बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से घायल अवस्था में वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और भोपाल चिड़ियाघर लाए गए नर बाघ 'छोटा भीम' की मृत्यु हो गई. छोटा भीम को घायल अवस्था में बीते साल 30 नवंबर को रेस्क्यू कर इलाज के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया से भोपाल लाया गया था. पोस्टमार्टम में बाघ छोटा भीम की मृत्यु का कारण कन्जेस्टिव हार्ट फेलियर बताया गया.
दरअसल, खतौली एरिया से रेस्क्यू किए गए 'छोटा भीम' के गले में घाव था. बाघ को इलाज के लिए भोपाल लाया गया था. उसका इलाज राज्य पशु चिकित्सालय के डॉक्टर एसके तुमड़िया, वरिष्ठ वन्य प्राणी डॉ. अतुल गुप्ता, स्वास्थ्य अधिकारी वन विहार डॉ. रजत कुलकर्णी, वन्य प्राणी चिकित्सक वाइल्ड लाइफ एसओएस वन विहार, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. वैभव शुक्ला और भोपाल के चिकित्सक दल की निगरानी में किया गया. दो महीने के उपचार के बावजूद बाघ छोटा भीम को नहीं बचाया जा सका.
एनटीसीए नई दिल्ली और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कार्यालय मध्यप्रदेश, भोपाल से जारी दिशा-निर्देश अनुरूप पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई. पोस्टमार्टम वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. प्रशांत देशमुख, डॉ. हमजा नदीम फारुकी और डॉ. रजत कुलकर्णी ने किया. बाघ छोटा भीम के सभी अंग सुरक्षित पाए गए.
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शवदाह भस्मीकरण की कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे, आईएफएस गीतांजलि अय्यर, सहायक संचालक वन विहार संदेश माहेश्वरी लिखित वन्यजीव विशेषज्ञ पीपी सिंह, अजय शर्मा, डिप्टी कलेक्टर और अन्य की मौजूदगी में की गई. पोस्टमार्टम और शवदाह भस्मीकरण कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई.