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शिवराज सरकार का विरोध और मोदी की उम्मीदवारी पर सवाल... उमा भारती ने कब-कब BJP के खिलाफ लिया स्टैंड?

बीजेपी की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को बीजेपी द्वारा निकाली जा रही जन आशीर्वाद यात्रा के लिए न्योता नहीं मिला है. इसे लेकर उन्होंने निराशा व्यक्त की. हालांकि इससे पहले भी ऐसे कई मौके आएं हैं, जब उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.

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बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के लिए निमंत्रण न मिलने पर उमा भारती ने निराशा व्यक्त की है (फाइल फोटो)
बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के लिए निमंत्रण न मिलने पर उमा भारती ने निराशा व्यक्त की है (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. चुनावी सभाओं और रैलियां का दौर शुरू हो चुका है. साथ ही शुरू हो चुका है रूठने-मनाने का दौर. दरअसल, मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पार्टी को 'जन आशीर्वाद यात्रा' का निमंत्रण नहीं मिला है, इससे वह नाराज हो गई हैं. उमा भारती ने कहा कि अब अगर निमंत्रण मिलता भी है, तब भी वे यात्रा में शामिल नहीं होंगी. हालांकि ये पहली बार नहीं हैं, जब उमा भारती पार्टी से खफा हुई हैं, इससे पहले भी ऐसे कई मौके आ चुके हैं जब उमा भारती की नाराजगी साफ तौर पर जाहिर हुई है.

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बता दें कि साल 2005 में बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. हालांकि 2011 में उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया था.

उमा भारती ने कब-कब बीजेपी पर हमले किए? 

1, 'भगवान राम और हनुमान बीजेपी कार्यकर्ता नहीं'

दिसंबर 2022 में उमा भारती ने चुटकी लेते हुए कहा था कि भगवान राम और हनुमान पर एकाधिकार के लिए अपनी पार्टी पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि देवता किसी जाति या धर्म से बंधे नहीं हैं. भगवान राम और भगवान हनुमान भाजपा के पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं. देवता जनसंघ के अस्तित्व से पहले या मुगलों और अंग्रेजों के शासन से पहले भी अस्तित्व में थे. 

2. 'कभी नहीं कहा कि लोधी हैं तो बीजेपी को वोट दें'

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27 दिसंबर 2022 को उमा भारती की टिप्पणियों की एक वीडियो सामने आया था, इसमें लोधी समुदाय से कहा गया था कि वे अपने हित को ध्यान में रखते हुए किसी भी पार्टी को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं. उमा भारती का संदेश 25 दिसंबर को एक सामुदायिक बैठक में उनके संबोधन के दौरान आया था. इसमें कहा गया था कि  मैं आऊंगी, अपनी पार्टी के मंच पर आऊंगी, वोट मांगूंगी. लेकिन मैं कभी नहीं कहती कि आप लोधी हैं तो बीजेपी को वोट दें. मैं सभी से कहती हूं कि बीजेपी को वोट दें, क्योंकि मैं पार्टी की वफादार सिपाही हूं. लेकिन मैं आपसे यह उम्मीद नहीं करूंगी कि आप पार्टी के एक वफादार सिपाही बनें. आपको अपने हितों को देखना होगा. यदि आप पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं, तो आपको अपने बारे में निर्णय लेना होगा. मैं पार्टी के प्रति अपने प्रेम के कारण उससे बंधा हुई हूं, लेकिन आप किसी भी राजनीतिक बंधन से मुक्त हैं. उसी बैठक में द वीक ने उमा भारती का हवाला देते हुए कहा था कि बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. यहां किसी की भी सरकार बनाने की हैसियत नहीं थी. मैंने (निष्कासन के बाद) अपनी पार्टी बनाई, लेकिन बीजेपी के आदर्शों को कभी नहीं छोड़ा.

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3. शराब नीति पर नड्डा को लिखा था पत्र

जुलाई 2022 में उमा भारती ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में शराब नीति पर हस्तक्षेप की मांग की थी. उमा भारती ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लागू की गई शराब नीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वह कुछ महीनों से इसका विरोध कर रही हैं, लेकिन अब उन्हें 'घुटन' महसूस हो रही है. लंबे समय तक भाजपा की राजनीति से अलग रहने और राज्य में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग को लेकर उन्होंने भोपाल में एक शराब की दुकान पर ईंट फेंकी थी.

4. द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी के बाद की थी ये टिप्पणी

जून 2022 में जब झारखंड बीजेपी राष्ट्रपति चुनाव के लिए झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का जश्न मना रही थी, तब पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपनी पार्टी को याद दिलाया था कि सर्वोच्च संवैधानिक पद जाति से ऊपर है. उमा भारती ने एक्स (पहले ट्विटर) पर कहा था कि मीडिया और हमारे भाजपा के लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि एनडीए द्वारा भारत के राष्ट्रपति पद के लिए चुनी गईं उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू देश की संवैधानिक प्रमुख होंगी. ऐसा संवैधानिक प्रमुख जातियों के प्रभुत्व में नहीं आता. इसलिए इससे राजनीतिक लाभ लेने की इच्छा से कोई राय नहीं बनानी चाहिए.

