मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी की मनरेगा के एक अधिकारी को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को आलोट कस्बे में की गई.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक अपराध शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) अमित बट्टी ने बताया कि गिरफ्तार अधिकारी की पहचान मनरेगा के सहायक लेखा अधिकारी मनीष ललावत के रूप में हुई है. उन्होंने बताया कि ललावत ने शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की भुगतान प्रक्रिया को मंजूरी देने के लिए 8 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी.
शिकायतकर्ता इस योजना का लाभार्थी है और उसे अपने स्वीकृत अनुदान की राशि प्राप्त करने में परेशानी हो रही थी. जब उसने भुगतान के लिए अधिकारियों से संपर्क किया, तो ललावत ने 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग की.
शिकायतकर्ता ने इस रिश्वतखोरी की जानकारी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को दी. इसके बाद EOW ने शिकायत की पुष्टि करने के लिए जाल बिछाया. तय योजना के तहत, शिकायतकर्ता जब शुक्रवार को आलोट कस्बे में मनीष ललावत को रिश्वत की रकम सौंपने गया, तभी मौके पर मौजूद EOW की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया.
अधिकारियों ने ललावत के पास से रिश्वत की पूरी रकम जब्त कर ली और उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया. DSP अमित बट्टी ने बताया कि मनीष ललावत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है.
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, आम जनता से अपील की गई कि वो किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी की शिकायत तुरंत संबंधित विभागों को करें.