कोलकाता में साहित्य आजतक का ग्रैंड स्केल पर आगाज हुआ. इस प्रेस्टीजियस मंच पर बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने शिरकत की. एक्टर ने श्वेता सिंह संग कई मुद्दों पर बातचीत की. शत्रुघ्न ने बताया कि कैसे उनके पहचाने जाने वाले 'खामोश' की शुरुआत हुई. एक्टर ने बताया कि उन्होंने शुरुआत तो विलेन के तौर पर की थी, लेकिन फिर हीरो के तौर पर पहचान बनाई.
शत्रुघ्न का दर्द
एक्टर ने बताया कि कई हीरोज को तकलीफ होती थी कि मुझे फिल्मों में काफी फुटेज दिया गया. शत्रुघ्न ने बताया कि इस पूरी जर्नी के पीछे एक दर्द भी छुपा है. वो बोले कि एक वक्त था जब हीरोज मेरे साथ काम नहीं करना चाहते थे. उन्हें लगता था कि ये विलेन है फिल्म में, लेकिन हमसे ज्यादा नाम कमा रहा है. डायलॉग ज्यादा अच्छे हैं. किरदार अच्छा है. तो लोग मेरे साथ काम करने से मना कर देते थे. बहाने मार देते थे कि ये लेट आता है, व्यवहार अच्छा नहीं है. मुझे काम मिलना बंद हो गया था. तो मुझे हीरो के तौर पर काम करना पड़ा. तो मेरे करियर की नई शुरुआत हुई.
धर्मेंद्र-अमिताभ जैसा स्ट्रगल नहीं किया
शत्रुघ्न ने बताया कि हमने स्ट्रगल किया है. लेकिन उतना नहीं शायद जितना धर्मेंद्र साहब ने किया या अमिताभ बच्चन ने किया. धर्मेंद्र तो खुद अपनी रील के डिब्बे उठाकर ले जाते थे. अमिताभ का हमने सुना था कि वो कभी बेंच पर भी सोए हैं. उनका स्ट्रगल ही अलग है. अब तो सोशल मीडिया है. ऑनलाइन सब चलता है. हमने कभी ये नहीं किया लेकिन हां दो-तीन दिन तक भूखे जरूर रहे हैं. करियर को सामने खत्म होते देखा है. फिर दोबारा शुरू किया है. ठोकरें खाई है.
शत्रुघ्न ने आज की युवा कलाकारों को टिप्स देते हुए कहा- कॉन्फिडेंस, कन्विक्शन, डेटरमिनेशन, डिवोशन और सबसे ऊपर पैशन. इन सब को मिलाकर बनेगा करियर, इसके बिना कुछ संभव नहीं है. इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ में अपने आपको सबसे बेहतर बनाने की कोशिश करो. अगर सबसे बेहतर नहीं दिखा सकते तो अलग बनाने की कोशिश करो. शत्रुघ्न सिन्हा कभी किसी की नकल नहीं करता. गुड बैड और अग्ली, मैं ऐसा ही हूं. मुझे ऐसे ही स्वीकार करो.
अपने डायलॉग्स पर बात करते हुए वो बोले- खामोश का तो मतलब ही बदल गया है. लेकिन अब बच्चे तक मां-बाप को खामोश करते हैं. ये बहुत बुरा शब्द है. लेकिन अब इसमें मिठास आ गई है.
जली को आग कहते हैं...
शत्रुघ्न बोले- हमने नहीं सोचा था कि ये पॉपुलर होगा. एक फिल्म 'जग्गू ने जिस डाली पर नजर डाली, वो डाली... डाली ना रही'. 'अंडे से चोंच निकली नहीं कि खरोंच मारने सोच रहा है.' तो जली को आग कहते हैं... डायलॉग के लिए हमने इतना नहीं सोचा था. सुभाष घई और हम बैठे हुए थे और इस कैरेक्टर की एंट्री के बारे में सोच रहे थे. पहली बार कैरेक्टर दाढ़ी और चश्मा पहने एंट्री ले रहा था स्क्रीन पर. तो एक डायलॉग लिखा गया. जब सामने आया तो बस छा गया. बहुत हिट हुआ.
