मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक व्यक्ति को मारने के बाद बाघ को पकड़ने की कोशिश तेज कर दी गई है. वन विभाग जंगली जानवर की गतिविधि पर नजर रखने के लिए 50 और ट्रैप कैमरा लगाएगा. वन अधिकारी पहले ही भोपाल जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर रायसेन वन प्रभाग में 100 ऐसे कैमरे लगा चुके हैं, जहां पांच दिन पहले बाघ ने 62 वर्षीय एक बुजुर्ग को मार डाला था.
रायसेन संभागीय वन अधिकारी (DFO) विजय कुमार ने बताया, 36 गांवों के करीब वन क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हम सोमवार को 50 और कैमरे लगाएंगे.
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघ रायसेन के ओबैदुल्लागंज वन प्रभाग में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से बाहर आया होगा. रातापानी 60 से अधिक बाघों का घर है. उन्होंने कहा, नए कैमरों के को मिलाकर क्षेत्र में ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़कर 150 हो जाएगी. कैमरे वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की तरफ प्रदान किए जाएंगे.
डीएफओ ने कहा, इसके अलावा हमने बाघ को पकड़ने के लिए चारे के साथ तीन पिंजरे लगाए हैं. बाघ को लुभाने के लिए पेड़ से बंधी भैंस के साथ एक खुला जाल भी लगाया गया है. उन्होंने कहा कि अभी बाघ को पकड़ना मुश्किल है क्योंकि फिलहाल वह घूम रहा है.
सप्ताह में एक बार शिकार करता है बाघ
वन अधिकारी ने कहा, अगले 2 से 3 दिनों में बाघ शिकार कर सकता है. आमतौर पर बाघ सप्ताह में एक बार शिकार करता है. अपने शिकार को मारने के बाद वह बीच-बीच में खाने के लिए कुछ देर तक उसके आसपास भटकता रहता है. हम उस दौरान इसे पकड़ने की कोशिश करेंगे.
दोनों पैर और शरीर का पिछला हिस्सा खा गया जानवर
नीमखेड़ा गांव निवासी 62 वर्षीय मनीराम जाटव का अधखाया शव बुधवार को रायसेन वन मंडल की पूर्वी रेंज में मिला था. जाटव बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्ते तोड़ने के लिए जंगल में गए थे. डीएफओ ने कहा कि पोस्टमार्टम से पुष्टि हुई है कि जाटव को बाघ ने ही मारा है.
DFO के मुताबिक, इंसानों पर हमला करने वाले बाघ की गतिविधियों पर नज़र रख रहे हैं. शुक्रवार को 150 वर्ग किमी में फैले 36 गांवों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया. लोगों से जानवर के पकड़े जाने तक जंगलों में न जाने को कहा गया है.
रेड अलर्ट मतलब मानव जीवन को खतरा
उन्होंने बताया कि रेड अलर्ट तब जारी किया जाता है जब किसी जंगली जानवर से मानव जीवन को खतरा होता है. उन्होंने कहा, वन अधिकारियों और स्वयंसेवकों सहित कम से कम 100 लोग बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं.
डीएफओ ने कहा कि पैदल और वाहनों में टीमें और कंट्रोल रूम में लोग बाघ की अगली चाल का पता लगाने के लिए ट्रैप कैमराके फुटेज का एनालिसिस कर रहे हैं. 36 गांवों के पास के जंगलों में बाघ दिखना कोई नई बात नहीं है. उन्होंने कहा, 2017 से वहां बाघों की ऐसी गतिविधियां देखी गई हैं.
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघ रायसेन के ओबैदुल्लागंज वन प्रभाग में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से बाहर आया होगा. रातापानी 60 से अधिक बाघ हैं. पिछले साल जारी नए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में भारत में सबसे अधिक 785 बाघ हैं.