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5. कृषि कानूनों के मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर साधा था निशाना

नवंबर 2021 में पीएम मोदी की तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा ने उमा भारती को अवाक कर दिया था. उन्होंने ट्वीट किया था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी किसानों को कृषि कानूनों का महत्व नहीं समझा सके तो यह हम भाजपा कार्यकर्ताओं की नाकामी है. हम किसानों को (कानूनों का महत्व) ठीक से क्यों नहीं बता सके? भाजपा नेता और प्रधानमंत्री एक गहन विचारक हैं, जो समस्या की जड़ तक जाकर उसका समाधान निकालते हैं. एक ट्वीट में उन्होंने कहा था कि कृषि कानूनों को लेकर हम विपक्ष के लगातार दुष्प्रचार का सामना नहीं कर सके. इसलिए उस दिन प्रधानमंत्री के संबोधन से मुझे बहुत निराशा हो रही थी.

6. नीतीश की सीढ़ी चढ़कर बीजेपी बनी 'बड़ा भाई'

नवंबर 2020 में उमा भारती ने कहा था कि उनकी पार्टी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीढ़ी के माध्यम से ही बिहार में एनडीए गठबंधन में बड़ा भाई बनी. उन्होंने कहा था कि नीतीश की सीढ़ी पर चढ़कर हम (भाजपा) छोटे से बड़े भाई बनने में सफल हुए हैं. आप उस सीढ़ी को नहीं गिरा सकते, जिसका इस्तेमाल चढ़ाई के लिए किया गया था.

7. बीजेपी को याद दिलाए थे नैतिक मूल्य 

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अक्टूबर 2019 में निर्दलीय MLA गोपाल कांडा द्वारा बीजेपी को बिना शर्त समर्थन की पेशकश के बाद उमा भारती ने कहा था कि मुझे सूचित किया गया है कि निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा ने पार्टी को अपना समर्थन देने की पेशकश की है. इस पर मेरे अपने विचार हैं कि गोपाल कांडा पर एक लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है, जिसकी मां ने भी न्याय न मिलने पर आत्महत्या कर ली थी. मामला अदालत में विचाराधीन है और वह जमानत पर बाहर हैं. गोपाल कांडा दोषी है या नहीं, इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया के जरिए सबूतों के आधार पर किया जाएगा, लेकिन उनकी चुनावी जीत उन्हें उनके अपराधों से क्लीन चिट नहीं देती. चुनावी जीत से जुड़े कई कारक होते हैं. मैं बीजेपी से आग्रह करता हूं कि वह नैतिक मूल्यों को न भूलें.

8.  मोदी की पीएम पद की उम्मीदवारी पर सवाल

मई 2013 में उमा भारती ने एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होने के नरेंद्र मोदी के दावे को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी और शीर्ष पद के लिए लालकृष्ण आडवाणी का समर्थन किया था. जिससे गुजरात के सीएम को लेकर पार्टी के भीतर की खामियां उजागर हो गईं. टाइम्स नाउ और पीटीआई को दिए अलग-अलग इंटरव्यू में मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम ने इस तर्क का मजाक उड़ाया था कि मोदी को उनकी लोकप्रियता के आधार पर पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि भीड़ खींचने वाला कारक किसी नेता को पीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनाता है. नरेंद्र मोदी की तरह अगर मैं किसी जगह जाती हूं, तो वही भीड़ आएगी. इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि भीड़ उनके पास आती है, तो वह पीएम उम्मीदवार हैं.  

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9. कैश फॉर वोट केस में लगाया था बीजेपी पर आरोप

अगस्त 2008 में एक चैनल द्वारा 'कैश-फॉर-वोट' के प्रसारण के बाद उमा भारती ने प्रसारण का स्वागत किया और दावा किया कि उनकी बात सही साबित हो गई है कि बीजेपी और सपा आपस में मिले हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि संजीव सक्सेना ने 22 जुलाई को विश्वास प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहने के लिए बीजेपी सांसदों को एक करोड़ रुपये पहुंचाए थे. उन्होंने कहा था कि बाद में मेरे द्वारा जारी की गई सीडी में भी सक्सेना को बीजेपी नेता अरुण जेटली के घर में खुलेआम एंट्री करते हुए दिखाया गया है. उमा भारती ने कहा था कि इससे केवल यह साबित होता है कि सपा और भाजपा आपस में मिले हुए हैं, क्योंकि भाजपा ने सक्सेना पर सपा का एजेंट होने का आरोप लगाया था.

रिपोर्ट- Dolly Chingakham
Live TV

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