मध्य प्रदेश के भोपाल गैस त्रासदी और पुनर्वास राज्य मंत्री विजय शाह का कहना है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. भोपाल गैस त्रासदी के कचरे के निपटान के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
दरअसल, बीती 2 जनवरी को कचरे को निपटान के लिए इंदौर के पास पीथमपुर की एक प्राइवेट यूनिट में ले जाया गया, जिसके बाद से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. 6 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कचरे के निपटान के लिए छह सप्ताह का समय दिया था.
भोपाल गैस त्रासदी और पुनर्वास राज्य मंत्री विजय शाह ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "भोपाल में त्रासदी को 40 साल से अधिक हो गए हैं और वैज्ञानिक रूप से औद्योगिक अपशिष्ट 25 साल बाद अपने हानिकारक प्रभावों को खो देता है. निपटान सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में किया जाएगा. घबराने की कोई जरूरत नहीं है."
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए 'जन संवाद' सत्र आयोजित करने का आदेश दिया था. जन संवाद सत्र के दौरान वितरित किए गए पर्चे में कहा गया है कि कचरे में मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, कीटनाशक, नेफ्थॉल अवशेष शामिल हैं.
एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्चे में यह भी कहा गया है कि वैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि कचरे में सेविन और नेफ्थॉल के रासायनिक प्रभाव अब शून्य हो गए हैं. पर्चे में कहा गया है कि कचरे में अब मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस नहीं है और इसमें कोई रेडियोधर्मी कण नहीं हैं.
बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस लीक हुई थी, जिससे राज्य की राजधानी में 5 हजार 479 लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग अपंग हो गए थे. इसे दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक आपदा माना जाता है.