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अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी का हरियाणा चुनाव में साथ आना कितना फायदेमंद, कितना नुकसानदेह?

आम आदमी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन की पहल इस बार राहुल गांधी की तरफ से हुई है. पहले ऐसे प्रयास अरविंद केजरीवाल की तरफ से होते थे. लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस बेहतर स्थिति में आई है, जबकि AAP का संकटकाल नहीं खत्म हो पा रहा है - अगर हरियाणा एक्सपेरिमेंट सफल रहा तो आगे और भी संभावनाएं हैं.

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राहुल गांधी का अरविंद केजरीवाल को लेकर बदलता नजरिया दोनो ही के लिए अच्छा है.
राहुल गांधी का अरविंद केजरीवाल को लेकर बदलता नजरिया दोनो ही के लिए अच्छा है.

हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख बदल जाने के बाद अब भी एक महीने का वक्त बचा हुआ है. पहले 1 अक्टूबर को मतदान होना था, अब 5 अक्टूबर को वोटिंग होगी. बीजेपी और कांग्रेस की तरह आम आदमी पार्टी ने भी हरियाणा चुनाव अकेले लड़ने की बात कही थी. 

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आम आदमी पार्टी के कैंपेन का नेतृत्व सुनीता केजरीवाल कर रही हैं, और अपने पति अरविंद केजरीवाल के नाम पर वोट मांग रही हैं. चुनावी रैलियों में वो लोगों से लगातार अपील कर रही हैं कि अपने बेटे को वोट देकर एक मौका दीजिये. बीच बीच में ये भी बताती हैं कि कैसे बीजेपी की केंद्र सरकार ने हरियाणा के बेटे को फर्जी मामले में जेल में डाल रखा है.

2019 में चूक गई कांग्रेस इस बार कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती, और गुजरात तक में अगली बार बीजेपी को हरा देने का दावा करने वाले राहुल गांधी भी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं - और यही वजह है कि राहुल गांधी हरियाणा कांग्रेस के नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं. कांग्रेस की चुनाव समिति की बैठक में इस मुद्दे पर काफी गंभीरता से चर्चा हुई है. 

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कांग्रेस की बैठक से आई खबर के बाद आम आदमी पार्टी की भी प्रतिक्रिया आ गई है. राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने अपनी तरफ से राहुल गांधी के प्रस्ताव का स्वागत किया है, लेकिन ये भी कहा है कि हरियाणा में चुनावी गठबंधन को लेकर फाइनल फैसला उनके नेता अरविंद केजरीवाल ही लेंगे. अरविंद केजरीवाल फिलहाल दिल्ली शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद हैं, जिन्हें ईडी केस में तो सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन सीबीआई वाले मामले में अब भी जमानत का इंतजार है. 

ध्यान रहे, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन की बात फिलहाल सिर्फ हरियाणा को लेकर ही हो रही है, दिल्ली को लेकर तो बिलकुल नहीं. आप नेताओं के दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा के बाद कांग्रेस भी अब अकेले ही तैयारी कर रही है - और अभी का हाल ये है कि दोनो ही पक्ष अपनी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. 

पंजाब को छोड़कर दिल्ली सहित कई राज्यों में इंडिया ब्लॉक के बैनर तले चुनाव लड़ चुके कांग्रेस और आप के बीच हरियाणा चुनाव में गठबंधन की बात कहां तक पहुंचती है, देखना होगा - चुनावी गठबंधन का नफा-नुकसान तो बाद की बात है. 

हरियाणा में AAP-कांग्रेस में गठबंधन के संकेत

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दिल्ली के अलावा कांग्रेस ने हरियाणा, गुजरात, गोवा और चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था. लेकिन, कामयाबी सिर्फ चंडीगढ़ की सीट पर ही मिली, जहां से कांग्रेस के मनीष तिवारी संसद पहुंचे हैं. हालांकि, आम आदमी पार्टी ने नतीजे आने के बाद कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव तक ही सीमित बताते हुए गठबंधन तोड़ लिया था. 

कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में राहुल गांधी ने साथी नेताओं से हरियाणा में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर राय जाननी चाही. और कांग्रेस नेताओं से फीडबैक देने को कहा. अब तक यही देखने को मिला है कि जहां कहीं भी किसी क्षेत्रीय दल से कांग्रेस के नये सिरे से गठबंधन की बात शुरू होती है, पार्टी के स्थानीय नेता दीवार बन कर खड़े हो जाते हैं. 

लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में तो सबने देखा ही. कैसे अधीर रंजन चौधरी किसी भी सूरत में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं हुए. और अपनी भी सीट गंवा बैठे. अब तो कांग्रेस में भी पैदल कर दिये गये हैं. 

यह भी पढ़ें: हरियाणा चुनाव: AAP के साथ गठबंधन करने के पीछे राहुल गांधी की क्‍या है रणनीति?

