मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बुज़ुर्ग महिला से ठगी का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. साइबर ठगों ने 48 घंटों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके रखा और उसके बाद 10 लाख रूपये से ज्यादा का चूना लगा दिया.
यह रकम और बढ़ सकती थी लेकिन पीड़िता के बुज़ुर्ग पति ने समझदारी दिखाते हुए पुलिस कमिश्नर को फोन कर दिया जिससे पुलिस की मदद मिल गयी और बुज़ुर्ग महिला को रेस्क्यू कर लिया गया.
महिला से जालसाजों ने ठगे 10 लाख
इस घटना को लेकर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने 'आजतक' से बात करते हुए बताया कि अवधपुरी में बुज़ुर्ग डॉक्टर दंपति रागिनी मिश्रा और पति महेशचंद्र मिश्रा रहते हैं. बुधवार को रागिनी मिश्रा के पास एक कॉल आया जिसने उन्हें बताया कि उनके बैंक अकाउंट का मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों को इधर से उधर करने के लिए इस्तेमाल हुआ है और विदेश की एक एयरलाइन्स कंपनी ने करोड़ों की रकम आपके बैंक खाते में डिपॉज़िट करवाई है.
फोन करने वाले शख्स ने रागिनी मिश्रा को बताया कि उनके आधार कार्ड से कई बैंक खाते खोले गए हैं जिनका गैरकानूनी इस्तेमाल हुआ है. जब रागिनी ने किसी भी अकाउंट की जानकारी होने से इंकार किया तो उसने अपने सीनियर अफसरों से वीडियो कॉल पर बात करने को बोला. इसके बाद महिला को कमरे में अकेले बैठा कर वीडियो कॉल किया और कई सारी जानकारी लेने लगे.
ठगों ने महिला को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा
इस दौरान महिला पर पूरी नज़र रखी जाने लगी और उसे स्क्रीन से हटने भी नहीं दिया गया. जालसाज़ों ने महिला को जांच एजेंसियों की कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे देने के लिए मजबूर किया और उसे बैंक जाकर करीब 10 लाख 50 हज़ार रूपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिये थोड़ी छूट दी. महिला ने रकम ट्रांसफर की और फिर कमरे में आकर खुद को बंद कर लिया. इतनी देर तक पत्नी को कमरे में बंद देख पति को शक हुआ और उसने पुलिस कमिश्नर को कॉल कर दिया.
पुलिस ने मौके पर पहुंच कर महिला को बचाया
पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने तुरंत पुलिस की एक टीम महेशचंद्र मिश्रा के घर भेजी. पुलिस ने घर पहुंचकर देखा कि जालसाज़ों ने नकली जांच एजेंसी का अफसर बनकर वीडियो कॉल पर रागिनी मिश्रा को बैठा रखा है.
पुलिस टीम ने वीडियो कनेक्शन और इंटरनेट कनेक्शन डिसकनेक्ट करवा दिया और पीड़िता को बाहर निकाला. फिलहाल पुलिस ने उस बैंक खाते को होल्ड करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसमें महिला ने पैसे ट्रांसफर किए थे. वहीं, आईपी अड्रेस को ट्रेस कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.