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'बेचारा केजरीवाल'... आम आदमी पार्टी सुप्रीमो का बदलता कैंपेन स्‍टाइल दिल्‍ली में क्‍या रंग लाएगा? | Opinion

अरविंद केजरीवाल को हरियाणा चुनाव में भी लोकसभा चुनाव जैसा ही झटका लगा है, एग्जिट पोल तो यही बता रहे हैं. लिहाजा दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने कैंपेन का तरीका बदल लिया है. वो बीजेपी और मोदी पर हमलावर तो हैं, लेकिन पहले की तरह जेल वाली सहानुभूति हासिल करने की कोशिश नहीं लग रही है.

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अरविंद केजरीवाल की नई रणनीति में बेचारगी की झलक सहानुभूति बटोरने का नया तरीका है.
अरविंद केजरीवाल की नई रणनीति में बेचारगी की झलक सहानुभूति बटोरने का नया तरीका है.

हरियाणा विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को बहुत ज्यादा न सही, कुछ उम्मीदें तो होंगी ही, लेकिन एग्जिट पोल से मालूम होता है कि दिल्ली के लोकसभा चुनाव के नतीजों जैसी ही निराशा मिलने वाली है.

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पहले दिल्ली, फिर पंजाब के बाद आम आदमी पार्टी गुजरात और गोवा में भी खाता खोलने में सफल रही है, लेकिन एग्जिट पोल के अनुमानों में हरियाणा में हालत खाली हाथ जैसी ही नजर आ रही है.

अरविंद केजरीवाल के जेल से छूटने के बाद आम आदमी पार्टी दिल्ली में ‘जनता की अदालत’ लगा रही है. असल में, अरविंद केजरीवाल जनता की अदालत से अपने लिए इंसाफ मांग रहे हैं. वे अपने दस साल पुराने अवतार में नजर आ रहे हैं, ताकि दिल्‍ली की जनता उन्‍हें 'बेचारा' और 'पीडि़त' महसूस कर सके. 

पिछले कई अरसे में उनकी छवि को बहुत नुकसान पहुंचा है. ओवरसाइज शर्ट, पैंट और चप्‍पल में नजर आने वाले केजरीवाल 'शीशमहल' के वासी नजर आ रहे थे. बीजेपी उन पर यही हमला करते हुए बता रही थी कि कैसे कभी नीली वैगनार में चलने वाला यह आम आदमी अब गाडि़यों के काफिले में चलने वाला खास आदमी बन गया है.

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इन तमाम आलोचनाओं के बाद तो भ्रष्‍टाचार का आरोप भी लग गया. विपक्षी पार्टियों ने इसे ही मुद्दा बनाया कि कैसे खुद को कट्टर ईमानदार कहने वाला एक नेता कट्टर बेइमान बन गया.

केजरीवाल दिल्‍ली सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद अब अपनी पुरानी छवि पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. मानो उनसे बड़ा 'बेचारा' कोई नहीं है. दो मिनी ट्रक में वे अपना सामान लेकर नए घर में चले गए हैं. और वहां से नए सिरे से उन्‍होंने अपनी पुरानी वाली राजनीति का आगाज किया है. वे यह साबित करना चाहते हैं कि अहंकारी वे नहीं, भाजपा है.

केजरीवाल ने कैंपेन का तरीका क्यों बदला

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में लगी जनता की अदालत में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों के हितों में काम करने की कसम भी खाई, और कहा - मैं आज कसम खाकर जा रहा हूं… मैं दिल्ली की जनता को उनके अधिकार दिलाकर रहूंगा… दिल्ली को पूर्ण राज्य बनवाकर रहूंगा… दिल्ली को LG से मुक्ति दिलाकर रहूंगा.

जमानत पर जेल से रिहा किये जाने के बाद अरविंद केजरीवाल को उनके साथी नेता जहां भगवान श्रीराम की तरह पेश कर रहे थे, वो खुद सीता माता की तरह अग्नि परीक्षा देने की बात कर रहे थे. ये सब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के पीछे उनकी दलील का हिस्सा है.

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लोकसभा चुनाव के लिए अंतरिम जमानत पर बाहर आकर अरविंद केजरीवाल बार बार यही कह रहे थे कि अगर लोगों ने INDIA ब्लॉक की जीत पक्की कर दी तो उनको जेल नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन ऐसा बोलने के बावजूद उनको लोगों की सहानुभूति नहीं मिली. 

अरविंद केजरीवाल के जेल में रहते हुए भी उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल हरियाणा के लोगों से बहू बनकर बेटे के लिए वोट मांग रही थीं, और जेल से छूटते ही अरविंद केजरीवाल भी मैदान में कूद पड़े थे. खास बात ये है कि अरविंद केजरीवाल हरियाणा के ही रहने वाले हैं.

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब की तरह हरियाणा में मुुफ्त बिजली जैसे कई लुभावने वादे किए थे, और कांग्रेस के साथ गठबंधन को दरकिनार कर सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे - लेकिन लगता नहीं कि खाता खुल भी पाएगा.

जनता की अदालत में अरविंद केजरीवाल हाथ में रेवड़ी का एक छोटा सा पैकेट लिये पहुंचे थे. उनका दावा है कि अब तक 6 रेवड़ियां बांट चुके हैं, और अब 7वीं का नंबर है. 

कह रहे हैं, मैंने आज तक आपको 6 रेवड़ियां बांटी हैं… जल्द ही सातवीं रेवड़ी भी बांटेंगे… मैंने जनता का पैसा अपने दोस्तों में नहीं बांटा, बल्कि उससे जनता को ही सुविधाएं दीं.

