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Cheetah Project को फिर लगा बड़ा झटका, कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बुरी खबर सामने आई है. यहां अब एक और चीते ने दम तोड़ दिया है. इसके साथ ही कूनो में मरने वाले चीतों की संख्या 9 हो चुकी है, जिनमें छह चीते और कूनो में जन्मे तीन शावक शामिल हैं.

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कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत.
कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत.

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है. अब तक कुल 9 चीतों की मौत हो चुकी है. इनमें छह चीता और कूनो में जन्मे तीन शावक शामिल हैं. आज जिस चीते की मौत हुई, वह मार्च के बाद से मरने वाला छठा वयस्क चीता है. मध्य प्रदेश वन विभाग ने इस बारे में बुधवार के एक बयान जारी कर जानकारी दी.

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मध्य प्रदेश वन विभाग ने कहा है कि आज सुबह मादा चीतों में से एक धात्री (तिब्लिसी) मृत पाई गई. मौत का कारण जानने के पोस्टमार्टम किया जा रहा है. 14 चीते जिनमें सात नर, छह मादा और एक मादा शावक को कूनो के बाड़े में रखा गया है. एक मादा चीता खुले में है, जिसकी एक टीम निगरानी कर रही है. वन विभाग ने बयान में कहा है कि उसे स्वास्थ्य जांच के लिए वापस लाने के प्रयास जारी हैं.

बता दें कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में 26 जून को 'सूरज' चीता को देर शाम बड़े बाड़े से खुले जंगल में आजाद कर दिया गया था. सूरज 10वां चीता था, जो कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा गया था. वहीं, साउथ अफ्रीका से लाए गए और बाड़े नंबर 6 में रखे गए नर चीता 'तेजस' की मौत भी मौत 11 जुलाई को हो गई थी.

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यह भी पढ़ेंः कूनो नेशनल पार्क में 8वें चीते की मौत, दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था 'सूरज'

यह चीता कूनो पार्क प्रबंधन की मॉनिटरिंग के दौरान घायल अवस्था में मिला था. तेजस की गर्दन के ऊपरी हिस्से में चोट के निशान देखे गए थे. कूनो नेशनल पार्क में अब तक 6 चीतों और 3 शावकों की मौत हो चुकी है.

नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए गए थे चीते

कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनरोत्थान के लिए नामीबिया और साउथ अफ्रीका से 20 चीते लाए गए थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से अभी तक 6 वयस्क और 3 शावकों की मौत हो चुकी है.

कमल नाथ ने सरकार पर साधा था निशाना

बीते दिनों मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने चीते की मौत को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था, "कूनो नेशनल पार्क में लगातार चीतों की मौत होने के बावजूद अब तक ऐसी कोई योजना सामने नहीं आई है, जिसमें इन वन्य प्राणियों के जीवन को संरक्षित करने की कोई पहल की गई हो.

उन्होंने कहा था कि राजनैतिक प्रदर्शन-प्रियता के लिए वन्य प्राणियों को शोभा की वस्तु बनाना, लोकतंत्र के चुने हुए प्रतिनिधियों को शोभा नहीं देता. मैं जिम्मेदार लोगों से आग्रह करता हूं कि वह पर्यावरणविद् और वैज्ञानिकों से चर्चा कर शीघ्र ही ऐसा कोई प्लान बनाएं, जिनसे इन प्राणियों के जीवन की रक्षा हो सके."

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(एजेंसी के इनपुट के साथ)

 

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