गुरुवार को एमपी के इंदौर में पटेल नगर में स्थित प्राचीन श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर बनी बावड़ी (कुंए) की छत ढह गई थी. हादसे में मरने वालों की संख्या 35 पहुंच गई है. अपनों को गंवाने वाले कुछ परिवारों ने मृतकों के अंग दान की पहल की है. परिवारों के इस फैसले का अधिकारियों और लोगों ने जमकर स्वागत किया है. अंगदान के लिए काम करने वाले मुस्कान ग्रुप ने पीड़ित परिवारों के इस कदम की जमकर सराहना की है. वहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं.
मुस्कान ग्रुप के अंगदान विभाग के प्रभारी संदीपन आर्य ने कहा कि, इस दुख की घड़ी में भी कुछ परिवार ने मृतकों का अंग दान करने की बात कही है. उन्होंने कहा, ''हादसे में महिला मधु कुकरेजा की जान गई है. सबसे पहले उनका परिवार अंग दान के लिए आगे आया और उन्होंने हमसे संपर्क करते हुए मधु की आंखें दान करने की इच्छा जाहिर की है. 8 परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार के मृत सदस्य की आंख डोनेट करने की बात कही है. साथ ही तीन परिवार के ऐसे हैं जिन्होंने स्किन डोनेट करने की बात कही है. हम अन्य परिवारों से भी उनके परिवार के मृत सदस्य के अंगदान के लिए बात कर रहे हैं.''
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इन लोगों की गई है जान
भारती पति परमानंद, मधु पति राजेश, दीक्षा पति लक्ष्मीकांत, जयवंती पति परमानंद, लक्ष्मी पति रतनलाल, इंद्रकुमार पिता थवरलाल, मनीषा पति आकाश, गंगाबेन पति गंगादास, भूमिका पति उमेश, कनक पति कौशल पटेल, पुष्पा पति दिनेश पटेल, करिश्मा पिता राम वाधवानी, वर्षा पिता रवि पाल, पिंटू पिता मंगल सिंह, लोकेश पिता सुरेश, पुष्पा पाल पति रामकरण पाल, शारदा बेन पति केशवलाल, महक पिता राजेश, सुभाष पिता सुखलाल, तनीश पिता रवि पाल, प्रियंका प्रजेश पटेल, राजेंद्र पिता बद्रीनारायण, हितेश पिता प्रेमचंद, नंद किशोर पिता मोहन दास, कस्तूरी बेन पति मनोहर दास, घनश्याम पिता नौतन दास, सुरेश पिता अरुण दास, जितेंद्र पिता रतन सोलंकी, जया बेन पिता गंगाराम पटेल, विनोद पटेल पिता धनजी पटेल, इंद्रा पिता नारायण दास, उषा गुप्ता पिता प्रहलाद दास, शारदा लाड पति हुकुमचंद लाड, रतन बेन पति नानजी पटेल और सोमेश खत्री की मौत हो गई.
केंद्र और राज्य ने की आर्थिक मदद की घोषणा
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पूरी घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों को 50 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है. घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी. इसके अलावा पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की मदद की घोषणा की गई है.
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40 साल पहले कुएं को ढककर किया गया था परिसर का निर्माण
बता दें कि इंदौर शहर के मंदिर में गुरुवार को रामनवमी के अवसर पर हवन कार्यक्रम चल रहा था, जब लोग पूर्ण आहुति के लिए अपनी जगह पर खड़े हुए तो बड़ा हादसा हो गया. सुबह के करीब 11:55 पर प्राचीन बावड़ी के ऊपर बना स्लैब ढह गया. इसमें 60 के करीब लोग कुएं में गिर गए थे. हादसे में 35 लोगों की मौत हो चुकी है. 18 लोगों को बचाया गया है, जिनमें से 16 का अस्पताल में इलाज जारी है. कुछ लोग मिसिंग बताए जा रहे हैं, जिनके लिए सर्च ऑपरेशन जारी है.
इंदौर डीएम डॉ. इलैयाराजा टी के मुताबिक रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 140 लोगों की टीम जुटी है. इनमें 15 एनडीआरएफ, 50 एसडीआरएफ, 75 आर्मी के जवान फायर ब्रिगेड और इंदौर पुलिस प्रशासन की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी हुई हैं.
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चीख-पुकार के बीच लोग अपनों को ढूढ रहे थे
- मंदिर के पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा ने बताया,'12 बजने में 5 मिनट की देरी थी. हम लोग रामजी की आरती का इंतजार कर रहे थे और यह हादसा हो गया. मंदिर में करीब 40-50 लोग थे. मंदिर करीब 60 साल पुराना है और वह यहां 16 साल से पुजारी हैं.'
पंकज पटेल ने बताया,'मंदिर में हवन चल रहा था. माहौल भक्तिमय था. हवन पूरा होने के बाद सभी पूर्णाहुति के लिए खड़े हुए. धीरे-धीरे लोग हवन स्थल की तरफ बढ़े. पूर्णाहुति छोड़ी जाने ही वाली थी कि अचानक स्लेब नीचे धंस गया और सब उसमें गिर गए. मंदिर में चीख पुकार मच गई. पहले मंदिर छोटा था. बाद में उसके विस्तार का काम हुआ. इसके तहत ही करीब 15-20 साल पहले स्लेब डाले गए.'
- घायल महिला ने बताया,' हमारे परिवार के 6 लोग मंदिर गए हुए थे. चार आ गए, जिसमें हमारे परिवार की एक महिला एक्सपायर हो गई हैं. एक महिला और 2 साल का बच्चा बब्बू अब तक लौटकर नहीं आए हैं.
- 'धार्मिक कार्यक्रम में भारी भीड़ जमा थी. कई लोग मंदिर में बावड़ी की छत पर खड़े थे. छत लोगों का भार सहन नहीं कर पाई और नीचे धंस गई. लोग बावड़ी में गिर गए, जिसमें पानी भी मौजूद था.'
- 'मंदिर को पुरानी बावड़ी के ऊपर बनाया गया था. बावड़ी को पटिया रखकर ढक दिया गया था. बावड़ी की छत धंसने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई थी. हादसे की सूचना पाकर मंदिर के बाहर भारी संख्या में लोग जमा हो गए थे. चीख-पुकार मच गई थी. लोग अपने-अपने परिवार के लोगों को ढूंढ रहे थे.'