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देश में जहां चहुं ओर अयोध्या में बनकर तैयार हो रहे श्री राम मंदिर की चर्चा हो रही है, तो ऐसे में कुछ अविरल राम भक्तों की भी चर्चा होनी चाहिए. कहते हैं कि राम नाम जपने से मन को शांति मिलती है. मगर मध्य प्रदेश के बैतूल में भगवान श्री राम के एक ऐसे भक्त हैं जिन्हें 'श्री राम', 'सिया राम' लिखने में असली सुकून मिलता है.
दरअसल, हम बात कर रहे हैं बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाले देवगांव में रहने वाले केदार सिंह चंदेल की. 65 वर्षीय केदार सिंह ने अपने होश संभालते ही 22 साल की उम्र में श्री राम नाम कागजों पर लिखना शुरू कर दिया, और फिर उन्होंने सिया राम से सिया राम मिलाकर पूरा सुंदरकांड लिख दिया.
केदार सिंह की भक्ति यहीं नहीं रुकी, फिर साल 1997 में उनके दोस्त की प्रेरणा से मन में 'सिया राम' के अक्षरों को जोड़ कर 'राम चरित मानस' लिखने ख्याल आया, और फिर क्या था, केदार सिंह हर दिन एक घंटे से ज्यादा का समय बिता कर राम चरित मानस लिखने लगे और फिर लगभग 8 साल में उन्होंने इसे पूरा किया. अब जहां पूरे देश में श्री राम मंदिर और राम भक्तों की चर्चा जोरों पर है तो केदार सिंह चंदेल की भक्ति भी सभी का ध्यान उनकी ओर आकर्षित कर रही है.
केदार सिंह चंदेल मूलतः बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाले भोगीतेड़ा ग्राम निवासी हैं और उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन बीकॉम और एलएलबी से पूरी की है. मगर घर में खेती होने के कारण उन्होंने अपना पेशा खेती को ही बनाया, जिससे अपने परिवार का भरण पोषण किया. केदार सिंह के परिवार में उनकी माताजी, पत्नी और पांच बच्चे हैं. जिनमें 3 लड़के और 2 लड़कियां हैं.
अपनी राम भक्ति के साथ साथ केदार सिंह ने अपने परिवार के मुखिया होने का फर्ज भी बखूबी निभाया. आज तीनों बेटे आज सफल हैं. एक डेंटिस्ट हैं और दो बेटे उनकी खेती में सहायता करते हैं.
केदार सिंह की राम भक्ति की झलक उनके घर में साफ़ देखने मिलती है. मुख्य द्वार पर सामने घर का नाम 'मंगलम और फिर पीछे 'जय जय श्री राम', इसके बाद प्रकृति प्रेम को दर्शाता हुआ एक सुन्दर बगीचा, जिसमें हरे भरे पेड़ पौधे लगे हुए हैं. केदार सिंह के घर में मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं उनके घर की दीवारों पर रामायण की लिखी चौपाइयां, जो कुछ न कुछ सीख जरूर देती हैं.
सिया राम और ॐ अक्षरों को मिला कर राम चरित मानस लिखने वाले केदार सिंह चंदेल बताते हैं, ये अवधि भाषा में लिखी गई राम चरित मानस है, जिसे 1200 पन्नों में पूरा किया गया है. अब इच्छा है कि इसकी प्रतियां छपें और लोगों तक पहुंचें. साथ एक कॉपी अयोध्या भी जाये.
केदार सिंह ये भी बताते हैं, जैसे होश संभालने के बाद से ही उन्होंने राम काज जारी रखे. जैसे कभी राम नाम लिख कर कागजों को अयोध्या के श्री राम नाम बैंक पहुंचाना, तो कभी यूं ही अक्षरों से अक्षरों को जोड़ कर हनुमान चलिसा और सुन्दर कांड लिखना, और फिर इसी तरह सिया में राम और राम में सिया लिख कर राम चरित मानस के सात कांड लिख दिए. अब केदार सिंह का सपना है कि वह वाल्मीकि की रामायण को संस्कृत में लिखें.