसान को हमेशा याद रखना चाहिए कि उसका मृत्यु निश्चित है. सबको साथ में लेकर चलना संस्कृति है.
अहंकार क्या है?
ये मानना कि मेरी बिना दुनिया नहीं चल सकती है. जब मैं नहीं रहूंगा तब क्या होगा? सूरज नहीं होगा तो दुनिया नहीं चलेगी, लेकिन राजा नहीं रहेगा तो दुनिया चलेगी.