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बैंकों की फर्जी वेबसाइट्स बनाकर यूं लगाते थे आम लोगों को चूना, जामताड़ा से 3 गिरफ्तार

रीवा पुलिस और साइबर सेल ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में जामताड़ा (झारखंड) से गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. अब मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है.

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रीवा पुलिस के गिरफ्त में साइबर ठग
रीवा पुलिस के गिरफ्त में साइबर ठग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फर्जी वेबसाइट बनाकर बैंक अकाउंट से निकालते थे पैसे
  • बैंकों की फेक वेबसाइट बनाकर गूगल पर करते थे अपलोड

मध्य प्रदेश की रीवा पुलिस ने साइबर ठगी के ऐसे गिरोह का भंड़ाफोड़ किया है, जो बैंकों की फर्जी वेबसाइट के जरिए डिजिटल तरीके से ग्राहकों को ठगते थे. अब तक इस गिरोह ने कई राज्यों के लोगों को चूना लगाया.

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पुलिस ने आरोपी मुसर्रफ अंसारी, मनुवर अंसारी और फैज आलम को जामताड़ा (झारखंड) से गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड फरार है. पुलिस ने ठगी करने वाले आरोपियों से दस लाख रुपये के साथ 3 पासबुक, 6 एटीएम कार्ड, 12 मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं. आरोपियों को पुलिस ने एक दिन की रिमांड में लिया है.

पूछताछ में आरोपियों ने चौकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और वेब डिजाइन के जानकर गिरोह में थे. ये कई बैंकों की फेक वेबसाइट बनाकर गूगल पर अपलोड करते थे. इन वेबसाइट में उनका नंबर था. जैसे ही ग्राहक बैंक के फेक वेबसाइट पर विजिट करता, ठगी का शिकार हो जाता था. बैंक अधिकारी बनकर ये ग्राहक से बात करते और सभी गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लेते थे. व्हाट्सएप और मैसेज से बैंक ग्राहक की पिन प्राप्त होते ही खाते से रुपये अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लेते थे. 

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इस मामले में श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के पूर्व डीन डॉ. पी. सी. द्विवेदी 23 अप्रैल को साइबर फ्रॉड के शिकार हो गए थे. क्रेडिट कार्ड का पिन जनरेट करने के दौरान हुई चूक का फायदा उठाकर बदमाशों ने उनके खाते से 10 लाख रुपए निकाल लिए थे. पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी.

रीवा अमहिया के थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल ने बताया कि जांच में खुलासा हुआ कि बैंक की फेक वेबसाइट है. पुलिस साइबर सेल की मदद से आरोपियों तक पहुंच गई. साइबर सेल और अमहिया थाना प्रभारी पुलिस की संयुक्त टीम ने जामताड़ा से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि मास्टरमाइंड फरार है. उसकी तलाश की जा रही है.

 

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