मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के जीवन और उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है. इंदौर के प्रगति नगर में सावरकर की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सावरकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को लोगों तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी. इसके तहत सावरकर की जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े आयोजन किए जाएंगे और उनके साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा.
CM ने कहा, "सावरकर के जीवन के इतिहास को सही मायनों में समझने की जरूरत है. राज्य सरकार उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को लोगों तक पहुंचाने के लिए हर तरह के आयोजन करने को तैयार है. हम सावरकर द्वारा लिखे गए साहित्य को भी आम लोगों तक पहुंचाएंगे."
उन्होंने सावरकर के संघर्षों को याद करते हुए कहा, "अंडमान की सेलुलर जेल में बंद रहने के दौरान सावरकर ने देश की आजादी के लिए भयंकर यातनाएं झेलीं. लेकिन उन्होंने कभी भी 'भारत माता की जय' का नारा लगाना बंद नहीं किया. अंग्रेजों के बारे में एक मिथक बनाया गया कि वे बहुत न्यायप्रिय हैं, लेकिन सावरकर देश के एकमात्र ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने अंग्रेजों की पोल खोली. सावरकर ने आजादी के बाद भी सबको आईना दिखाया."
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर सावरकर द्वारा कहे गए हर शब्द का पालन किया जाता, तो देश की स्थिति आज कुछ और होती. उन्होंने सावरकर को एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताते हुए उनके विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया.
बांग्लादेशी घुसपैठियों का आर्थिक बहिष्कार करें: रंजीत सावरकर
इस अवसर पर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर भी मौजूद थे. उन्होंने अपने संबोधन में भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर चिंता जताई और नागरिकों से उनका 'आर्थिक बहिष्कार'करने की अपील की.
रंजीत सावरकर ने कहा, "अगर भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों की आजीविका बंद कर दी जाए, तो वे अपने देश लौटने को मजबूर हो जाएंगे और हमारा संकट टल जाएगा." उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से यह भी अनुरोध किया कि सावरकर के जीवन पर बनी फिल्म को मध्य प्रदेश के हर स्कूल और कॉलेज में दिखाया जाए, ताकि युवा पीढ़ी उनके विचारों और बलिदान से प्रेरणा ले सके.
सावरकर के योगदान को याद करने की पहल
CM मोहन यादव ने सावरकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार सावरकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. सावरकर की जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े आयोजन करने की घोषणा के साथ ही उनके साहित्य को स्कूलों और कॉलेजों में शामिल करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे. यह कदम सावरकर के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके बलिदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.