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रणथंभौर से भटके खूंखार बाघ के Kuno में घुसने की चर्चा, चीतों की देखरेख में लगे DFO ने कही ये बात

बाघ T-136 पिछले काफी समय से राजस्थान के धौलपुर जिले के जंगलों में विचरण कर रहा था. पहले बाघ मुरैना जिले की सीमा में भी आया था. लेकिन बाद में लौट गया. अब बताया जा रहा है कि पिछले चार-पांच पहले ये धौलपुर से वापस निकलकर रणथंभौर की सीमा में आ गया और फिर वहां से चंबल पार कर इसके श्योपुर जिले की सीमा में पहुंचने की संभावना है.

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कूनो नेशनल पार्क के एंट्री गेट का फोटो.
कूनो नेशनल पार्क के एंट्री गेट का फोटो.

देश की धरती पर चीतों के इकलौते घर कूनो नेशनल पार्क में राजस्थान के रणथंभौर पार्क से भटके एक बाघ के आने की चर्चाएं जोरों पर हैं. लेकिन कूनो पार्क प्रबंधन यहां किसी भी बाघ के मूवमेंट होने और ताजा पगमार्क मिलने की बात से साफ इनकार कर रहा है. हालांकि, राजस्थान के धौलपुर डीएफओ बाघ टी-136 के कूनो की और निकलने का दावा कर रहे हैं.

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राजस्थान के सवाईमाधोपुर स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क का बाघ T-136 पिछले काफी समय से राजस्थान के धौलपुर जिले के जंगलों में विचरण कर रहा था. पहले बाघ मुरैना जिले की सीमा में भी आया था. लेकिन बाद में लौट गया. अब बताया जा रहा है कि पिछले चार-पांच पहले ये धौलपुर से वापस निकलकर रणथंभौर की सीमा में आ गया और फिर वहां से चंबल पार कर इसके श्योपुर जिले की सीमा में पहुंचने की संभावना है. 

राजस्थान के धौलपुर डीएफओ किशोर गुप्ता ने Aajtak को फोन कॉल पर बताया, रणथंभौर का बाघ टी-136 काफी समय से हमारे यहां के क्षेत्र में था. लेकिन 4-5 दिन पहले ये यहां से निकल गया है. इसके कूनो नेशनल पार्क की ओर जाने की संभावना है. हमने इस संबंध में रणंथभौर पार्क के अधिकारियों को सूचना दे दी है. लेकिन कूनो के अफसर इस तरह के किसी बाघ के कूनो आने की बात से इनकार कर रहे हैं. 

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कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा, कूनो पार्क क्षेत्र में किसी भी बाघ का कोई मूवमेंट नहीं है और न ही रणथंभौर से निकलकर किसी बाघ के यहां आने की कोई सूचना हमें मिली है. जहां तक कूनो के पास किसी बाघ के हाल ही में पद चिन्ह मिलने की बातें कही जा रही हैं, वो भी सही नहीं हैं. पिछले फरवरी माह में कूनो पार्क से 25 किमी दूर पोहरी के जंगलों में जरूर ट्रेकिंग के दौरान बाघ के पगमार्क मिले थे.

पहले भी आते रहे हैं रणथंभौर पार्क के टाइगर

श्योपुर के सामान्य वनमंडल के जंगल और कूनो नेशनल पार्क के जंगल में पहले भी राजस्थान के रणथंभौर के टाइगर आते रहे हैं. इससे पहले रणथंभौर का बाघ टी-38 तो कूनो नेशनल पार्क के जंगलों में 10 साल (फरवरी 2011 से नवंबर 2020) तक रहा और लौट गया. वहीं, एक मोहन नामक बाघ तो दतिया के जंगलों तक पहुंचा था.

यहां बता दें कि श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में रणथंभौर नेशनल पार्क से पहुंचे टाइगर की आमद की भले ही आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो, लेकिन चीता प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग पहले से ही अलर्ट है. चीतों के नए घर में नामीबिया से 8 और साउथ अफ्रीका से 12 चीते लाकर बसाए गए हैं. इन चीतों में अब तक एक नामीबियाई मादा चीता साशा और साउथ अफ्रीका के नर चीता उदय की एक माह के अंतराल में मौत हो चुकी है. 

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वहीं, एक मादा चीता ने पिछले मार्च माह ही 4 शावकों को भी जन्म दिया है. फिलहाल कूनो में 18 चीते और 4 शावक मौजूद हैं. हालांकि, कूनो के खुले जंगल में 3 चीते विचरण कर रहे हैं. ऐसे में चीतों का सामना बाघ से हुआ तो चिंता का विषय हो सकता है.

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