दिवंगत एक्टर सुशांत की तारीफ
शत्रुघ्न ने दुख जताते हुए कहा कि नाजाने क्या हो गया कि बिहार का कोई स्टार नहीं बन पाया. ऐसा नहीं कि अच्छे एक्टर्स नहीं आए बिहार से, मनोज बाजपेयी है, सुशांत सिंह राजपूत था. मैं मानता हूं कि अगर आज होता तो बहुत अच्छा स्टार बनता. मैंने बाद में जाना कि वो बिहार का था और कितना अच्छा एक्टर था. आज के कई लोग स्टार बनना चाहते हैं, लेकिन ये नहीं बताना चाहते हैं कि वो बिहार के हैं. कई लोग रेकमेंडेशन चाहते हैं लेकिन रिक्वेस्ट करते हैं कि प्लीज सर ये मत बताइयेगा कि मैं बिहार से हूं. मुझे दिल्ली का ही बताइयेगा.
सोनाक्षी के जन्म की इंटरेस्टिंग कहानी
मैं यहीं कोलकाता में फिल्म की शूटिंग कर रहा था. गोतम घोष की फिल्म थी, मैं क्लाइमैक्स की शूट कर के उठा ही था. तो मुझे गौतम ने बताया कि तुम जाओ, गुड न्यूज है. तुम्हारी बेटी हुई है. तो मैं आसनसोल के कीचड़ से निकलकर कैसे कैसे कलकत्ता गया. लेकिन उस वक्त मैं एक चांडाल का रोल कर रहा था. बढ़ी हुई दाढ़ी थी. वही गेटअप था. तो मैं वैसे ही अस्पताल पहुंच गया. वहां सच में फिल्म का सीन हो गया. हम बहुत खुश थे कि जुड़वा बेटों के बात बेटी हुई है. लेकिन इनकी मां रो पड़ी हमें देखकर. हमें बोलीं कि आप खुश नहीं हैं कि बेटी हुई है. ऐसे आए हैं. तो हम बोले अरे अभी हम आए हैं, चांडाल का कैरेक्टर है. गेटअप लिया है. ऐसा मत सोचो. हम बहुत खुश हैं.
इसी के साथ वो बोले- मैं इतना खुश हुआ कि सोनाक्षी का डायलॉग इतना हिट हुआ था. पहली ऐसी एक्ट्रेस है, जिसकी पहली फिल्म का पहला डायलॉग इतना हिट कि तालियां बज रही थी थियेटर में. मैं देखकर हैरान रह गया था, बाद के डायलॉग नहीं सुन पाया था.
मीना कुमारी ने दी सीख
शत्रुघ्न ने बताया कि उनकी पहली फिल्म लेजेंड्री एक्ट्रेस मीना कुमारी के साथ थी. उन्हें याद कर वो इमोशनल हो गए. वो बोले- मुझे बहुत अच्छा लगता था. कहीं ना कहीं वो भी देखती थीं कि लड़का स्ट्रगल कर रहा है. तो वो मुझे सिखाती थीं. कहां पॉज लगाना है, कहां रुकना है, कहां नहीं. वो मुझसे प्रैक्टिस करवाती थीं. बोलती थीं ऐसे कहो, वैसे कहो. ये डायलॉग पर इस तरह से जोर डालो. वो मेरी गुरु थीं. उन्होंने ही मुझे डायलॉग बोलना सिखाया है. मीना कुमारी जी को याद कर आंखें नम हो जाती हैं.
