शब्द-सुरों का महाकुंभ, साहित्य आजतक का आज दूसरा दिन है. 18 से 20 नवंबर तक दिल्ली के मेजर ध्यानचऺद नेशनल स्टेडियम में आयोजित हो रहे साहित्य आजतक में सिनेमा, संस्कृति, संगीत, सियासत और थिएटर से जुड़े जाने-माने चेहरे हिस्सा ले रहे हैं. कार्यक्रम के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम शामिल हुए. जिन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के विचारों को कमजोर किया गया है.
उन्होंने कहा कि देश में सेक्युलरिज्म की अवधारणा को बर्बाद कर दिया गया है.भारत में बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि भारत के साथ जो हो रहा है, उस पर ज्यादा चिंतन नहीं किया जा रहा है. भारत में जो हो रहा है वह सामान्य है, लेकिन भारत के साथ जो हो रहा है वह कहीं अधिक गंभीर और कहीं अधिक चिंताजनक है.
पी चिदंबरम ने कहा, "जो ताकतें भारत के विचारों को कमजोर कर रही हैं, वे पिछले 2-ढाई सालों से काम कर रही हैं. भारत के विचार संविधान से बनते हैं. भारत एक ऐसा देश है जहां न्याय-सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक- राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों को दिखाया जाता है. भारत के विचारों को प्रसिद्ध त्रयी-समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व द्वारा भी चित्रित किया गया है. इन शब्दों में वह सब कुछ शामिल हैं जिन पर आप नागरिक समाज के बारे में बात करना चाहते हैं. फिर भी हमने "सेक्युलरिज्म" जोड़ा क्योंकि हम सेक्युलरिज्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं."
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में सेक्युलरिज्म वाली सोच को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में कई विचारों (संविधान के मुताबिक) को कमजोर कर दिया गया है. जिन्हें शायद ठीक भी नहीं किया जा सकेगा. उदाहरण के लिए, सेक्युलरिज्म को बुरी तरह बर्बाद किया गया है. हमने आज सेक्युलरिज्म को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. इसका मतलब है कि अगर आप इस देश में अपने सभी अधिकारों का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको एक विशेष धर्म को अपनाना होगा.