मध्यप्रदेश के चर्चित आय से अधिक संपत्ति मामले में परिवहन विभाग के पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा को लोकायुक्त कोर्ट से जमानत मिल गई है. हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में जमानत न मिलने के कारण वह अभी भोपाल सेंट्रल जेल में ही रहेगा. सौरभ को जमानत मिलने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने सरकार का पुतला दहन कर प्रदर्शन किया.
सौरभ शर्मा के वकील राकेश पराशर ने बताया कि लोकायुक्त ने केस दर्ज होने के 60 दिनों के भीतर चालान पेश नहीं किया, जिसके आधार पर कोर्ट ने जमानत मंजूर की.
वकील ने कहा, "लोकायुक्त की ओर से समय पर चार्जशीट दाखिल न करना जमानत का मुख्य कारण बना." लेकिन ईडी कोर्ट से जमानत खारिज होने के चलते सौरभ की रिहाई अभी संभव नहीं है. उनकी रिहाई तभी होगी, जब ईडी मामले में भी जमानत मिलेगी, जिसकी संभावना फिलहाल कम दिख रही है.
दिसंबर 2024 में छापेमारी
सौरभ शर्मा का मामला तब सुर्खियों में आया, जब पिछले साल दिसंबर में लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल में उनके ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान 234 किलो चांदी, 2.95 करोड़ रुपए नकद, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए. इसके बाद आयकर विभाग ने सौरभ के सहयोगी चेतन सिंह गौड़ की एक परित्यक्त कार से 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए नकद जब्त किए. लोकायुक्त के बाद ईडी ने भी सौरभ, उसके सहयोगियों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई.
कांग्रेस का प्रदर्शन और आरोप
सौरभ को जमानत मिलने से नाराज कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा. पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने मुख्यमंत्री मोहन यादव का पुतला फूंका और इसे 'भ्रष्टाचारियों को संरक्षण' का सबूत बताया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकायुक्त की निष्क्रियता और चार्जशीट में देरी से सौरभ को फायदा हुआ, जो सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है.
अधर में सौरभ की जेल से रिहाई
हालांकि लोकायुक्त मामले में राहत मिली, लेकिन ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सौरभ की मुश्किलें बरकरार हैं. ईडी ने जनवरी 2025 में सौरभ के परिवार और सहयोगियों से पूछताछ की थी और उनकी संपत्तियों को सील किया था. सौरभ की गिरफ्तारी बीते 28 जनवरी माह को हुई थी, जब वह लोकायुक्त कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था. तब से वह जेल में हैं और अब उसकी नजर ईडी कोर्ट से जमानत पर टिकी है.