पूछता है तिलक से वज़ू चीख़कर, आमने सामने रू-ब-रू चीख़कर, लड़ के दंगों में जिसको बहाया गया, पूछता है हमारा लहू चीख़कर, जब तेरा और मेरा, जब मेरा और तेरा एक ही रंग है, फिर बताओ भला किसलिए जंग है, कौन कहता है आबाद हो जाएंगे, एक गुजरी हुई याद हो जाएंगे, एकदूजे के खूं की रही प्यास तो, लड़ के दोनों ही बरबाद हो जाएंगे, मेरे बिन तू अधूरा रहेगा सदा, इस तरह से तेरा और मेरा संग है....सुनिए साहित्य आजतक के मंच पर इमरान प्रतापगढ़ी की शायरी