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1300 किमी का सफर... 'प्राणनाथ' से मिलने की इच्छा, धीरेंद्र शास्त्री से शादी की बात पर मुकरीं शिवरंजनी

शिवरंजनी का नाम इन दिनों चर्चा में हैं. उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना 'प्राणनाथ' कहा था. खुद को MBBS की छात्रा बताने वाली शिवरंजनी 1300 किमी की पैदल यात्रा करके छतरपुर आ चुकी हैं. मगर, उनकी मुलाकात धीरेंद्र शास्त्री से नहीं हो सकी है.

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शिवरंजनी तिवारी और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री.
शिवरंजनी तिवारी और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री.

बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना 'प्राणनाथ' बताने वाली शिवरंजनी तिवारी शादी वाली बात से मुकर गई हैं. उनका कहना है कि मेरा शादी का संकल्प कभी नहीं रहा है. मेरा पर्चा खुला ही नहीं तो जो संकल्प है वह सामने आया नहीं है. मेरी यात्रा को लोगों ने शादी से जोड़ दिया. 

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दरअसल, 1 मई को गंगोत्री से पैदल कलश यात्रा शुरू करने वाली 20 साल की शिवरंजनी तिवारी ने 16 जून तक एमपी के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम तक पहुंचने की योजना बनाई थी, लेकिन शिवरंजनी दो दिन पहले ही 14 जून को ही यूपी के महोबा होते हुए एमपी छतरपुर में प्रवेश हुई थीं. इस यात्रा में उन्होंने 1300 किमी का सफर तया किया. कई सारे लोग उनके साथ इस यात्रा के दौरान भी रहे. 

भीषण पड़ रही गर्मी के कारण उनका स्वास्थ बिगड़ गया था और फिर उन्हें इलाज के लिए छतरपुर जिला अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टरों का कहना था कि शिवरंजनी को कमजोरी है, जिसके कारण से उनका स्वास्थ खराब है. उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी. आजतक से हुई खास बातचीत के दौरान उनसे कई सवाल पूछे गए थे. तब उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई से लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े सवालों का जवाब दिया था.

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देखें वीडियो...

ना मेरा पर्चा खुला और ना मेरे संकल्प के बारे में पता चला- शिवरंजनी

धीरेंद्र शास्त्री से शादी करने वाली बात से पलटते हुए शिवरंजनी ने अब कहा है कि ''मैंने कभी नहीं कहा कि मेरा शादी का संकल्प है, ना मेरा पर्चा खुला और ना मेरे संकल्प के बारे में पता चला, मेरा संकल्प था कि मैं पूज्य बालाजी के दर्शन करूं और मैं जब 11वीं में थी तब बायो (Biology) सब्जेक्ट लिया था. मैं कैंसर की डॉक्टर बनना चाहती हूं, हे बालाजी मुझे इस फील्ड में सक्सेस दे देना.''  शिवरंजनी ने आगे कहा कि मेरी बस यही कामना थी, शादी की तो मेरी कोई कामना थी ही नहीं, लोगों ने बेवजह शादी के विषय से मेरी यात्रा को जोड़ दिया.

भगवा वस्त्र पर यह है शिवरंजनी का कहना

इसी बीच शिवरंजनी के भगवा वस्त्र धारण किए जाने पर शंकराचार्य ज्योतिष पीठ के मीडिया प्रभारी डॉक्टर शैलेंद्र योगीराज सरकार ने सवाल खड़ा किया था. उन्होंने कहा था कि भगवा वस्त्र त्याग का प्रतीक है. भगवा वस्त्र पहनकर प्राणनाथ को प्राप्त करने यानि विवाह का संकल्प लेकर चलना सनातन धर्म की हानि है. वो (शिवरंजनी) सनातन धर्म को क्षति पहुंचा रही हैं और कहती हैं कि सनातन धर्म का झंडा लिए हुए हैं. इसी मुद्दे पर उनके द्वारा बात की गई. उन्हें भगवा पहनना पसंद है और यह तो भगवान श्रीराम ने भी पहने थे. भगवा पहनने से कोई साधु-संत नहीं हो जाता है. 