हरियाणा कांग्रेस की सीनियर नेता कुमारी शैलजा का ताजा विचार तो अभी सामने नहीं आया है, लेकिन महीना भर पहले वो किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन के पक्ष में नजर नहीं आईं. एक इंटरव्यू में कुमारी शैलजा का कहना था कि हरियाणा में कांग्रेस मजबूत खिलाड़ी के रूप में खड़ी है, और चुनाव में अकेले दम पर उतरेगी. और थोड़ी पीछे चलें तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कहा था कि हरियाणा की 90 सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. 

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लेकिन अब हालात की मजबूरी हो या हो सकता है मन बदल गया हो, आप नेता संजय सिंह तो अलग ही राय जाहिर कर रहे हैं. राहुल गांधी के कांग्रेस की बैठक में फीडबैक की बात पर संजय सिंह का कहना है, मैं राहुल गांधी के बयान का स्वागत करता हूं... बीजेपी को हराना हमारी प्राथमिकता है... लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सहमति से ही अंतिम फैसला होगा. 

हरियाणा को लेकर भले ही आप के विचार बदले हों, लेकिन दिल्ली को लेकर बिलकुल वैसा ही है जैसा लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब के मामले में था. जब भी दोनो दलों की बैठक होती थी, आम आदमी पार्टी की तरफ से कांग्रेस नेताओं को साफ कर दिया जाता था कि गठबंधन पर बातचीत में पंजाब बिलकुल भी नहीं शामिल है. 

रिश्ता तो पहले जैसा ही है, सोच बदल रही है

दिल्ली कांग्रेस के नेता तो कभी भी आम आदमी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन के लिए तैयार नहीं देखे गये हैं. लोकसभा चुनाव में तो दिल्ली में आप-कांग्रेस गठबंधन से नाराज होकर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने पार्टी ही छोड़ दी थी, और फिर से बीजेपी में चले गए. ऐसा ही हाल शीला दीक्षित के जमाने में भी देखा गया था. 

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1. कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन चलाकर ही आम आदमी पार्टी राजनीति में आई थी, और पहली बार सरकार भी बनाई तो कांग्रेस की मदद से ही. लेकिन 49 दिनों बाद ही अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के कारण सरकार गिर भी गई थी.

2. 2019 में केजरीवाल की तरफ से गठबंधन की पहल हुई. लेकिन दिल्ली कांग्रेस के नेताओं के खुशी खुशी राजी न होने की वजह से गठबंधन नहीं हो सका. अरविंद केजरीवाल तो तब दिल्ली के साथ साथ हरियाणा में भी हाथ मिलाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन पाई.

3. 2024  में गठबंधन को लेकर कांग्रेस ज्यादा आतुर दिखी थी. कांग्रेस तो दिल्ली और दूसरे राज्यों के साथ साथ पंजाब में भी गठबंधन चाहती थी, लेकिन अरविंद केजरीवाल राजी नहीं हुए. दिल्ली कांग्रेस के नेताओं का तो पुराना रवैया ही देखने को मिला. 

4. हरियाणा को लेकर पहली बार कांग्रेस की तरफ से पहल हुई है - और ये पहल भी हरियाणा के किसी नेता की तरफ से नहीं बल्कि राहुल गांधी की तरफ से हुई है. आम आदमी पार्टी ने इनकार तो नहीं किया है, लेकिन संजय सिंह ने ये जरूर कहा है कि आखिरी फैसला अरविंद केजरीवाल ही लेंगे.

देखा जाये तो दोनो दलों के क्षेत्रीय नेताओं के रवैये में कोई एक दूसरे के प्रति नजरिये में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन राहुल गांधी अब राजनीति में फ्रंटफुट पर आकर खेलना चाहते हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजों से जोश तो हाई है ही - नेता प्रतिपक्ष बन जाने के बाद आत्मविश्वास से भी बढ़ा है. 

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तभी तो अरविंद केजरीवाल से लगातार कई साल तक दूरी बनाकर चलने वाले राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की पहल खुद की है. देखें तो, इस मसले पर राहुल गांधी के पुराने स्टैंड में बदलाव का संकेत है. 

दिल्ली को लेकर भी कोई संभावना बन रही है क्या

1. हरियाणा में चुनावी गठबंधन करके कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही फायदे में रहेंगे. आम आदमी पार्टी को अरविंद केजरीवाल के गृह-राज्य हरियाणा में पांव जमाने का मौका मिल सकता है - और राहुल गांधी को अखिलेश और तेजस्वी यादव की तरह फायदा मिलने की सूरत में नया सपोर्ट सिस्टम भी मिल सकता है. 

2. कांग्रेस के मुकाबले फिलहाल सपोर्ट की ज्यादा जरूरत तो अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को ही है. हरियाणा में कुछ भी सीटें मिल जायें, तो बीजेपी के लिए गुजरात जैसा ही झटका होगा. आम आदमी पार्टी के हरियाणा में अब तक के प्रदर्शन को देखते हुए ये तो नहीं लगता कि वो अकेले दम पर कुछ कर भी पाएगी.  

3. हो सकता है हरियाणा विधानसभा चुनाव में गठबंधन का प्रयोग सफल हुआ तो आम आदमी पार्टी दिल्ली के मामले में भी फिर से विचार कर सकती है - और ये भी दोनो दलों की जरूरत है.

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