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इंदौर जाम गेट कांड: सैन्य अफसर को बंधक बनाकर महिला मित्र से गैंगरेप करने वाले 5 दोषियों को उम्रकैद, 5 महीने में फैसला

Indore फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के बाद महज पांच महीने में आए इस फैसले ने पीड़ितों को न्याय दिलाया है और समाज में कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

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इसी जाम गेट के पास मारपीट, लूटपाट और गैंगरेप केस हुआ था.
इसी जाम गेट के पास मारपीट, लूटपाट और गैंगरेप केस हुआ था.

MP News: इंदौर जिले के महू क्षेत्र स्थित जाम गेट के पास सितंबर 2024 में हुए बहुचर्चित जाम गेट कांड में अदालत ने 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में सेना के ट्रेनी मेजर को बंधक बनाकर उनकी महिला मित्र के साथ लूटपाट, मारपीट और गैंगरेप की जघन्य घटना को अंजाम दिया गया था. फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के बाद महज पांच महीने में आए इस फैसले ने पीड़ितों को न्याय दिलाया है और समाज में कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

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क्या था जाम गेट कांड?
घटना 11 सितंबर 2024 की देर रात करीब 2 बजे की है. महू के बड़गोंदा थाना क्षेत्र के जाम गेट के नजदीक छोटा जाम फिल्ड फायरिंग रेंज के पास दो ट्रेनी मेजर अपनी दो महिला मित्रों के साथ किराए की कार में घूमने गए थे. इसी दौरान आठ से ज्यादा हथियारबंद बदमाशों ने उनकी कार को घेर लिया. बदमाशों ने सैन्य अधिकारियों और उनकी महिला मित्रों के साथ मारपीट की, उनके रुपये और पर्स लूट लिए. इसके बाद उन्होंने दो लोगों (एक ट्रेनी मेजर और एक युवती) को बंधक बना लिया, जबकि अन्य अफसर और युवती को 10 लाख रुपये की फिरौती लाने के लिए छोड़ दिया.

आरोपियों ने बंधक बनाई गई युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. पीड़ित ट्रेनी अफसर ने बताया कि वह युवती की रोने की आवाज सुन रहा था और बदमाशों से छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन उन्होंने उसकी एक न सुनी. फिरौती लाने गए अफसर ने नेटवर्क में आते ही अपनी यूनिट के कमांडिंग अफसर को सूचना दी, जिन्होंने डायल-100 को अलर्ट किया. पुलिस और सैन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बदमाश फरार हो चुके थे.

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल और एएसपी रूपेश द्विवेदी घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच अलग-अलग टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की. शुरुआत में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, और बाद में विशेष अभियान चलाकर बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया गया. पुलिस ने डकैती, मारपीट, फिरौती और 

सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया.
इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल ने उस समय कहा था, "हमें सूचना मिली कि आर्मी अफसर और उनके साथियों के साथ मारपीट और लूट की घटना हुई है. हमने तुरंत अपनी टीम भेजी और पांच नई टीमें बनाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया है."

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, 5 महीने में फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.एस. दोहरे की कोर्ट में करीब पांच महीने तक सुनवाई चली. अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने मजबूती से पैरवी की. पुलिस ने ठोस सबूत और दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों—पवन, रोहित, अनिल, रितेश और सचिन (सभी मानपुर थाना क्षेत्र के निवासी)—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने साफ कहा कि यह सजा मरते दम तक जेल में रहने की होगी.

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इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. गैंगरेप की शिकार युवती को 50 हजार रुपए और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. मामले में एक नाबालिग आरोपी भी शामिल था, जिसका फैसला अभी लंबित है.

विशेष लोक अभियोजन अधिकारी का बयान
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने कहा, "यह एक जघन्य अपराध था, जिसमें सैन्य अधिकारियों और उनकी महिला मित्रों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है. यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ ही समाज में एक कड़ा संदेश देता है."

राहुल गांधी ने उठाया था मुद्दा
इस घटना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी हंगामा हुआ था. कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे. उन्होंने लिखा था, "मध्य प्रदेश में सैन्य अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं." इस मामले को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था.

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