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बीते साल विस्फोट में बची जान, अब पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में खो दिया पूरा परिवार... राकेश की भावुक कहानी

राकेश पिछले साल हरदा की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से बच गया था, क्योंकि उस दिन वह फैक्ट्री नहीं गया था. हरदा में फैक्ट्रियां बंद होने के बाद उसने हाटपिपल्या की पटाखा फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था.

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मृतक लखन और सुनीता
मृतक लखन और सुनीता

गुजरात के बनासकांठा जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में मध्य प्रदेश के देवास जिले के संदलपुर गांव के दो परिवारों के 9 सदस्यों और खातेगांव के एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया. मृतकों में से अधिकांश लोग कर्ज चुकाने के लिए वहां काम करने गए थे.

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राकेश के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतकों में शामिल राकेश का परिवार पहले से ही गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. उसके पिता लकवे से पीड़ित हैं, बड़े भाई संतोष को गंभीर मुंह की बीमारी है, और मां का हाल ही में बड़ा ऑपरेशन हुआ था, जिसमें उनके पेट से 5 किलो की गांठ निकाली गई थी. परिवार ने इन सभी के इलाज के लिए बाजार से कर्ज लिया था.

मृतक राकेश और डाली बाई
मृतक राकेश और डाली बाई

इस हादसे में राकेश, उसकी पत्नी डाली बाई और बेटी किरण की मौत हो गई, जबकि उसकी तीन साल की बेटी नैना गंभीर रूप से घायल हो गई. राकेश की मां शांताबाई ने उसे बाहर काम पर जाने से मना किया था, लेकिन उसने परिवार पर चढ़े कर्ज को चुकाने के लिए ज्यादा कमाई करने की मजबूरी जताई.

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3-4 दिन पहले ही गुजरात पहुंचे थे सभी मजदूर
सभी मृतक 3-4 दिन पहले ही गुजरात पहुंचे थे. इससे पहले, शायर बाई करीब डेढ़ महीने पहले अपनी बेटी राधा के साथ हरदा जिले की गुड्डी बाई के साथ गुजरात गई थी. होली पर वे संदलपुर लौट आए थे और शीतला सप्तमी के बाद हाटपिपल्या की पटाखा फैक्ट्री में काम करने गए. 28 मार्च को वे फिर गुजरात चले गए थे.

हरदा की घटना से बच गया था राकेश, लेकिन गुजरात में गंवाई जान
विडंबना यह है कि राकेश पिछले साल हरदा की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से बच गया था, क्योंकि उस दिन वह फैक्ट्री नहीं गया था. हरदा में फैक्ट्रियां बंद होने के बाद उसने हाटपिपल्या की पटाखा फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था.

लखन के परिवार के 6 सदस्यों की मौत
मंगलवार को गुजरात में हुए इस हादसे ने लखन के पूरे परिवार को खत्म कर दिया. लखन के साथ उसके भाई अभिषेक, दो बहनें - राधा और रुकमा, मां शायर बाई (केसर) और पत्नी सुनीता की भी मौत हो गई. घर पर सिर्फ 2 साल की बहन निशा बची है, जो इन दिनों संदलपुर में थी.

विधायक आशीष शर्मा ने जताया शोक, सरकार से की मदद की अपील
हादसे की जानकारी लगते ही मंगलवार रात खातेगांव से भाजपा विधायक आशीष शर्मा मृतकों के परिजनों से मिलने संदलपुर पहुंचे. उन्होंने दुःख जताते हुए परिजनों को सांत्वना दी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मोबाइल पर बातचीत कर पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की.

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इस हृदयविदारक घटना ने संदलपुर गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है. अब पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता देने के लिए प्रशासनिक कदमों की प्रतीक्षा की जा रही है.

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