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सुबह 8 बजे से पहले नहीं खाऊंगा... रात में दवाई तक नहीं खाई, दवा कारोबारी की साइलेंट अटैक से मौत

Indore Drug dealer dies while playing badminton: जैन समाज का एक नियम है कि शाम 6 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक कुछ भी खाना मना है. इसी कारण जब मौके पर मौजूद दोस्तों ने दवाई देने की कोशिश की, तो अमित ने उसे सुबह 8 बजे से पहले लेने से मना कर दिया. फिर भी उनके दोस्तों ने दो बार दवाई खिलाने की कोशिश की, लेकिन अमित ने उसे अपने मुंह से बाहर निकाल दिया. 

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इंदौर में साइलेंट अटैक से दवा व्यापारी अमित चेलावत की मौत. (फाइल फोटो)
इंदौर में साइलेंट अटैक से दवा व्यापारी अमित चेलावत की मौत. (फाइल फोटो)

इंदौर के अभय प्रशाल स्पोर्ट्स क्लब में एक दर्दनाक हादसा घटित हुआ. यहां दवा कारोबारी अमित चेलावत की साइलेंट अटैक के कारण मौत हो गई. यह घटना स्पोर्ट्स क्लब में बैडमिंटन खेलते वक्त हुई, जहां अमित चेलावत अपने दोस्तों के साथ नियमित रूप से बैडमिंटन खेलते थे. 

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अमित चेलावत लंबे समय से मेडिकल कारोबार से जुड़े हुए थे और अपने भाई के साथ मेडिकल शॉप चलाते थे. उनके दोस्तों के मुताबिक, अमित ने पिछले 8 वर्षों से नियमित रूप से स्पोर्ट्स क्लब में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था. 

बीते बुधवार की शाम जब वह टेनिस खेल रहे थे, तो अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा. यह देख साथ मौजूद साथियों ने चेलावत को सीपीआर देने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं. घटना के बाद अमित को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.  

इस घटना के बाद यह जानकारी सामने आई कि अमित जैन समाज से ताल्लुक रखते थे, और समाज के नियमों का वह कड़ाई से पालन करते थे.

खासकर, जैन समाज का एक नियम है कि शाम 6 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक कुछ भी खाना मना है. इसी कारण जब मौके पर मौजूद दोस्तों ने दवाई देने की कोशिश की, तो अमित ने उसे सुबह 8 बजे से पहले लेने से मना कर दिया. फिर भी उनके दोस्तों ने दो बार दवाई खिलाने की कोशिश की, लेकिन अमित ने उसे अपने मुंह से बाहर निकाल दिया. 

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अमित के परिजनों ने इस दुखद घटना के बाद भी एक प्रेरणादायक कदम उठाया और उनके अंगदान का निर्णय लिया. उन्होंने अमित की आंखें और त्वचा दान करने का निर्णय लिया, जिससे किसी और की जिंदगी रोशन हो सके. 
 
इस मामले पर अस्पताल के कार्डियक डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर सिद्धांत जैन ने बताया, जब अमित चेलावत को अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी धड़कनें बंद हो चुकी थीं और उन्हें रिवाइव करना संभव नहीं था. 

डॉक्टर ने साइलेंट अटैक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोग ऐसी घटनाओं का इंतजार करते हैं, जबकि 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नियमित रूप से अपनी जांच करानी चाहिए और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए. डॉक्टर ने यह भी कहा कि उपचार से ज्यादा सावधानी जरूरी है, और यदि लोग समय रहते सावधानियों को अपनाएं, तो वे घातक बीमारियों से बच सकते हैं. 

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