अरविंद केजरीवाल को मिले ED के समन के हिसाब से 21 मार्च को पेश होना था. दिल्ली शराब नीति केस में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से भेजा गया ये 9वां समन था. अब तो ईडी की तरफ से अरविंद केजरीवाल को 10 समन भी पकड़ा दिया गया है. अगर दिल्ली जल बोर्ड केस वाला जोड़ दें, तो अब तक कुल 11 समन मिल चुके हैं. इन सब के बीच ED ने केजरीवाल से पूछताछ के दिल्ली सीएम हाउस पर धावा भी बोल दिया है.
अरविंद केजरीवाल से पहले झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हेमंत सोरेन को कुल 10 समन ईडी की तरफ से भेजे गये थे - और उसके बाद हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया था. उनका केस अलग था, लेकिन हाल ही में दिल्ली शराब केस में बीआरएस नेता के. कविता को भी ईडी ने गिरफ्तार किया है.
ईडी के समन के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी डाली थी. वो चाहते थे कि हाई कोर्ट एक ऐसा आदेश जारी कर दे जिससे प्रवर्तन निदेशालय उनको गिरफ्तार न कर सके - लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने तात्कालिक तौर पर ऐसा करने से साफ मना कर दिया है.
कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है - और ये केस 22 अप्रैल, 2024 के लिए सूचीबद्ध किया गया है.
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के मसले पर हाई कोर्ट में हुआ सवाल-जवाब भी काफी दिलचस्प है, क्योंकि ईडी की तरफ से सवालिया लहजे में कहा गया - ये किसने कह दिया कि समन अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने के लिए भेजे जा रहे हैं?
पूरे मामले को देखें तो ये बात नहीं समझ में आ रही है कि भला अरविंद केजरीवाल को अपनी गिरफ्तारी को लेकर डर कब से लगने लगा?
आम आदमी पार्टी तो पूरी दिल्ली घूम घूम कर सर्वे भी कर चुकी है कि क्या अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार होने की सूरत में जेल से सरकार चलानी चाहिये?
दिल्ली हाई कोर्ट में क्या हुआ
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई और नई तारीख मिल जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने X पर जो लिखा है, वो भी बेहद दिलचस्प है, आज BJP की पोल खुल गई है... वो कह रही थी कि दिल्ली के CM सवालों से भाग रहे हैं... लेकिन अब दिल्ली के मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि अगर ED कहेगी कि मुझे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा तो मैं जवाब दूंगा.
अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट जाने का फायदा ये हुआ है कि जिन सवालों के जवाब वो समन के जवाब में पूछा करते थे, ईडी को अदालत में बताना पड़ रहा है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने तो अरविंद केजरीवाल की ये मांग मंजूर करते हुए ईडी को आदेश भी दे दिया है कि वो अरविंद केजरीवाल को उनसे जुड़े दस्तावेज मुहैया कराये.
दिल्ली हाई कोर्ट में भी सुनवाई के दौरान ईडी से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सबूत पेश करने को कहा गया. आदेश मिलते ही ईडी के अफसर जजों के चेंबर में हाजिर हो गये - और एक एक करके कागज दिखाने लगे.
ईडी की शिकायत थी कि समन पर समन भेजे जाने के बावजूद अरविंद केजरीवाल पेश नहीं हो रहे हैं. यही शिकायत लेकर ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में भी याचिका दायर की थी. बल्कि, एक बार अरविंद केजरीवाल की वर्चुअल पेशी के बाद, बाद के एक समन को आधार बनाकर फिर से अर्जी दायर की - लेकिन कोर्ट ने दोनों मामलों में अरविंद केजरीवाल को एक ही तारीख पर बुलाया. और दिल्ली के मुख्यमंत्री के पेश होते ही, एक मिनट में ही, कोर्ट रूम से जाने भी दिया. बाकी बहस और औपचारिकताएं वकील और उनकी टीम पूरी करती रही.
हाई कोर्ट ने ईडी से ये भी पूछा कि समन के बावजूद पेश न होने पर अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
कोर्ट का सवाल था, आपको अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने से कौन रोक रहा था, जब आप समन पर समन भेज रहे थे, और वो पेश नहीं हो रहे थे... आपके पास तो ऐसे में गिरफ्तार करने का भी अधिकार है!
कोर्ट की तरफ से पूछे जाने पर ईडी की ओर से पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू का कहना था, उनको पता नहीं किसने कह दिया कि हम गिरफ्तार करने के लिए उनको बुला रहे हैं.
एएसजी एस वी राजू ने बताया, हम तो कह रहे थे कि आप आओ... और पूछताछ में शामिल हो.
गिरफ्तारी के मुद्दे पर ASG का कहना था, हम गिरफ्तार कर भी सकते हैं, और नहीं भी.
अरविंद केजरीवाल का कहना है कि गिरफ्तार न किये जाने के ईडी के आश्वासन पर ही वो पूछताछ में शामिल होंगे, और इसीलिए वो हाई कोर्ट से अपने लिये गिरफ्तारी से प्रोटेक्शन मांग रहे थे - जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया.
सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी का पूरा जोर एक ही बात पर देखा गया, जब तक ईडी उनकी याचिका पर जवाब दाखिल न कर दे, तब तक कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाना चाहिये.
जेल से सरकार चलाने का क्या हुआ?
आम आदमी पार्टी की तरफ से दिल्ली में 1 दिसंबर से 'मैं भी केजरीवाल' सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया था. करीब तीन हफ्ते तक चले इस सर्वे में लोगों से पूछा गया कि क्या गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल को जेल में रह कर अपनी सरकार चलानी चाहिये? या फिर इस्तीफा दे देना चाहिये?
सर्वे से पहले AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि कानून और संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक सिटिंग सीएम को ट्रायल के नाम पर जेल में डालने की कोशिश की जाये, और उसके लिए मुख्यमंत्री का इस्तीफा लिया जाये. ये नवंबर, 2023 के शुरू की बात है, और दो महीने बाद ही फरवरी, 2024 में हेमंत सोरेन को ऐसी ही परिस्थितियों में गिरफ्तार कर लिया गया था.
सौरभ भारद्वाज का कहना था, सभी विधायकों की राय है कि चाहे पुलिस कस्टडी से सरकार चले या जेल से अरविंद केजरीवाल ही दिल्ली की सरकार चलाएंगे, और वही मुख्यमंत्री रहेंगे - क्योंकि वोट उनके नाम पर ही मिला है.
विधायकों के साथ बैठक की बातें बताते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि सभी एक राय थे कि, 'अरविंद जी ही मुख्यमंत्री रहें... अधिकारी जेल में ही जाएंगे... हम कैबिनेट मंत्री भी वहीं काम कराने जाएंगे... और जैसा माहौल है... हो सकता है कि हम सब जेल ही चलें जायें... ऐसा हुआ तो भी वहीं से सरकार चलेगी... अधिकारियों को वहीं बुलाएंगे... और जो विधायक बाहर रहेंगे वे जमीन पर काम करेंगे.'
लेकिन अब तो अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक और कानूनी रणनीति देखकर ऐसा लगता है कि वो गिरफ्तारी से बचने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं - ये बात तो सच है, डर सबको लगता है.