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BJP विधायक ने किया नाबालिग रेप पीड़िता का नाम उजागर, कांग्रेस ने की FIR दर्ज करने की मांग

महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद बाबा ओंकारेश्वर की नगरी में 9 साल की आदिवासी बालिका को दो दिन बंधक बनाकर रेप किया गया. 40 साल के हैवान ने इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया. पिता के बहुत पहले निधन के बाद मां भीख मांगकर बच्ची की परवरिश कर रही थी. मां मानसिक रूप से कमजोर है. पड़ोसियों की सजगता से यह मामला थाने तक पहुंचा, तब इसका खुलासा हुआ. अब इस मामले को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. 

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पुलिस की गिरफ्त में ओंकारेश्वर रेप मामले का आरोपी.
पुलिस की गिरफ्त में ओंकारेश्वर रेप मामले का आरोपी.

MP News: खंडवा के ओंकारेश्वर में 9 साल की बच्ची रेप मामले में स्थानीय विधायक नारायण पटेल घिर गए हैं. बीजेपी MLA ने पीड़िता और उसके पिता का नाम लेकर पहचान उजागर करने का गंभीर अपराध किया है. यह न केवल सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का उल्लंघन है, बल्कि इसमें वह पॉक्सो एक्ट में भी आरोपी बन सकते हैं.  कांग्रेस ने विधायक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की है.  

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महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद बाबा ओंकारेश्वर की नगरी में 9 साल की आदिवासी बालिका को दो दिन बंधक बनाकर रेप किया गया. 40 साल के हैवान ने इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया. पिता के बहुत पहले निधन के बाद मां भीख मांगकर बच्ची की परवरिश कर रही थी. मां मानसिक रूप से कमजोर है. पड़ोसियों की सजगता से यह मामला थाने तक पहुंचा, तब इसका खुलासा हुआ. अब इस मामले को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. 

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर जहां बालिकाओं की सुरक्षा के सवाल को लेकर प्रदेश सरकार को घेरा, तो स्थानीय विधायक पहले दुष्कर्म पीड़िता से मिलने अस्पताल पहुंचे और फिर एसपी ऑफिस गए. MLA ने इसी मामले के संबंध में जानकारी देते हुए कैमरे के सामने दिए गए एक बयान में दुष्कर्म पीड़िता का नाम तो उजागर कर दिया. साथ ही पीड़िता के दिवंगत पिता का भी नाम ले लिया. जब यह वीडियो वायरल हुआ तो कांग्रेस इस मामले को लेकर आक्रामक हो गई. उसने विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की पुरजोर मांग की है. 

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कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक  राजनारायण सिंह ने कहा, ''दुष्कर्म की पीड़िता 9 वर्ष की आदिवासी बालिका है. भाजपा के नेताओं को भगवान सद्बुद्धि दे. उन्हें यह नहीं मालूम की सुप्रीम कोर्ट यह बोल रही है कि पीड़िता का नाम मत लो. भाजपा के नेताओं को उसका नाम बदलकर बोलना चाहिए था. पत्रकारों को भी उसका नाम नहीं बताना चाहिए. यह सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है. इसके लिए प्रशासन नहीं प्रदेश का मुखिया दोषी है. इसकी वजह है कि प्रशासन को काम ही नहीं करने दिया जा रहा. पुलिस को पुलिस का काम नहीं करने दिया जा रहा है. आए दिन तो मुख्यमंत्री ओंकारेश्वर आते रहते हैं. जिला कलेक्टर को बाबू बना दिया है. उसे आरटीओ का काम दे दिया है कि लोगों को गाड़ियों में इकठ्ठा करा मीटिंग में भेजो. मुख्यमंत्री ही इन तमाम घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं. उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए.'' 

विधायक नारायण पटेल के वायरल बयान के बाद कांग्रेसजन ओंकारेश्वर थाने में ज्ञापन देने पहुंचे. उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई की मांग की. खंडवा ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय ओझा, पूर्व विधायक राजनारायण सिंह सहित कई कांग्रेस नेता इस मौके पर उपस्थित थे. थाना प्रभारी बलदेव सिंह बिसेन के समक्ष बाकायदा इस ज्ञापन को सौंपने के पूर्व पढ़कर सुनाया गया. 

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उधर, इस बड़ी गलती का  एहसास होने पर भाजपा विधायक नारायण पटेल बैकफुट पर हैं. लेकिन कोई जवाब देने से बच रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि जब वे दुष्कर्म पीड़िता बालिका की पहचान उजागर कर रहे थे. तब उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष सेवादास पटेल और भाजपा प्रवक्ता मंगलेश तोमर भी साथ थे. लेकिन उन्होंने भी विधायक को रोका-टोका नहीं. यह जनप्रतिनिधियों की समझ पर भी सवाल खड़े करता है और संवेदनशीलता पर भी. 

बहरहाल, मामला अब पुलिस के पाले में है. चूंकि यह विषय सत्ता पक्ष के विधायक से जुड़ा है, इसलिए पुलिस भी कार्रवाई करने में ठिठकी हुई है. यही बात कहीं और से होती तो शायद अब तक एफआईआर दर्ज़ हो चुकी होती.  

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