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बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, मैंने जनता की दी हुई चीनी, तिल, घी और इलायची को मिलाकर एक हलवाई की तरह रेवड़ी बनाई… और जनता को सौंप दी… मैंने तो जनता से तिल, घी और चीनी इकट्ठा करके रेवड़ी बनाकर जानता को सौंप दी लेकिन मोदी जी ने तो सारे देश की मिठाई की दुकान उठाकर अपने दोस्त को सौंप दी… मेरा गुनाह यही है कि मैंने मोदी जी के मित्र को दिल्ली की एक भी रेवड़ी नहीं लेने दी. 

अरविंद केजरीवाल भी राहुल गांधी की तरह मोदी का दोस्त बोल कर कारोबारी गौतम अडानी की तरफ इशारा कर रहे हैं - और रेवड़ी का बार बार जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली सरकार के मुफ्त के वादों को रेवड़ी बताया है.

रेवड़ी का नाम लेकर मोदी और डबल इंजन पर निशाना

प्रधानमंत्री मोदी की तरफ इशारा करते हुए अरविंद केजरीवाल का कहना है, अगर वो फरवरी से पहले किसी बीजेपी शासित फ्री बिजली देंगे तो मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के लिए प्रचार करुंगा. 

अपने भाषण में अरविंद केजरीवाल याद दिलाते हैं, बीजेपी की 22 राज्यों में सरकारें हैं आप इनसे पूछना कि वे एक राज्य बता दें, जहां उन्होंने बिजली फ्री की हो… गुजरात में 30 साल से सरकार है, एक भी स्कूल ठीक नहीं कराया. 

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और लगे हाथ लोगों को ये भी समझाने लगते हैं, अगले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी रिटायर हो जाएंगे. असल में, अरविंद केजरीवाल का आशय प्रधानमंत्री के मोदी के 75 साल के हो जाने से है.

आम आदमी पार्टी नेता जानते हैं कि आने वाले चुनाव में भी बीजेपी दिल्ली में डबल इंजन सरकार की बात जरूर करेगी, इसलिए पहले से ही काउंटर अटैक शुरू हो चुका है, अब देश में डबल इंजन फेल हो गया है… पहला इंजन जून में ही फेल हो गया था… दूसरा झारखंड और महाराष्ट्र में भी डबल इंजन सरकार विफल होगी. अब दिल्ली चुनाव आ रहे हैं… वे कहेंगे डबल इंजन सरकार बनाओ… उनसे पूछिए हरियाणा के लोगों ने क्या किया? हरियाणा के लोग बीजेपी के लोगों को अपने गांवों में एंट्री करने तक की अनुमति नहीं दे रहे… डांटकर भगा रहे हैं.

दिल्ली सरकार के मंत्री का विपक्ष के नेता का पैर पकड़ना

अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना, मुख्यमंत्री आवास खाली करना - ये सब बीजेपी के हमलों से बचने का ही एहतियाती उपाय तो है. ऊपर से अपनी तरह से ये कहने के लिए भी हो गया है कि पद की कोई लालसा नहीं है, और तभी मुख्यमंत्री बनेंगे जब जनता फिर से मैंडेट देगी.

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और ठीक वैसे ही, दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज का विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता का पैर पकड़ लेना या मुख्यमंत्री आतिशी का अपनी गाड़ी छोड़कर बीजेपी नेता की गाड़ी में बैठ जाना - ये सब भी अरविंद केजरीवाल की रणनीतियों का हिस्सा ही है.

जिस तरीके से आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आतिशी को टेम्परेरी मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया है, दफ्तर में रखी गई खाली कुर्सी भी उसी रणनीति का हिस्सा लगती है. मतलब, जरूरी नहीं है कि आतिशी ने अपनी तरफ से भरत की तरह खड़ाऊं से शासन करने की बात कही हो.

दिल्ली की बसों में मार्शल के रूप में तैनात 10 हजार से ज्यादा सुरक्षा स्वयंसेवकों को पिछले साल हटा दिया गया था, क्योंकि नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने आपत्ति जताई थी कि उनकी नियुक्ति आपदा प्रबंधन की ड्यूटी के लिए हुई है - अब चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी फिर से उनका हक दिलाने के नाम पर नई मुहिम चला रही है.

और उसी मुहिम का हिस्सा रहा, मार्शलों की बहाली के मुद्दे पर दिल्ली में हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा, जिसके बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, मुझे गर्व है अपने मंत्रियों पर जो लोगों के काम करवाने के लिए किसी के पैरों में भी लेट जाते हैं.

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लगातार तीन बार दिल्ली मेंं आम आदमी पार्टी की सरकार बना लेने, और एमसीडी में भी सत्ता हासिल कर लेने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के लिए अगला विधानसभा चुनाव जीत पाना लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है - और उसी के लिए हर तरकीब अपना रहे हैं, जैसे बेचारा बने हुए हों. 

मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने कोे मजबूर होना, और एक मंत्री का बीजेपी नेता के पैर पकड़ने जैसी हरकतें - आखिर ये सब बेचारगी नहीं तो क्या है?

संभव है ये बेचारगी नये सिरे से लोगों की सहानुभूति बटोरने की एक कवायद हो, लेकिन हरकतें देखकर तो हकीकत और फसाने में फर्क कर पाना मुश्किल ही हो रहा है - दिल्ली के लोग तो सब समझ ही रहे होंगे.

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