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महाराष्ट्र में किसी एक पार्टी को क्यों नहीं मिलता बहुमत? अजित पवार ने समझाया सियासी समीकरण

अजित पवार का कहना था कि महाराष्ट्र का वोटर अलग तरीके से सोचता है. महाराष्ट्र में हर इलाका अलग तरीके से सोचता है, जिसकी वजह से किसी एक पार्टी की सरकार अब तक नहीं बन पाई है. एक तरीके से उनकी तरफ से ये मैसेज देने की कोशिश की जा रही है. ये बीजेपी के साथ जाने में उनकी भूमिका को एक्सप्लेन करने की कोशिश है, जिसे महाराष्ट्र की पॉलिटिकल रियलिटी के आधार पर पेश कर रहे हैं.

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महाराष्ट्र में नई राजनीति की शुरुआत, पढ़े- वीकली डायरी
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देश में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर हैं. ऐसे में एनसीपी (अजित गुट) के प्रमुख अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति की रियलिटी आजतक के साथ बातचीत में सामने रखने की कोशिश की है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि महाराष्ट्र ने 1985 के बाद राजनैतिक रूप से ऐसी स्थिति कभी नहीं बनने दी, जिसकी वजह से किसी एक पार्टी या किसी एक नेता की पूरे राज्य में चले या वे अपने बलबूते सरकार बना ले. 

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दरअसल उनसे पूछा गया था कि जिस तरीके से नीतीश कुमार, मायावती, अखिलेश, जयललिता, स्टालिन, केजरीवाल इन लोगों ने अपने बलबूते पर अपने प्रांतों या राज्यों में सरकारें बनाई. उस तरीके से महाराष्ट्र में क्या यहां की राजनीतिक पार्टियां विपक्ष के रूप में काम करने में सक्षम नहीं है, जिसकी वजह से महाराष्ट्र में किसी एक पार्टी की सरकार नहीं बन पाई? इस पर अजित पवार का कहना था कि महाराष्ट्र का वोटर अलग तरीके से सोचता है. महाराष्ट्र में हर इलाका अलग तरीके से सोचता है, जिसकी वजह से किसी एक पार्टी की सरकार अब तक नहीं बन पाई है. एक तरीके से उनकी तरफ से ये मैसेज देने की कोशिश की जा रही है. ये बीजेपी के साथ जाने में उनकी भूमिका को एक्सप्लेन करने की कोशिश है, जिसे महाराष्ट्र की पॉलिटिकल रियलिटी के आधार पर पेश कर रहे हैं.

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उन्होंने ये बात सामने रखने की कोशिश की है कि महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में इस तरीके के अलायंस देखने को मिल सकते हैं कि जो वैचारिक रूप से पूरी तरीके से विपरीत पार्टी रहेंगे लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें साथ में आकर सरकार बनाना पड़ेगा. दूसरा, उन्होंने ये भी साफ करने की कोशिश की है की कई बार प्रयास करने के बावजूद भी खुद शरद पवार 74 से ज्यादा सीटें जीत नहीं पाए थे. बालासाहब ठाकरे जैसे बड़े नेता भी कभी अपने बलबूते पर सरकार बना नहीं पाए थे और बीजेपी की भी यहीं रियलिटी है कि बीजेपी ने भी कभी अपने बलबूते पर महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाई है. इसलिए हमेशा गठबंधन की सरकारें बनती रही हैं. एक विशिष्ट स्थिति में अगर सरकार बनानी है तो इस तरीके के अलायंस में शामिल होना होगा.

दूसरी तरफ, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एनसीपी ने जब शिवसेना के साथ सरकार बनाई थी, तब सेक्युलरिज्म का मुद्दा क्यों नहीं उठाया क्योंकि शिवसेना भी एक हिंदुत्ववादी पार्टी के रूप में मानी जाती है. महाराष्ट्र में तो बीजेपी के साथ ही ये सवाल क्यों उठाया जा रहा है? इसका जवाब अजित पवार इस तरीके से दे रहे हैं कि ये महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति है कि जिसकी वजह से उन्हें इस तरीके की अलायंस पॉलिटिक्स में रहना होगा. एक तरीके से उन्होंने बीजेपी को भी संदेश दिया है कि उनके जैसे नेताओं कि उन्हें जरूरत पड़ेगी. दूसरी तरफ उन्होंने इस बात को भी सामने रखने की कोशिश की है कि इसके आगे भी इस तरीके की अलग-अलग पार्टियां साथ में आकर सरकार बनने की प्रक्रिया महाराष्ट्र में देखने को मिल सकती है.

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ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव जब चरम पर है. मोदी मैजिक की बात देश में की जा रही है तब महाराष्ट्र में अलायंस पॉलिटिक्स की बात को सामने रखना ये दिखाता है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में बीजेपी को अभी अजित पवार हो या एकनाथ शिंदे हो या किसी और पार्टी का सहारा लेकर ही लोकसभा या विधानसभा की राजनीति करनी पड़ेगी. उसका मैसेज अजित पवार के स्टेटमेंट से मिलता है.

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