अमित शाह का दावा है कि दिल्ली चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन तय है. और, बीजेपी भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है. हालांकि, ऐसे ही दावे बीजेपी नेतृत्व की तरफ से 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी किये जा रहे थे. दोनो चुनावों के नतीजों में फर्क बस इतना ही रहा कि बीजेपी 3 विधानसभा सीटों से 8 पर पहुंच गई.
कोई भी पार्टी असली चुनाव नतीजे आने तक जीत के ही दावे करती है, अमित शाह भी वही कर रहे हैं. जनता में तो ऐसी बातों से संदेश जाता ही है, पार्टी कार्यकर्ताओं का भी जोश हाई रहता है.
अमित शाह के भी अरविंद केजरीवाल पर करीब करीब वैसे ही आरोप हैं, जैसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के. राहुल गांधी की ही तरह अमित शाह कह रहे हैं, दिल्ली में हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ है, जबकि ये अन्ना हजारे का नाम लेकर, भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़कर, राजनीति में आये थे. राहुल गांधी ने भी कांग्रेस की दिल्ली रैली में अरविंद केजरीवाल की नीली वैगन-आर कार की याद दिलाई है.
और इसके साथ ही अमित शाह का ये भी दावा है कि अरविंद केजरीवाल और आतिशी दोनो ही अपनी अपनी सीटों से चुनाव हार रहे हैं.
मिडिल क्लास का गुस्सा
अमित शाह, असल में, अरविंद केजरीवाल की उस चिट्ठी से भी नाराज लगते हैं, जिसमें वो केंद्र सरकार से आम बजट 2025 में मिडिल क्लास को राहत देने की मांग कर चुके हैं.
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मिडिल क्लास के हित में 7 डिमांड रखी है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि आम आदमी पार्टी के सांसद बजट सत्र के दौरान संसद में मिडिल क्लास की आवाज उठाएंगे.
हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने कहा था, मिडिल क्लास टैक्स-टेररिज्म का शिकार हो गया है… जब सरकार को जरूरत पड़ती है, तो टैक्स का हथियार चला देती है… बदले में मिडिल क्लास को कुछ नहीं मिलता.
आम आदमी पार्टी की तरफ से मिडिल क्लास के लिए मैनिफेस्टो जारी करते हुए अरविंंद केजरीवाल ने कहा था, मिडिल क्लास केंद्र सरकार का ATM बनकर रह गया है.
एक सीएम, दूसरा पूर्व सीएम... AAP सरकार से नाराजगी के कारण निशाने पर
दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनने के दावे पर जब अमित शाह से मुख्यमंत्री चेहरे के बारे में पूछा जाता है तो वो सीधे सीधे टाल जाते हैं. जब प्रवेश वर्मा के अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री पद के दावेदार होने की याद दिलाई जाती है, तो अमित शाह का जवाब होता है, सभी 70 लोगों को ऐसा लगता कि वो सीएम हो सकते हैं… कोई भी सीएम बन सकता है.
बात तो सही है. 70 में से कोई भी विधायक मुख्यमंत्री बन सकता है. मुख्यमंत्री पद के चेहरे की बात पर अमित शाह का कहना होता है, अभी उनका एजेंडा चुनाव जीतना है, मुख्यमंत्री बाद में तय कर लेंगे.
और फिर कहते हैं, अरविंद केजरीवाल खुद नई दिल्ली से हारने जा रहे हैं… आतिशी भी हार रही हैं. आतिशी फिलहाल दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं, और अरविंद केजरीवाल सीएम रह चुके हैं - और आम आदमी पार्टी की तरफ से पहले से ही साफ कर दिया गया है कि चुनाव जीतने पर अरविंद केजरीवाल ही मुख्यमंत्री होंगे, आतिशी नहीं.
केजरीवाल और आतिशी की हार की वजह भी अमित शाह अपनी स्टाइल में बताते हैं, क्योंकि झूठ की आयु लंबी नहीं होती है. कहते हैं, यहां पर 10 साल हो गये… अब झूठ एक्सपोज हो गया है.
और अपने दावे के सपोर्ट में दलील भी देते हैं, हम चुनाव लड़ते भी हैं, और चुनाव लड़वाते भी हैं. हो सकता है, अमित शाह को प्रवेश वर्मा और रमेश बिधूड़ी की जीत पर भी पक्का यकीन हो. प्रवेश वर्मा नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ, तो रमेश बिधूड़ी कालकाजी सीट पर आतिशी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं - और ये दोनो ही दिल्ली से ही सांसद भी रह चुके हैं.
केजरीवाल की ताकत रही रेवड़ियों का जवाब रेवड़ी से दे रही है बीजेपी
हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने चुनाव मैनिफेस्टो केजरीवाल की गारंटी जारी करते हुए कहा था कि अगर दिल्ली में फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं बनी, और बीजेपी सत्ता में आई तो दिल्ली वालों को मिल रही मुफ्त की सारी सुविधाएं बंद हो जाएंगी.
अपनी सरकार की मुफ्त की सुविधाओं को खुद भी रेवड़ी कहते हुए अरविंद केजरीवाल ने विस्तार से ये भी समझाया था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में नहीं लौटी तो दिल्ली के हर परिवार पर कम से कम 25 हजार रुपये महीने का एक्स्ट्रा बोझ बढ़ जाएगा.
अब इसे वक्त की नजाकत कहें या राजनीति की, अब तो अमित शाह भी कह रहे हैं, हमने तय किया है कि एक भी गरीब कल्याण की योजनाओं को हम बंद नहीं करेंगे.
मतलब, अब अमित शाह भी मान रहे हैं कि दिल्ली सरकार की जिन योजनाओं को बीजेपी की तरफ से रेवड़ी बताया जा रहा था, वे असल में गरीब कल्याण की योजनाएं हैं.
अमित शाह का ये बयान तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मनरेगा पर पुराने विचार से ही मिलता जुलता लगता हैं. अमित शाह का ये भी दावा होता है कि देश में सबसे पहले गरीब कल्याण की योजना 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही लेकर आये. कहते हैं, चाहे इलाज ही योजना हो, घर फ्री हो, शौचालय हो, राशन हो, गैस सिलेंडर हो. सभी बीजेपी लेकर आई है.
अरविंद केजरीवाल और बीजेपी के काम करने के तरीके में अमित शाह फर्क समझाते हुए कहते हैं, केजरीवाल ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को दरकिनार कर फ्री योजना बनाई… बीजेपी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बनाया और गरीब कल्याण की योजनाओं को लागू किया… चाहे एमपी हो, छत्तीसगढ़ हो या कहीं और हो.