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भ्रष्टाचार से निपटने का अंतर्लोकपाल फॉर्मूला बताएगा चक्रधर का चंपू

चचा ने भ्रष्टाचार के बारे में कुछ पूछा तो चंपू ने जवाब दिया, भ्रष्टाचार किसी लोकपाल द्वारा ठिकाने नहीं लगेगा, मजबूत अंतर्लोकपाल द्वारा ही परास्त होगा. अब ये अतर्लोकपाल क्या बला है भला. तो यह बताएंगे मशहूर कवि और लेखक अशोक चक्रधर.

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Ashok Chakradhar
Ashok Chakradhar

चचा ने भ्रष्टाचार के बारे में कुछ पूछा तो चंपू ने जवाब दिया, भ्रष्टाचार किसी लोकपाल द्वारा ठिकाने नहीं लगेगा, मजबूत अंतर्लोकपाल द्वारा ही परास्त होगा. अब ये अतर्लोकपाल क्या बला है भला. तो यह बताएंगे मशहूर कवि और लेखक अशोक चक्रधर. उन्होंने हाल ही में एक किताब लिखी है, 'चंपू का अंतर्लोकपाल'. वाणी प्रकाशन से छपी इस किताब का बुधवार को नई दिल्ली के ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में लोकार्पण किया जाएगा. इस दौरान अशोक चक्रधर पाठकों से बातें भी करेंगे. कार्यक्रम शाम 6 बजे से शुरू होगा.

किताब के बारे में
कई बार लग सकता है कि चम्पू अपने उत्तरों के लिए ही चचा से सवाल पुछवाता है. एक पाठक ने मुझसे कहा था कि लगता है चचा भी आप हैं और चम्पू भी आप ही हैं. मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया. उनसे कहा, एक आदमी एक ही तरह से सोचे, जरूरी नहीं है, हो सकता है कि उस एक आदमी के अंदर दो आदमी हों. अलग-अलग तरह से सोचने वाले.

हम समझते हैं कि हम अपने सोच के स्वरूप को जानते हैं, ऐसा है नहीं. कभी-कभी यह भी होता है कि हम जो जानते हैं, हमें लगता है कि हम नहीं जानते हैं. हमारे आभ्यंतर और बहिर्जगत में सतत एक द्वन्द्व रहता है. मुक्तिबोध कहते हैं कि हमारी चेतना इन दोनों में तालमेल बिठाती है. चचा और चम्पू में से कोई एक बाहर की दुनिया की बात करता है और दूसरा अंतर्मंथन के बाद बोलता है. बहरहाल, वर्ष सन दो हजार, अन्दर और बाहर के भ्रष्टाचार को समर्पित रहा है.

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चचा ने भ्रष्टाचार के बारे में कुछ पूछा तो चम्पू ने जवाब दिया, भ्रष्टाचार किसी लोकपाल द्वारा ठिकाने नहीं लगेगा, मजबूत अंतर्लोकपाल द्वारा ही परास्त होगा. हम बाहर के ब्रह्मांड को छान मारें और अपने अन्दर की दुनिया को न निहारें कि वहां कैसे-कैसे कांड हो रहे हैं, ऐसा कैसे चलेगा? बाहर बैठा लोकपाल कहां-कहां कैमरे लगवाएगा. मरी हुई आत्मा के लोग कहते रहेंगे, इत्ते हमारे, इत्ते तुम्हारे, क्या कर लेंगे अन्ना हजारे? खाने वाले खाएंगे आइसक्रीम, क्या कर लेगी बड़बोली टीम? दोनों मानते हैं कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बाहर बिठाए गए लोकपाल की तुलना में अन्दर बिठाया हुआ अंतर्लोकपाल ज्यादा मजबूत सिद्ध होगा. अब ये तो समय ही बताएगा कि आगे क्या होना है.

सभी लोकतांत्रिक शक्तियां एक बार जनता के मन में यह धारणा बिठाएं कि वे लोकपाल बिल की समर्थक हैं. अब वह लोकपाल-विधान लोकतंत्र का भूत साबित होगा या मजबूत, यह तो उसके पालनकर्ताओं और व्यवहर्ताओं पर निर्भर करेगा. रह-रह कर मुझे बाबा साहब अम्बेडकर की बात याद आती है, उन्होंने कहा था कि कोई संविधान कितना ही अच्छे से अच्छा क्यों न बने, अगर उसका पालन करने वाले लोग अच्छे नहीं हैं तो उस संविधान का लाभ न उठा पाएंगे. और कोई संविधान कितना ही कमजोर क्यों न हो, अगर उसके चलाने वाले अच्छे हैं तो वह भी लाभकारी हो सकता है. इसी तरह से लोकपाल बिल है, कमजोर बनाओ या मजबूत, अगर उसका अनुपालन करने वाले सही हैं, उनकी नीयत में मट्ठा या दही नहीं है, तो देश ठीक होगा. मजबूत से मजबूत और कठोर से कठोर लोकपाल भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त कर देगा, ऐसा सोचना भयंकर भूल है. ऊपर से लाया गया, कानून द्वारा बनाया गया, संसद के वाद-विवाद, बहसों के बाद पारित किया हुआ कोई भी लोकपाल बिल और कोई भी लोकपाल या जनतंत्र का ठोकपाल इस देश में भ्रष्टाचार का समूल नाश कर नहीं सकता.

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अशोक चक्रधर के बारे में
जन्म: 8 फरवरी 1951, खुर्जा (उ.प्र.) में.
शिक्षा: एम.ए., एम.लिट., पीएच.डी. (हिंदी), ‘कैरिअर अवार्ड’ उत्तर पीएचडी
शोध-कार्य (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)
संप्रति: समंवयक (हिंदी), जीवनपर्यंत शिक्षण संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110007
प्रकाशित रचनाएं: बूढ़े बच्चे, भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, सो तो है, हँसो और मर जाओ, ए जी सुनिए, इसलिए बौड़म जी इसलिए, खिड़कियाँ, बोल-गप्पे, जाने क्या टपके, देश धन्या पंच कन्या, चुनी चुनाई, सोची समझी, मंच मचान, चम्पू कोई बयान नहीं देगा, कुछ कर न चम्पू, चम्पू को अचरज भारी.
नाटक: रंग जमा लो, बिटिया की सिसकी, बंदरिया चली ससुराल, जब रहा न कोई चारा, लल्लेश्वरी.
इसके अतिरिक्त बाल साहित्य, प्रौढ़ एवं नवसाक्षर साहित्य, समीक्षा, अनुवाद, काव्यानुवाद, पटकथा आदि अनेकों विधाओं में लेखन. फिल्म, टेलीफिल्म, वृत्तचित्र, धारावाहिक, फीचर फिल्म व दूरदर्शन में लेखन, निर्देशन व अभिनय के साथ साथ कविसम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय व्यक्तित्व.
अशोक चक्रधर सिडनी यूनिवर्सिटी, सिडनी, आस्ट्रेलिया में विजिटिंग स्कॉलर, संचालन समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, गवर्निंग बॉडी, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली व सांस्कृतिक सचिव, ब्रज कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य, काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट, हाथरस के ट्रस्टी तथा हिंदी सलाहकार समिति, ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, हिमाचल कला संस्कृति और भाषा अकादमी, हिमाचल प्रदेश सरकार, शिमला के भूतपूर्व सदस्य के पदों पर रह चुके हैं.

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