मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए इसे 'काला कानून' करार दिया है. बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मसूद ने कहा कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों का संरक्षण नहीं करेगा, बल्कि एक समाज को परेशान करने का तरीका है. लोकसभा में बुधवार को पेश हुए इस विधेयक पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया गया है, जबकि राज्यसभा में गुरुवार को इस पर बहस की उम्मीद है.
MLA मसूद ने कहा, "वक्फ बिल लोकसभा में पेश हो गया है, लेकिन हम इसे काला कानून मानते हैं. यह वक्फ की संपत्तियों को बचाने वाला नहीं है. हमें इन संपत्तियों को संरक्षित करना चाहिए, लेकिन यह बिल ऐसा नहीं करता."
उन्होंने आगे कहा, "जो लोग इसे लेकर जश्न मना रहे हैं, उन्हें मोदी के कानून पर भरोसा है, उन्हें मुबारक. लेकिन हम इस बिल को स्वीकार नहीं करेंगे." मसूद ने महिला पदाधिकारियों की नियुक्ति को अलग मुद्दा बताते हुए इसकी आड़ में विधेयक को सही ठहराने की कोशिशों को खारिज किया.
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
वक्फ (संशोधन) विधेयक 1995 के वक्फ अधिनियम में बड़े बदलावों का प्रस्ताव करता है. इसमें केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान है. विधेयक धारा 40 को हटाने की बात करता है, जो वक्फ बोर्ड को यह तय करने की शक्ति देती थी कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं.
इसके अलावा, बोहरा और आगाखानियों के लिए अलग बोर्ड बनाने, शिया, सुन्नी और अन्य पिछड़े मुस्लिम वर्गों को प्रतिनिधित्व देने और अधिनियम का नाम बदलकर 'एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995' करने का प्रस्ताव भी शामिल है.
सरकार बनाम विपक्ष
सरकार इस विधेयक को वक्फ बोर्डों के प्रबंधन में सुधार और पारदर्शिता लाने वाला कदम बता रही है. वहीं, विपक्ष इसे असंवैधानिक करार दे रहा है. कांग्रेस, सपा और AIMIM जैसे दल इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं, जबकि टीडीपी, जेडीयू, एलजेपी और HAM ने समर्थन जताया है. विपक्ष का आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला है.