शोले-दीवार फिल्म छोड़ने का अफसोस
शत्रुघ्न ने बताया कि शोले में उन्हें ही अमिताभ बच्चन के जय का रोल मिला था. दीवार फिल्म भी उन्हीं के पास थी. 6 महीने तक वो उसपर काम शुरू नहीं कर पाए. इसके बाद अमिताभ के पास गए. इसी वजह से वो आजतक इस फिल्म को देख नहीं पाए. क्योंकि उन्हें अफसोस होता है. उस दौरान शत्रुघ्न के पास काफी फिल्में थी. उन्हें डेट्स नहीं दे पाए थे. इसी के साथ उन्होंने बताया कि मनोज कुमार की शोर भी उन्होंने आजतक नहीं देखी. क्योंकि वो भी उनके पास पहले आई थी, लेकिन कर नहीं पाए डेट के चक्कर में. शत्रुघ्न ने कहा कि उन्हें अपने उन फिल्मों को ना कर पाने का अफसोस रहा, लेकिन इसी के साथ खुशी भी रही कि वो फिल्में अमिताभ या किसी और अच्छे एक्टर्स के पास गई. सबने नाम कमाया. शत्रुघ्न ने इसी के साथ मनोज कुमार को भारत रत्न देने की बात कही.
हेमा मालिनी की तारीफ
हेमा मालिनी की तारीफ करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैं उनकी तारीफ हमेशा करूंगा क्योंकि उन्होंने बेकार के बहाने मारकर शुटिंग कैंसिल नहीं की. उन्होंने कभी नहीं कहा कि मेरा झगड़ा हुआ है, नहीं आऊंगी. भले ही जिसके साथ उनका झगड़ा हुआ वो शूट पर ना आए, लेकिन वो हमेशा आईं. तो ये स्टारडम कभी किसी पर शूमार नहीं होना चाहिए. हम तो कंजक्टिवाइटिस के दौरान भी शूट करने पहुंच गए थे. चश्मा पहन कर गए थे. तो गुलजार साहब ने खुद मना किया कि नहीं आज नहीं शूट करेंगे. आपकी आंखें बोलती हैं. पहला शॉट है, ऐसा नहीं हो पाएगा. कोई बात नहीं आज आप जाइये दो दिन में जब ठीक होगा तब करेंगे. हम पर तो पहाड़ टूट पड़ेगा.
मुमताज की वजह से मिली फिल्म
शत्रुघ्न ने बताया कि कैसे उन्हें हमेशा सलाह मिलती रही है. रिश्तेदार कई आते थे शूटिंग देखने तो बोलते थे कि अरे शत्रु ये तो सब नकली कर रहे हो. गुस्सा कर रहे हो लेकिन आ नहीं रहा है. डाकू बने हो, लेकिन हो नहीं. तो हम कहते थे कि अब क्या मर्डर का सीन हो तो सच में मर्डर करेंगे. एक्टिंग का तो क्या है कि पॉलिटिक्स की तरह है. चाय की दुकान हो या पान की दुकान हो, हर जगह डिस्कस होती है. ऐसे ही मुमताज की वजह से एक फिल्म मिली, जिसमें संजीव कुमार भी थे. उस सेट पर हर किसी ने हेयर ड्रेसर या स्पॉट बॉय तक ने मुझे डरा दिया था. लेकिन मुमताज जी इतनी अच्छी महिला हैं. उन्होंने देखा तो सबको डांटा और मुझे समझाया. फर्स्ट हाल्फ तक जो सीन मुझसे नहीं हो पा रहा था, सेकेंड हाल्फ में एक बार में हो गया.
आगे का प्लान...
शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि वो असल में पीपल्स एक्टर रहे हैं. वो फिलहाल बेटी सोनाक्षी सिन्हा और परेश रावल के साथ एक फिल्म कर रहे हैं. इसकी शूटिंग लंदन में हुई है. इसी के साथ वो राजनीति में भी सक्रिय हैं. एक्टर बोले- राजनीति को मैं अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानता हूं. इसमें मैं नि:स्वार्थ भावना से आया हूं. किसी पर भी मैंने आजतक बेमतलब का आरोप नहीं लगाया है. साहित्य की बात करना चाहता हूं, करता रहूं और आगे बढ़ता रहूं. जाते जाते शत्रुघ्न सिन्हा ने ऑडियन्स की डिमांड पर कालीचरण फिल्म का डायलॉग भी सुनाया. बिहारी बाबू के लिए बजी तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा ऑडिटोरियम गूंज उठा.