मध्य प्रदेश के ग्वालियर की सेंट्रल जेल में बंद एक कैदी की पत्नी ने संतान सुख की प्राप्ति के लिए पैरोल की मांग की है. कैदी के पिता ने भी दादा बनने की इच्छा जताई है. दोनों ने इस संबंध में जेल अधीक्षक को आवेदन सौंपा है. ग्वालियर सेंट्रल जेल से आवेदन शिवपुरी के एसपी के यहां अनुशंसा के लिए भेज दिया गया है.
शिवपुरी शहर के मनियर क्षेत्र के निवासी एक बुजुर्ग के बेटे को पैरोल नहीं मिल पा रही है. बुजुर्ग ने अपनी बहू के साथ जाकर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक को आवेदन दिया है. इस बार बुजुर्ग ने आवेदन में अपने दिल की बात लिखी है. इस आवेदन में बुजुर्ग ने सेंट्रल जेल अधीक्षक व पुलिस अधिकारियों से कहा है कि मेरा बेटा शादी होने के बाद एक साल के अंदर हत्या के केस में फंस गया था और जेल चला गया था.
घर में शादी की खुशियां भी नहीं मन पाई थीं. अब बुढ़ापे में दादा बनने का सुख मिल जाए और बहू का अकेलापन दूर करने के लिए संतान सुख मिल जाए तो बहुत कृपा होगी. यह सब तभी संभव है, जब जेल में बंद बेटे को पैरोल मिल सके. पैरोल के लिए पुलिस की अनुशंसा जरूरी होती है. आवेदन में शिवपुरी निवासी महिला ने कहा है उसका पति शादी के बाद मर्डर केस में सात साल से बंद है. वह इतना भी साथ नहीं रह पाई कि उसे संतान सुख मिल पाता.
पैरोल की मांग करने वाले कैदी के पिता ने कही ये बात
जेल में बंद दारा सिंह जाटव के पिता करीम सिंह जाटव का कहना है कि मेरी बहू सीमा और मैंने सेंट्रल जेल के अधीक्षक को आवेदन दिया है. आवेदन में कहा है कि मैं और मेरी पत्नी बुजुर्ग है. दोनों की तबीयत भी खराब रहती है. वो भी बेटे से मिलना चाहती है. इस उम्र में उसकी दादी बनने की इच्छा है. इसी सोच में वह दिन पर दिन बीमार होती चली जा रही है.
पैरोल को लेकर क्या कहते हैं सेंट्रल जेल के अधीक्षक?
इस मामले में ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक विदित सिरवैया ने कहा कि हमारे यहां जो भी आजीवन कारावास का कैदी रहता है, उसके दो जब साल पूरे हो जाते हैं और उसका आचरण जेल में ठीक रहता है तो वह पैरोल का पात्र हो जाता है. हम उसकी अनुशंसा कर देते हैं. रही बात पैरोल देने और न देने की तो इसका विशेषाधिकार कलेक्टर का होता है. जिले के कलेक्टर को ही पैरोल देने का अधिकार होता है.