प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने अपनी केदारनाथ यात्रा का भावुक वर्णन किया. उन्होंने बताया कि कैसे पैदल चलकर मंदिर पहुंचने पर उन्हें अलौकिक अनुभव हुआ. शिव के दर्शन से उनके जीवन के कठिन समय का दुख दूर हुआ. त्रिपाठी ने कहा कि तीर्थयात्रा में तपस्या और परिश्रम का महत्व है. उन्होंने अपनी पुस्तकों में शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन किया है, लेकिन फिर भी शिव की महिमा अपार है.