
साहित्य के सितारों का महाकुंभ, साहित्य आजतक 2023 दिल्ली में शुरू हो चुका है. साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए इस आयोजन में हर दिन ऐसे कई मेहमान आने वाले हैं जिन्हें सुनना बहुत दिलचस्प होने वाला है. शुक्रवार को इस इवेंट के 'दस्तक दरबार' चार ऐसे नामचीन लेखक मंच पर मौजूद थे जिन्होंने बॉलीवुड या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों की बायोग्राफी और उनपर किताबें लिखी हैं.
अजय ब्रह्मात्मज, डॉक्टर नरेंद्रनाथ पांडेय, हरीश पाठक और यतींद्र मिश्रा ने बताया कि जब बॉलीवुड कलाकारों के जीवन पर लिखना किस तरह के चैलेंज लेकर आता है. इन चारों ने यह भी बताया कि किसी की बायोग्राफी लिखते हुए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. अजय ब्रह्मात्मज ने ये भी बताया कि अपने जीवन के आखिरी समय में इरफान ने उनसे क्या बात कही थी.
जब इरफान को हॉस्पिटल में याद आया मुंबई का पहला कमरा
अजय ब्रह्मात्मज ने बताया कि इरफान के जीवन पर उन्होंने सिर्फ किताब ही नहीं लिखी, बल्कि दोनों में काफी अच्छी दोस्ती भी थी. इरफान जिन दिनों हॉस्पिटल में अपना ट्रीटमेंट करवा रहे थे, तब अजय उनसे लगातार बातचीत करते रहते थे. अजय ने बताया कि वो इरफान को उनकी खराब फिल्मों से उनके किरदारों की तस्वीरें भेजकर पूछते थे कि क्या उन्हें ये याद है? और इरफान को आखिरी समय तक सबकुछ एकदम सही से याद था.
अजय ने बताया कि एक दिन उन्होंने इरफान को उस कमरे की तस्वीर भेजी, जिसमें मुंबई आने के बाद इरफान पहली बार रुके थे. इरफान को अपना वो कमरा अच्छे से याद था. लेकिन अपने अंतिम समय में वो थोड़े दार्शनिक होने लगे थे. उन्होंने फोटो देखकर कहा, 'ये दस बाय दस का वो कमरा है जिसमें मुंबई आने के बाद मैं रहा था. आज भी मैं दस बाय दस के एक कमरे में ही हूं (हॉस्पिटल के कमरे में). ऐसा लगता है कि मैंने ये सब जो घर वगैरह जुटाया, सब फिजूल है!'
राज बब्बर की शख्सियत में अनोखी खासियत
दमदार अभिनेता राज बब्बर की बायोग्राफी लिखने वाले हरीश पाठक ने बताया कि उन्हें राज जी की क्या बात हैरान करती है. उन्होंने कहा कि किताब लिखने के दौरान भी वो लोगों से मिले और इतने लंबे राजनीतिक करियर के बावजूद आज भी राज बब्बर पर कोई आरोप नहीं है, ये बहुत हैरान करने वाला था. उन्होंने बताया कि उन्हें राज बब्बर की जीवनी लिखने की प्रेरणा इस बात से मिली कि रेलवे में एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के बेटे ने कैसे फिल्में करने का सपना सच किया.
लेजेंड म्यूजिक डायरेक्टर चित्रगुप्त के बारे में लोगों को कम ही याद रहता है. उनकी बायोग्राफी लिखने वाले डॉक्टर नरेंद्रनाथ पांडेय ने बताया कि चित्रगुप्त, भोजपुरी फिल्मों के पहले म्यूजिक डायरेक्टर भी थे. वो और मोहम्मद रफीएक फिल्मी गाने की रिकॉर्डिंग में, कोरस में गाने का ऑडिशन देने साथ ही पहुंचे थे.
लता मंगेशकर और गुलजार की बायोग्राफी लिखने वाले यतींद्र मिश्रा ने कहा कि इंटरनेट पर ग़ालिब, हरिवंश राय बच्चन और गुलजार के नाम पर इतना कुछ फैलाया जा चुका है कि उन्हें दस साल तो ये चेक करने में ही निकल गए कि क्या गुलजार का है और क्या नहीं! साहित्य के सितारों के महाकुंभ, साहित्य आजतक 2023 में आप भी ऐसे मजेदार सेशंस का हिस्सा बन सकते हैं.