Sahitya Aaj Tak 2023: दिल्ली में आज 24 नवंबर से सुरों और अल्फाजों का महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2023' शुरू हो गया है. इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में कई जाने-माने लेखक, साहित्यकार व कलाकार शामिल हो रहे हैं. साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2023' के मंच से पहले दिन कई जानी मानी हस्तियों ने भाग लिया. इस दौरान लेखक, कवि और गीतकार मनोज मुंतशिर ने तमाम बातें कीं. मनोज मुंतशिर की किताब 'जो मेरी नस नस में है' रिलीज हो चुकी है, इसमें उन्होंने मां, मातृभूमि और मोहब्बत पर बातें की हैं.
मनोज अपने रोमांटिक गीतों में भी खास इंकलाबी तेवर रखते हैं. कार्यक्रम की शुरुआत में मनोज की किताब 'जो मेरी नस नस में है' किताब से लिए गए शब्दों के साथ स्क्रीन पर वीडियो प्ले किया गया, जिसकी पूरी कहानी किताब से ली गई थी.
''मुंबई का एक इलाका. रात के लगभग 11 बजे का समय. मेन रोड से लगी हुई कुछ खोलियां. उनमें से एक का दरवाजा तेज आवाज के साथ खुलता है और VIP का एक फटा-पुराना बैग बाहर फेंक दिया जाता है. एक महिला के चीखने की आवाज आती है, ' जेब में दो कौड़ी नहीं और बातें बड़ी -बड़ी, कहीं और जाके भीख मांग. हवा में फेंका हुआ बैग खुल जाता है. एक डायरी के कुछ पन्ने, एक फाइल में रखे हुए कुछ ए-4 साइज के कागज फड़फड़ाते हुए सड़क पर चारों ओर बिखर जाते हैं.
23 साल का एक लड़का खोली के उसी खुले हुए दरवाजे से दौड़ता हुआ बाहर आता है और बदहवास हवा में उड़ते हुए पन्ने समेटने लगता है. आधी रात होने को है, लेकिन सड़क पर ट्रैफिक अभी कम नहीं हुआ. आती-जाती गाड़ियों से बेपरवाह वह लड़का रोता जा रहा है और एक-एक पन्ने के पीछे भागता जा रहा है. ब्रेक मारती हुई गाड़ियों से मुंह निकालकर लोग गालियां बकते हैं, ' अबे, मरेगा क्या.' पता नहीं यह तमाशा कितनी देर चला, लेकिन लड़के ने सारे पन्ने समेट लिए और हवा ने सारे आंसू सुखा दिए. समेटे हुए वही पन्ने और सूखे हुए आंसू किताब बनकर आज आपके हाथों में हैं-संभाल लीजिए...''
मनोज की किताब में 23 साल के लड़के का जिक्र है. उस पर भी बात की गई. इस दौरान मनोज गौरीगंज, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कटरा, पुश्तैनी गांव, लखनऊ की स्मृतियों में भी उतर गए. उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का भी जिक्र किया.
मनोज ने कहा कि आज इस मौके पर मेरी किताब का लोकार्पण होगा.
मनोज बोले- संघर्षों की कहानी सबकी एक जैसी होती है
मनोज ने कहा कि संघर्षों की कहानी सबकी एक जैसी होती है. संघर्ष का ग्राफ बहुत अलग नहीं होता. कल कोई और लड़का इसी मंच पर बैठकर अपनी कहानी सुना रहा होगा. ये जो सूरज देख रहे हो, जुगनू जुगनू बोया हमने. दुख जब मिलने आया हमसे... कविता सुनाई. उन्होंने कहा कि मां, मातृभूमि और मुहब्बत ये तीनों इस किताब में हैं.
मनोज ने कहा कि जावेद अख्तर याद आते हैं, वे कहते हैं कि अपनी वजह बर्बादी सुनिए तो मजे की है, जिंदगी से ऐसे खेलें जैसे दूसरे की है. तो जिंदगी ठीक ही चल रही है. बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ जाना. इस दौरान मनोज से आदिपुरुष फिल्म और कंट्रोवर्सी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 16 जून को आदिपुरुष रिलीज हुई थी. अब मैं अपनों के बीच में हूं. आप मुझसे नाराज हो सकते हैं. आपकी शिकायत शिरोधार्य है. आपकी शिकायत शब्द शब्द सच है, उसमें कुछ भी झूठ नहीं है.
'आदिपुरुष' के डायलॉग्स पर हुई ट्रोलिंग को लेकर क्या बोले मनोज?
'आदिपुरुष' के डायलॉग्स पर हुई ट्रोलिंग को लेकर जब मनोज से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आज मैं अपनों के बीच में हूं. उन्होंने कहा कि जब गलती हो रही होती है तो पता नहीं चलता कि ये गलती हो रही है. ये बाद में पता चलता है. गलती सिर्फ एक पन्ना है. अगर किसी किताब में स्याही लग जाए तो पूरी किताब मत फेंको, सिर्फ वो पन्ना फाड़कर फेंक दो. इस दौरान जब सवाल किया गया कि सारी गलती आपने ही क्यों स्वीकार की? मनोज ने कहा कि मैं क्या करता. मनोज ने एक शेर सुनाकर बात आगे बढ़ाई.
मनोज ने कहा कि आपके आशीर्वाद से मैं भगवान श्रीराम पर लिखता रहूंगा. मनोज ने लोगों से कहा कि आपको मुझसे इतनी शिकायतें थीं, इसके बाद भी आपने मुझे माफ कर दिया और मेरे गानों पर दिवाली मनाई. मनोज ने कहा कि आदिपुरुष के कुछ डॉयलाग ऐसे भी थे, जो जनता तक नहीं पहुंच सके. वे भी पहुंचने चाहिए थे.
मां, मातृभूमि और मुहब्बत
मनोज की किताब की टैगलाइन मां, मातृभूमि और मुहब्बत... है. मनोज ने किताब की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं. उन्होंने कहा कि तुम्हारी मां से खूबसूरत दुनिया की कोई भी लड़की हो नहीं सकती. इसी के साथ मातृभूमि पर बात करते हुए कहा कि हमारे लिए कोई पराया नहीं है. सब हमारे हैं.
उन्होंने कहा कि 'कभी हमने अपना पराया न जाना. किसी से कभी द्वेष रखा न माना' और 'दुनिया वालों जितनी ताकत हो लगाओ, हम हिंदुस्तानियों को रोक के दिखाओ' कविता पढ़ीं. सुनो दुनिया वालों आज दुनिया के सबसे कामयाब लोगों की लिस्ट में 7 भारतीय होते हैं. हम अग्निपुत्रों के बिना आग कहां से लाओगे.
'वो लड़की अब पराई हो चुकी है...' सुनाकर लूटीं तालियां
इस दौरान मनोज ने कहा कि 'जो प्यार पूरा हो चुका है वो बाजार में धनियां खरीद रहा होता है. अधूरा प्यार ताकत है. हम हारने वाले लोग नहीं हैं. जिसे ठुकरा दिया मिट्टी समझकर वो लड़का आज तारों पर खड़ा है.' इसी के साथ मनोज ने वो लड़की अब पराई हो चुकी है... कविता सुनाई. इसी के साथ कार्यक्रम के अंत में मनोज मुंतशिर की किताब का लोकार्पण किया गया.