अरविंद केजरीवाल की महिला सम्मान और संजीवनी योजना को लेकर काफी बवाल हुआ था. क्योंकि, दिल्ली सरकार के कुछ अफसरों की तरफ से अखबारों में विज्ञापन देकर कहा गया था कि ऐसी कोई स्कीम है ही नहीं.
फिर अरविंद केजरीवाल ने पुजारी और ग्रंथी योजना लाने का वादा किया, और लगे हाथ बीजेपी को आगाह किया कि वो आम आदमी पार्टी की चुनावी योजनाओं में बाधा बनने से बाज आये - वरना पाप लगेगा.
अरविंद केजरीवाल का कहना था, मैं बीजेपी से अनुरोध करता हूं कि पुजारियों, और ग्रंथियों के रजिस्ट्रेशन में बाधा उत्पन्न नहीं करें... रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को नहीं रोकें... अगर बीजेपी ने इस योजना को रोकने की कोशिश की तो उन्हें पाप लगेगा.
जब से अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल से छूट कर आये हैं, कभी अग्नि परीक्षा देने तो कभी अपनी कट्टर ईमानदारी की दुहाई देते हैं, और बीच बीच में दिल्ली वालों को चेतावनी भी देते हैं कि अगर उनकी जगह बीजेपी को वोट देने की गलती की, तो उनके बच्चे माफ नहीं करेंगे.
1. ईमानदार मानते हो तो वोट दो, वरना रहने दो
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हर मंच का भरपूर इस्तेमाल करते हैं. लाइव टीवी पर उनका हनुमान चालीसा पाठ तो आपको याद ही होगा.
जब भी आम आदमी पार्टी के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, उनके पलटवार में एक शब्द जोर से सुनाई पड़ता है - कट्टर ईमानदार.
ये शब्द मनीष सिसोदिया भी इस्तेमाल करते रहे हैं, और अरविंद केजरीवाल भी. और, उनके लिए आम आदमी पार्टी के बाकी नेता भी. ॉ
लगता है दिल्ली विधानसभा चुनाव को अरविंद केजरीवाल और उनके साथी अपनी कट्टर ईमानदारी पर जनमत संग्रह मानकर चल रहे हैं.
हाल ही में एक पॉडकास्ट में अरविंद केजरीवाल अपनी गेंद दिल्ली के लोगों के पाले में डालने की कोशिश करते देख गये.
पॉडकास्ट में अरविंद केजरीवाल कहते है, सुप्रीम कोर्ट ने मुझे छोड़ दिया लेकिन मैं जनता के बीच जाऊंगा… और उनसे पूछूंगा, क्या वो मुझे बेईमान मानते हैं… या ईमानदार मानते हैं… अगर लोग मुझे बेईमान मानते हैं तो मैं कुर्सी पर कभी नहीं बैठूंगा… अगर जनता मुझे दोबारा चुनती है, तो मैं सीएम की कुर्सी पर बैठूंगा… मैं मानूंगा कि जनता मुझे ईमानदार मानती है.
2. फिर से मुख्यमंत्री बनाना है तो अग्निपरीक्षा में पास करो
जेल से छूटते ही अरविंद केजरीवाल लोगों के बीच पहुंच गये थे. ये रामायण में रावण के रोल पर उनके कथा सुनाने और उस पर विवाद होने से काफी पहले की बात है.
तब भी अरविंद केजरीवाल ने रामायण का जिक्र किया था, और सीता माता की दुहाई दी थी. दिल्ली विधानसभा चुनाव को अग्नि परीक्षा बताया था.
अरविंद केजरीाल कह रहे थे, ये चुनाव मामूली चुनाव नहीं है… ये अरविंद केजरीवाल की अग्नि परीक्षा है.
और ये सब बोलकर वो लोगों को समझा रहे थे कि अगर दिल्ली के लोग उनको अग्नि परीक्षा में पास करेंगे तो तभी वो फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे.
3. समझो सभी 70 सीटों पर केजरीवाल ही लड़ रहा है
अरविंद केजरीवाल को अपने खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का भी बहुत पहले ही एहसास हो गया था. और, यही वजह रही कि कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिये गये.
टिकट काटने की सूरत में विधायकों के गुस्से का पूर्वानुमान लगाते हुए अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं से कह रहे थे, बस ये समझो आपके सामने केजरीवाल है... सभी 70 सीटों पर केजरीवाल है.
तब ऐसा लगा था जैसे कोई टीचर छात्रों को समझा रहा हो, 'आपको केजरीवाल बनना पड़ेगा.' और बोले, 70 की 70 सीटों पर मानकर चलिये कि केजरीवाल ही चुनाव लड़ रहा है.
4. बीजेपी को वोट दिए तो बच्चे कभी माफ नहीं करेंगे
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की मिसाल तो तब भी दी जा रही थी, जब मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई के छापे पड़े थे. और, हर मौके बेमौके ये सुनने को मिलता ही है. दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल समझाते हैं कि कैसे बीजेपी शासित राज्यों में स्कूलों की हालत खराब है, और फिर लोगों से कहते हैं कि बीजेपी को वोट देने की गलती की तो बहुत महंगा पड़ेगा.
अरविंद केजरीवाल कहते हैं, आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले दिल्ली के सरकारी स्कूलों का बुरा हाल था… लेकिन, अब सरकारी स्कूल अच्छे हो गए हैं. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार के सरकारी स्कूल खटारा पड़े हैं… अगर चुनाव में गलत बटन दब गया तो बच्चे बड़े होकर आपको माफ नहीं करेंगे कि आपने उनका भविष्य खराब कर दिया.
5. बेटा मानते हो तो वोट दो, वरना बीजेपी का बटन दबा दो
2020 के दिल्ली चुनाव में बीजेपी नेता शाहीन बाग के धरने को लेकर खूब उकसाते थे, और आतंकवादियों से रिश्ते की बात बोलकर हमला करते थे. आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी.
रैलियों में तो अरविंद केजरीवाल ये मुद्दा उठाया ही, प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भी कहा कि बीजेपी चुने हुए मुख्यमंत्री को आतंकवादी कह रही है… अब दिल्ली की जनता ही बीजेपी को जवाब देगी.
रैलियों में तब अरविंद केजरीवाल का सवाल होता, क्या ये सही है? ऐसे में कौन युवा राजनीति में आने की हिम्मत करेगा?
कहते थे, आज मैं अपने दिल्ली वालों पर छोड़ता हूं… आप मुझे अपना बेटा मानते हो, या आतंकवादी मानते हो… जब आप वोट देने जाना, तब बटन दबाने से पहले जरूर सोचना… अगर मुझे अपना बेटा समझते हो, तो सिर्फ झाड़ू को वोट दे देना… और अगर मुझे आतंकवादी समझते हो, तो कमल पर वोट दे देना.
अब तो ये समझना भी मुश्किल हो रहा है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए वोट ही मांग रहे हैं या दिल्लीवालों के साथ इमोशनल अत्याचार कर रहे हैं?