इंदौर में रामनवमी पर बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में बड़ा हादसा हो गया था. यहां बावड़ी की छत धंसकने 36 लोगों की मौत हो गई थी. बहरहाल अब बावड़ी को पूरी तरह बंद कर दिया गया था. अब वहां के लोगों ने इस बावड़ी के बारे में बताया है कि किसी जमाने में यह बावड़ी का सुसाइड पॉइंट बन गई थी.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर हादसे में लक्ष्मीकांड पटेल की पत्नी दक्षाबेन पटेल और बहू कनक समेत चार परिजनों की मौत हो गई है. उनका परिवार 1969 से इसके करीब रह रहा था. उन्होंने दावा किया, "1970 और 1980 के बीच हर साल पांच से सात लोग इस बावड़ी में कूदकर अपनी जान दे देते थे. इन घटनाओं के बाद पंचनामे का गवाह बनाने के लिए उनके परिवार के लोगों को पुलिस परेशान करती थी.
इलाके के सबसे पुराने निवासियों में से एक पटेल ने पीटीआई को बताया कि वह और उनके परिजन कई वर्षों से इस मंदिर की देखभाल कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि होलकर राजवंश ने यह बावड़ी बनवाई गई थी.
उन्होंने बताया, "बावड़ी के आत्महत्या स्थल के रूप में कुख्यात होने के बाद हमारे परिवार ने स्थानीय प्रशासन को शिकायत करके इस पर ढक्कन के साथ लोहे की जाली लगवा दी थी. हालांकि, कुछ लोगों ने इस ढक्कन को हटाना शुरू कर दिया था, इसमें चोरी का सामान जमा करना शुरू कर दिया था. इसके बाद 1980 में स्थानीय प्रशासन ने बावड़ी को स्लैब से ढक दिया था."
हादसे में दो के खिलाफ केस दर्ज
जूनी इंदौर थाना प्रभारी नीरज मेड़ा ने बताया कि 30 मार्च को हुई त्रासदी के बाद बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम गलानी और सचिव मुरली कुमार सबनानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस के अनुसार, दोनों पर मंदिर में बावड़ी को ढककर असुरक्षित काम करने, ढांचे में अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के लिए इंदौर नगर निगम के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है. पुलिस ने कहा कि दोनों को गिरफ्तार किया जाना है क्योंकि घटना में सबनानी घायल हो गया था और गलानी पहले की दुर्घटना से उबर रहा है.
पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान
राज्य सरकार ने मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों को 50 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है. घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठा रही है इसके अलावा पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की मदद की घोषणा की गई है.
मजिस्ट्रेटी जांच बैठी, 15 दिन में मांगी जांच
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. इलैयाराजा टी ने मंदिर हादसे में मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने इसकी जिम्मेदारी अपर कलेक्टर बेड़ेकर को सौंपी है. साथ ही उन्हें 15 दिन में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश के तहत यह जांच मृतकों की किन परिस्थितियों में मृत्यु हुई? घटना का घटनाक्रम क्या था? घटनाक्रम में क्या परिस्थितियां थीं? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुझाव व अन्य कोई बिन्दु जांच के दौरान सामने आता है तो उसके संबंध में भी जांच की जाएगी.