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धीरेंद्र शास्त्री 5 दिन के अज्ञातवास पर 

शिवरंजनी को छतरपुर 16 जून को आना था, लेकिन 14 जून को ही पहुंच गई थी. शिवरंजनी के पहुंचने के अगले दिन ही यानि 15 जून को धीरेंद्र शास्त्री 5 दिन के अज्ञातवास पर चले गए हैं. 15 जून से लेकर 20 जून तक धीरेंद्र शास्त्री अज्ञातवास में रहेंगे. बताया जा रहा है कि किसी को नहीं पता है कि इन पांच दिन बाबा का ठिकाना कहां है. अज्ञातवास खत्म होने के बाद भोपाल में कथा का कार्यक्रम है. कथा खत्म करके 24 जून को वापस बागेश्वर धाम पहुंचेंगे. 

हरिद्वार में परिवार, मां साइंटिस्ट- पिता इंजीनियर

बताया गया है कि शिवरंजनी का परिवार मूलरूप से एमपी के सिवनी का रहने वाला है, लेकिन 25 साल पहले परिवार हरिद्वार में शिफ्ट हो गया था. शिवरंजनी ने कहा है कि उनके पिता इंजीनियर हैं. वहीं उनकी मां साइंटिस्ट है. मेरे पिताजी बाइक कंपनी में जीएम थे. उन्होंने करीब 5 साल पहले जॉब छोड़ दी थी. मेरा एमबीबीएस अभी कंप्लीट नहीं हुआ है. बाकी फैमिली की डिटेल मैं सीक्रेट रखना चाहती हूं.

 

शिवरंजनी तिवारी.

आजतक के सवाल और शिवरंजनी के जवाब

सवाल- बागेश्वर धाम के महाराज को क्यों कहा प्राणनाथ?

जवाब- मैं प्राणनाथ इसलिए कहती हूं, क्योंकि वह हर किसी के प्राणों के नाथ हैं. सबके मन की बात जान लेते हैं. उनके सामने शब्दों की जरूरत नहीं है. किसी को कुछ बोलने की जरूरत भी नहीं है. किसी के मन की बात कोई भी छूटी न रह सके और सब कुछ जान ले, तो वह प्राणों का नाथ नहीं होगा तो और कौन होगा?

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सवाल- आपके प्राणनाथ कहने का अर्थ क्या है?

जवाब- आप जो चाहें, वह बता दें. लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा.

सवाल- एमबीबीएस की स्टूडेंट अचानक भगवा में नजर आ रही है, यह सब क्या है?

जवाब- देखिए, यह बिल्कुल नया नहीं है. मेरे बचपन से ही मेरे घर में परम पूज्य जगतगुरु श्री शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज की बहुत बड़ी कृपा रही है. हमारे परिवार पर उन्हीं के कारण सभी लोग धर्म से जुड़े हुए हैं. बचपन से ही भागवत कथा, राम कथा जैसे धार्मिक कार्यों में एक्टिव रही हूं. मेरे लिए यह भगवा रंग के कपड़े नए नहीं हैं.

सवाल- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात के लिए किसी से कोई बातचीत हुई क्या आपकी?

जवाब- मेरी किसी से कोई बात नहीं हुई है. मुझे विश्वास है कि बालाजी सरकार मुझे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जरूर मिलवा देंगे. हालांकि, बता रहे हैं कि उनका एकांतवास का समय है. देखते हैं मुलाकात होती है या नहीं. हमें अपने बालाजी पर विश्वास है.

सवाल- अगर अर्जी नहीं सुनी गई, तो क्या आप दरबार में अपनी बात रखेंगी?

जवाब- अर्जी न होने का तो सवाल ही नहीं होता. मैंने अपना पर्चा 1 तारीख को गंगा कलश उठाने के दौरान बनवा लिया था. बालाजी सरकार पर विश्वास है. मन्नत तो पूरी होगी ही.

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सवाल- 15 जून से अज्ञातवास पर जा रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के लिए क्या आप कोई संदेश देना चाहती हैं?

जवाब- 'आजतक' वाले आप ही मेरा यह संदेश पहुंचा दीजिए कि मैं बागेश्वर धाम आ रही हूं.

सवाल- धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से शादी को लेकर क्या कहेंगी आप? 

जवाब- पहले उनके दर्शन तो हो जाएं. उसके बाद देखते हैं क्या होता है. बाकी 110 परसेंट मुझे उम्मीद है कि उनके दर्शन भी होंगे और मुराद भी पूरी होगी.

 

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