मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि पीथमपुर के लोगों को यूनियन कार्बाइड के कचरा निपटान के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए. राजधानी भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते समय सीएम ने यह बयान दिया.
दरअसल, MP हाईकोर्ट ने सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के निपटान पर कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया है. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि फैसला उनकी उम्मीदों के अनुरूप आया है और उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है.
बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि को भोपाल में यूनियन कार्बाइड कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस लीक हुई थी, जिसमें कम से कम 5 हजार 479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रहीं.
12 सीलबंद कंटेनरों में भरा यह कचरा 2 जनवरी को राजधानी भोपाल स्थित बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने से यहां से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर में निपटान स्थल पर ले जाया गया.
CM यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है और यूनियन कार्बाइड कारखाने से कचरे को पीथमपुर ले जाया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती थी कि लोगों को भी अदालत में अपनी भावनाएं रखने का अवसर मिले और हाईकोर्ट ने इस पर विचार किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार की मंशा को समझा है. हम सभी को अदालत पर भरोसा है. फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप आया है. सीएम बोले, ''मैं क्षेत्र (पीथमपुर) के लोगों से कहना चाहता हूं कि अभी भी समय है और उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखना चाहिए. सरकार हमेशा अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करती है.''
धार जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित पीथमपुर में 3 जनवरी को उस समय विरोध प्रदर्शन हुए, जब भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकला कचरा रामकी एनवायरो कंपनी में पहुंच गया, जहां इसे जलाया जाना है.
तीन दिन पहले, पीथमपुर में कचरे के नियोजित निपटान के विरोध में दो लोगों ने आत्मदाह करने की कोशिश की थी. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह निपटान मनुष्यों और पर्यावरण के लिए हानिकारक होगा.
3 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट से कचरे को हटाने और परिवहन करने के लिए कहा और निर्देश का पालन न करने पर अवमानना कार्यवाही की चेतावनी दी थी.