मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में अन्य पिछ़ड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को लेकर फिर से उहापोह की स्थिति बन गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को ये आदेश दिया था कि परिसीमन या आरक्षण के नाम पर स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव में देरी नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए कहा था. अब सरकार ने इस मामले में रिवीजन पिटीशन दाखिल की है.
मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दाखिल कर फैसले में संधोन की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल रिवीजन पिटीशन को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. इस मामले में सुनवाई 17 मई को होगी. यानी अब 17 मई के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि स्थानीय निकाय चुनाव ओबीसी के लिए आरक्षण के बिना होंगे या इसे लागू करने तक चुनाव नहीं कराए जाएंगे.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि राज्य चुनाव आयोग दो हफ्ते के अंदर मतदान की अधिसूचना जारी करे. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद ये साफ हो गया था कि मध्य प्रदेश में ओबीसी के लिए आरक्षण के बगैर ही स्थानीय निकाय चुनाव होंगे. कोर्ट ने कहा था कि हर पांच साल में चुनाव कराना सरकार का संवैधानिक दायित्व है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा था कि आरक्षण देने के लिए जरूरी ट्रिपल टेस्ट पूरा करने को और वक्त नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने ये भी कहा था कि ओबीसी आरक्षण के लिए आंदोलन कर रही पार्टियां सामान्य सीट पर OBC उम्मीदवार उतारें. कोर्ट ने कहा था कि निकाय चुनाव को न टालने का आदेश अन्य राज्यों पर भी लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में निकाय चुनाव को लेकर भी इसी तरह का आदेश दिया था और साफ कर दिया था मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के इस तरह के मामलों पर भी ये आदेश लागू होगा.