MP News: छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह महोत्सव संपन्न हुआ. इस मौके पर प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने नवविवाहित जोड़ों को 51-51 हजार रुपए के उपहार देने का ऐलान किया.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ये नवदंपति जोड़े आज महाशिवरात्री के पर्व पर विवाह बंधन में बंधकर आप मां पार्वती और भगवान शंकर स्वरूप हो गए हैं. उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को इस महाआयोजन के लिए बधाई और धन्यवाद देते हुए कहा कि आपने समाज के सामने शासन सत्ता और संत की मौजूदगी में जात-पात की दीवार तोड़ने और छुआछूत को मिटाने का संदेश दिया.
CM यादव ने कहा कि पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने इस आयोजन ने जातिगत भावनाओं को कुचलते हुए सर्वधर्म समभाव और सामाजिक समरसता को बढ़ाया है. आज इसी बात की आवश्यकता है कि सामाजिक सौहार्द का ये सबसे अच्छा उदाहरण है. आपने 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना और 'सर्वे भवन्तु सुखिन' को चरितार्थ कर दिखाया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत विवाहित जोड़ों को दिए जाने वाले 51 हजार रुपए की राशि इन दंपतियों को भी दी जाएगी.
राष्ट्रपति ने बेटियों को दिया सबल बनने का संदेश
राष्ट्रपति ने नवदंपतियों को आशीर्वाद और बधाई देते हुए कहा, भारत की परंपरा ने संतों ने सदियों से अपने कर्म और धर्म से जनमानस को राह दिखाई है. समकालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरूतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ लोगों को जागरूक किया. संतों ने छुआछूत और जात-पात के भेदभाव को दूर करने की सीख दी. संतों ने महिलाओं को समाज में उचित स्थान दिलाने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया चाहे गुरु नानकदेव, संत रविदास, कबीरदास, मीराबाई हों या संत तुकाराम उन्होंने अपने उपदेशों से समाज को सही राह दिखाई. ये समाज का भी दायित्व है कि बेटियों और बहनों को सबल और सक्षम बनाने में अपना योगदान दें. उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान दें. महिलाएं भी स्वयं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें इसी से हमारा देश भी सबल बनेगा.
राज्यपाल ने सामूहिक विवाह आयोजन को सराहा
इस अवसर पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि बागेश्वर जनसेवा समिति ने धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से ये सामाजिक सेवा का सराहनीय कार्य है. समाज के वंचित वर्ग, गरीब परिवार की बेटियों के सम्मानजनक जीवन की शुरुआत का ये आयोजन अनुकरणीय है. सामाजिक विवाह समारोह से भावी पीढ़ी को अच्छे संस्कारों की सीख मिलती है और बाल विवाह जैसी कुरुतियां समाप्त होती है.
बता दें कि इस विवाह समारोह में 9 राज्यों से चयनित 108 आदिवासी, 70 दलित, 57 ओबीसी और 16 सामान्य वर्ग की बेटियों का विवाह कराया गया. इन सभी को आयोजकों की ओर से ढाई- ढाई लाख रुपये का गृहस्थी का सामान भेंट किया. इससे पहले यहां शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के साथ 11 जोड़ों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाकर विवाह की रस्म निभाई. इसके बाद अतिथियों ने अपना संबोधन दिया.