मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगलों में छोड़े गए नामीबायाई 4 चीतों में से एक चीता ओबान पांच दिन बाद भी पार्क नहीं लौटा है. वन विभाग ने जब ओबान की लोकेशन शिवपुरी जिले के पिपरवास के जंगलों में मिली. इस दौरान यह भी पता चला कि ओबान ने बुधवार सुबह ब्लैक बक यानी काले हिरण का शिकार कर अपनी भूख मिटाई. कूनो प्रबंधन का दावा है कि ओबान पिपरवास के जंगलों में कहीं है.
जानकारी के मुताबिक ओबान ने बुधवार सुबह एक ब्लैक बक यानी काला हिरण का शिकार किया है. ओबान के हर मूवमेंट पर कूनो प्रबंधन की नजर बनी हुई है. DFO प्रकाश कुमार वर्मा का कहना है कि आशा, एल्टन और फ्रेडी पार्क के इलाकों में ही मौजूद हैं. चीतों को 11 मार्च को कूनो के ओपन एरिया में छोड़ा गया था. ओबान अपनी चुस्ती-फुर्ती से लगातार शिकार कर यहां सर्वाइव कर गया है.
पांच दिनों से पार्क नहीं लौटा चीता ओबान
ओबान बीते रविवार की सुबह कूनो पार्क से 15 किमी दूर गांव झार बड़ौदा और गोलीपुरा गांवों से होते हुए खेतों में पहुंच गया था. अगले दिन वह पार्वती बड़ौदा गांव में क्वारी नदी किनारे पानी पीते नजर आया था. इसके बाद मंगलवार को वह कुछ देर के लिए पार्क के आस-पास लौटा. मगर, फिर वह यहां रुकने के बजाए नहाड-सिलपुरा गांव के पास बफर जोन में पहुंच गया. अब शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील के पिपरवास के जंगल में उसकी लोकेशन ट्रेस हुई है.
क्वारी नदी किनारे पानी पीता नजर आया था ओबान, देखें वीडियो...
एल्टन और फ्रेडी को 22 मार्च को जंगल में रिलीज किया गया
बता दें, पिछले साल सितंबर माह में चीता प्रोजेक्ट के तहत नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए गए 8 चीतों में से 4 चीतों को बाड़ों से खुले जंगल में छोड़ दिया था. नर चीता ओबान और मादा चीता आशा को 11 मार्च को जंगल में रिलीज किया गया था. वहीं, एल्टन और फ्रेडी को 22 मार्च को जंगल में छोड़ा गया था.
वहीं, एक नामीबियाई मादा चीता साशा की बीते 27 मार्च को किडनी बीमारी से मौत हुई थी. जबकि दूसरी मादा सियाया ने 29 मार्च को 4 शावकों को जन्म दिया था. इसके अलावा पिछले दिनों 18 फरवरी को साउथ अफ्रीका से 7 नर और 5 मादा सहित 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में लाकर बसाया गया है. इनका क्वारंटीन पीरियड खत्म होने के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा.