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मानखुर्द में नवाब मलिक के बहाने अबू आजमी के साथ खेला, किसी 'तीसरे' का गेम बना रही है बीजेपी । opinion

अगर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मानखुर्द नगर सीट एमवीए हार जाती है तो यह मानना पड़ेगा कि महायुति गठबंधन हर सीट के लिए अलग रणनीति बनाकर चुनाव लड़ा है. 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी में महाराष्ट्र के दो धुरंधर मुस्लिम नेता अपना करिअर दांव पर लगाएं हैं.

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नवाब मलिक और अबू आजमी
नवाब मलिक और अबू आजमी

मुंबई के मानखुर्द शिवाजी नगर विधानसभा क्षेत्र में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की सबसे चर्चित सीट बन गई है. यहां दो ऐसे नेताओं की जान फंसी हुई है, जिनके बयान अकसर मीडिया में सुर्खियां बटोरते रहे हैं. 50% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली यह सीट कभी बीजेपी की नहीं थी पर यहां दो प्रमुख मुस्लिम नेताओं आमने सामने आने से नई उम्‍मीदें जागी हैं. ये दो धुरंधर हैं समाजवादी पार्टी के राज्य प्रमुख और मौजूदा विधायक अबू आज़मी और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के नवाब मलिक. इन दोनों के बीच लड़ाई से ऐसा लगता है कि इस बार बीजेपी समर्थित शिंदे सेना के उम्मीदवार को यहां सफलता मिल सकती है. यह तीसरे उम्मीदवार हैं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सुरेश पाटील जो इस सीट पर महायुति के दूसरे उम्मीदवार हैं. 

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बीजेपी के विरोध के बावजूद एनसीपी ने यहां से नवाब मलिक को टिकट दे दिया. भारतीय जनता पार्टी ने मलिक के टिकट मिलने के बाद ही कह दिया था कि वह उनका प्रचार नहीं करेगी. चूंकि शिंदे सेना के सुरेश पाटिल पहले ही यहां से उम्मीदवारी दाखिल कर चुके थे इसलिए बीजेपी अब उनको सपोर्ट कर रही है. तीसरे मुस्लिम उम्मीदवार एआईएमआईएम के अतीक अहमद खान के आने के बाद ऐसा लगता है कि शिंदे सेना यहां से सीट निकाल ले जाएगी. आइये देखते हैं किस तरह एक कठिन सीट बीजेपी के हिस्से में जाने के कगार पर है.

1- क्या बीजेपी ने रणनीति के तहत नवाब मलिक को भेजा है मानखुर्द

मानखुर्द नगर सीट से नवाब मलिक को एनसीपी का टिकट दिया जाना शुरू से ही संदिग्ध लग रहा है. जब अजित पवार ने नवाब मलिक को टिकट दिया तो ऐसा लगा कि महायुति के भीतर ही टकराव है. बीजेपी के बार-बार मना करने के बावजूद पहले नवाब मलिक की बेटी को अणुशक्ति नगर से फिर नवाब मलिक को मानखुर्द शिवाजीनगर से एनसीपी ने टिकट दिया. दरअसल नवाब मलिक ईडी के घेरे में हैं. इसी के चलते उनको जेल हुई और उन्हें उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल से त्यागपत्र भी देना पड़ा था. उस समय नवाब मलिक ने बीजेपी के बड़े नेताओं के बारे में खूब बयानबाजी की थी. नवाब मलिक पर दाउद इब्राहिम के लिए काम करने का भी आरोप रहा है.

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किरीट सोमैया और शेलार ने खुलकर नवाब मलिक का विरोध किया था. पर जैसे जैसे वोटिंग के दिन नजदीक आ रहे हैं आम लोगों को ऐसा लगने लगा है कि बीजेपी ने रणनीति के तहत ये सब किया है. अबु आजमी भी बार-बार यही कह रहे हैं कि नवाब मलिक को बीजेपी ने ही भेजा है. आजमी कहते हैं कि बीजेपी जानती है कि उसे मुसलमानों के वोट नहीं मिलते, इसलिए मुस्लिम वोटों को बांटने के लिए जानबूझकर नवाब मलिक के विरोध का नाटक कर रही है, आखिर उनकी बेटी तो महायुति से ही लड़ रही है. जैसा कि पहले बताया है कि नवाब मलिक की बेटी एनसीपी अजीत पवार के टिकट पर ही अशुशक्ति नगर से चुनाव लड़ रही है और वहां पर उसे बीजेपी का समर्थन भी मिला हुआ है.

2- लोकसभा चुनावों में मानखुर्द शिवाजी नगर में एमवीए को मिली थी बढ़त

मानखुर्द शिवाजी नगर सीट सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबु आसिम आजमी की है. यह विधानसभा क्षेत्र उत्तर पूर्व मुंबई लोकसभा क्षेत्र में आता है. इस साल हुए लोकसभा चुनाव में यह सीट शरद पवार की एनसीपी के संजय पाटील ने जीती है. यह इलाका समाजवादी पार्टी का गढ़ है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी (अजित पवार) के गठबंधन यानी महायुति ने मिहिर कोटेचा को उम्मीदवार बनाया था. पाटील की जीत में बड़ा योगदान मानखुर्द शिवाजी नगर का ही था. संजय दीना पाटील को मानखुर्द शिवाजी नगर से 116072 वोट मिले थे. वहीं बीजेपी उम्मीदवार मिहिर कोटेचा को केवल 28 हजार 101 वोट ही मिले थे.यही वजह है कि मानखुर्द शिवाजी नगर से तीन बार विधायक रह चुके अबु आसिम आजमी अपनी जीत के लिए आश्वस्त हैं.इसके पहले भी आज़मी ने 2009 से इस सीट को तीन बार लगातार जीता है और 2019 में तब की अविभाजित शिवसेना के विठ्ठल लोकारे को 25,000 से अधिक वोटों से हराया था.शिंदे सेना के के पाटिल और आज़मी ने पहले भी 2014 में आमने-सामने मुकाबला किया था, जिसमें आज़मी ने लगभग 10,000 वोटों से जीत हासिल की थी. इसलिए शिंदे सेना को लगता है कि इस बार अगर नवाब मलिक और अबू आजमी का सीधे-सीधे मुकाबला हुआ तो पाटील की लॉटरी लग सकती है. 

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3- मलिक और आज़मी के बीच है पुरानी प्रतिस्पर्धा

मलिक और आजमी के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता रही है. दोनों ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत समाजवादी पार्टी के साथ की थी. 1996 में मलिक ने मुंबई के नेहरू नगर से अपना पहला चुनाव एसपी नेता के रूप में आज़मी के नेतृत्व में जीता था. प्रारंभिक दोस्ती टकराव में बदल गई, जब आज़मी ने अपना राजनीतिक डेब्यू नहीं किया और मलिक मंत्री बन गए. अक्टूबर 2001 में आजमी ने मलिक को एसपी से निष्कासित कर दिया और मलिक ने तब की एकीकृत एनसीपी का साथ दिया. 

4-स्थानीय समस्याओं का भी वोटिंग पर पड़ेगा असर

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार वोटर इस क्षेत्र में बढ़ते अपराध, ड्रग समस्या, बायोमेडिकल कचरे के संयंत्र से होने वाले प्रदूषण, और शैक्षिक और चिकित्सा संस्थानों की कमी जैसी समस्याओं से परेशान हैं. इन मुद्दों के कारण आज़मी के खिलाफ इलाके में जबरदस्त असंतोष है.एक वोटर के हवाले एक्सप्रेस लिखता है कि मौजूदा मुद्दे आज़मी के खिलाफ जाएंगे. उन्होंने यहां के लोगों के लिए कुछ नहीं किया. इसके बजाय, युवाओं में ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ा है, और स्थिति डरावनी हो गई है. इस इलाके में ड्रग्स की समस्या कितनी भयावह हो गई इससे समझ सकते हैं कि सभी प्रमुख उम्मीदवारों  नवाब मलिक, सुरेश पाटील और अबू आजमी के घोषणापत्रों में इस समस्या से छुटकारा दिलाने का वादा किया गया है.

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