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भोपाल के अंजुम बाराबंकवी ने श्रीराम पर लिखी गजल, प्रधानमंत्री मोदी को आई पसंद; PMO से आया लेटर

शायर अंजुम बाराबंकवी ने कहा, श्रीराम पर गजल लिखने के बाद उनके खिलाफ कोई फतवा भी जारी करे तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.  आजकल हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि 'वंदे मातरम' बोलो तो कौम की दुहाई दी जाती है. लेकिन हमारी परवरिश ऐसी हुई है कि हमें वंदे मातरम कहने से कभी गुरेज नहीं हुआ

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राम पर गजल लिखने वाले शायर अंजुम बाराबंकवी. (इनसेट में PM का पत्र)
राम पर गजल लिखने वाले शायर अंजुम बाराबंकवी. (इनसेट में PM का पत्र)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मुस्लिम शायर अंजुम बाराबंकवी ने श्रीराम पर गजल लिखी है और ये गजल उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डाक के जरिये पढ़ने के लिए भेजी थी.  अंजुम बाराबंकवी की खुशी का उस वक्त ठिकाना नहीं रहा, जब पीएम मोदी ने न केवल गजल को पढ़ा, बल्कि उनका आभार जताते हुए एक पत्र भी भेजा. शनिवार को ही पीएम मोदी का पत्र अंजुम बाराबंकवी को मिला.  

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्र में अंजुम बाराबंकवी की तारीफ करते हुए लिखा,  ''आप जैसे देशवासियों द्वारा किए जा रहे प्रयास राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे...''

PM मोदी ने भेजा शायर अंजुम बाराबंकवी को पत्र.

aajtak से बात करते हुए शायर अंजुम बाराबंकवी ने कहा, ''वो खुद अवध से आते हैं और उनके जीवन पर श्रीराम का बहुत प्रभाव पड़ा है. जो भी अवध का होगा, वो राम का होगा. राम तो हर अवध निवासी के दिल में हैं.'' 

शायर अंजुम बाराबंकवी ने आगे कहा, राम का व्यक्तित्व उन्हें बचपन से ही प्रभावित करता था, क्योंकि अयोध्यापति ने जो मानक स्थापित किए, वो कोई और नहीं कर सकता. फिर भले ही वो पुत्र के रूप में हों, भाई के रूप में हों, पति के रूप में हों, 14 वर्ष वनवास के दौरान संन्यासी के रूप में हों, राजा के रूप में हों या एक पिता के रूप में हों.

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शायर अंजुम बाराबंकवी ने कहा, श्रीराम पर गजल लिखने के बाद उनके खिलाफ कोई फतवा भी जारी करे तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.  

बाराबंकवी बोले, ''आजकल हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि 'वंदे मातरम' बोलो तो कौम की दुहाई दी जाती है. लेकिन हमारी परवरिश ऐसी हुई है कि हमें वंदे मातरम कहने से कभी गुरेज नहीं हुआ और मुझे लगता है कि जल्द हालात फिर बदलेंगे. ''

आजतक से बात करते हुए शायर अंजुम बाराबंकवी ने अयोध्या में श्री राम का मंदिर बनने पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि राम का मंदिर अयोध्या में नहीं बनता तो कहां बनता? 

अंजुम बाराबंकवी की श्रीराम पर लिखी गजल:-

दूर लगते हैं मगर पास हैं दशरथ नन्दन,
मेरी हर सांस का विश्वास हैं दशरथ नन्दन.

दिल के काग़ज़ पे कई बार लिखा है मैंने,
इक महकता हुआ अहसास हैं दशरथ नन्दन.

दूसरे लोगों के बारे में नहीं जानता हूं,
मेरे जीवन में बहुत ख़ास हैं दशरथ नन्दन.

और कुछ दिन में समझ जाएगी छोटी दुनिया,
हम ग़रीबों की बड़ी आस हैं दशरथ नन्दन.

आप इस तरह समझ लीजिए मेरी अपनी,
ज़िन्दगी के लिए मधुमास हैं दशरथ नन्दन.

ये जो दौलत है मेरे सामने मिट्टी भी नहीं,
मेरी क़िस्मत के मेरे पास हैं दशरथ नन्दन.

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मेरी ये बात भी जो चाहे परख सकता है,
सच के हर रूप के अक्कास हैं दशरथ नन्दन.

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