मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1975 में आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की. साथ ही कहा कि इमरजेंसी एक 'काला दौर' था, जो पांच दशक बाद भी सिहरन पैदा करता है.
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था. विपक्षी नेताओं और असंतुष्टों को जेल में डाला और प्रेस सेंसरशिप लागू कर दी थी.
BJP ने आपातकाल की 49वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस की 'तानाशाही' और संविधान के प्रति उसकी अवहेलना को 'उजागर' करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की घोषणा की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपातकाल के काले दिन इस बात की याद दिलाते हैं कि कैसे कांग्रेस ने बुनियादी स्वतंत्रता को खत्म किया और संविधान को रौंद दिया, जिसका हर भारतीय बहुत सम्मान करता है.
CM यादव ने कहा, मैं प्रधानमंत्री से सहमत हूं. आपातकाल का दौर लोकतंत्र पर बहुत बड़ा कलंक है. यह इतना काला दौर था कि आज भी पूरा देश इसे याद करके सिहर उठता है. कांग्रेस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. उनकी ज्यादतियों के कारण कई परिवार बर्बाद हो गए.
यादव ने कहा कि आपातकाल के विरोध में और संविधान में आस्था जताने के लिए जनसंघ (अब भारतीय जनता पार्टी) के नेता संविधान की रक्षा और लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल गए थे. आपातकाल के दौरान सरकार की यातना और दमन को सहकर लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए भाजपा नेताओं के संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा.
साल 1975 में 25-26 जून की दरम्यानी रात से 21 मार्च 1977 तक (21 महीने) के लिए भारत में आपातकाल घोषित किया गया था.
तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी.
स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक समय था. आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे और सभी नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था.