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त्रिकोणीय लड़ाई में फंसीं दिल्ली सीएम आतिशी, क्या कालकाजी सीट निकाल पाएंगी?

कालकाजी सीट पर लड़ाई जबरदस्त है. दिल्ली की सीेएम आतिशी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी अलका लांबा के आक्रामक चुनाव प्रचार ने इस सीट को दिलचस्प बना दिया है. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां कांग्रेस आप का ही नहीं बीजेपी का भी नुकसान कर सकती है.

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अलका लांबा, आतिशी और रमेश बिधूड़ी
अलका लांबा, आतिशी और रमेश बिधूड़ी

दिल्ली विधानसभा चुनावों में जिन सीटों पर सबसे तगड़ा मुकाबला है उनमें अगर पहले नंबर पर नई दिल्ली सीट है तो दूसरे नंबर पर कालकाजी का नाम लिया जा सकता है. यहां से दिल्ली की सीएम आतिशी चुनाव लड़ रही हैं . उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस की अलका लांबा से हैं. दिल्ली की राजनीति को जो समझते हैं वो जानते हैं कि रमेश बिधूड़ी और अलका लांबा दोनों ही जमीन लेवल के जुझारू नेता हैं. दूसरी तरफ आतिशी ने भी बहुत कम समय में दिल्ली की राजनीति में सर्वोच्च पद को हासिल किया है. जाहिर है कि यूं ही नहीं कोई सीएम की कुर्सी तक पहुंच जाता है.

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तकरीबन दो लाख मतदाताओं वाला कालकाजी क्षेत्र विभाजन के समय आए पंजाबी परिवारों, मध्यम वर्गीय निवासियों और पूर्वी भारत व बंगाल से आए प्रवासी मजदूरों का जटिल मेल है. दक्षिण-पूर्व दिल्ली के विशाल क्षेत्र में फैला कालकाजी क्षेत्र समृद्धि और संघर्ष का अनूठा मिश्रण पेश करता है. फ्रेंड्स कॉलोनी और महारानी बाग जैसी गेटेड सोसाइटीज, नेहरू प्लेस के व्यस्त टेक हब से लेकर गोविंदपुरी और श्रीनिवासपुरी की झुग्गी बस्तियों तक, यह विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के सामाजिक-आर्थिक विषमताओं का एक छोटा रूप है. शायद यही पृष्ठभूमि इस विधानसभा की प्रकृति को अति जटिल बना देती है. आइये समझते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस बार कालकाजी से सीएम आतिशी अपना सीट बचा सकेंगी या नहीं. 

1-कालकाजी सीट का चुनावी इतिहास,साल दर साल कौन सी पार्टी कमजोर हुई

कालाका जी सीट पर 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप उम्मीदवार आतिशी ने 11,393 वोटों के अंतर से बीजेपी प्रत्याशी धर्मवीर सिंह को हराया था. आतिशी को 52.28% वोट मिले तो धर्मबीर सिंह को 41.63% हासिल हुए. कांग्रेस उम्मीदवार शिवानी चोपड़ा सिर्फ 4,965 वोटों (4.64%) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.  2015 के चुनाव में AAP उम्मीदवार अवतार सिंह कालकाजी सीट से जीत हासिल की थी. उन्हें (51.7%) वोट शेयर के साथ 55,104 वोट मिले. भाजपा उम्मीदवार हरमीत सिंह कालका को 35,335 (33.16%) वोट मिले और वह दूसरे नंबर पर रहे। अवतार सिंह कालकाजी ने हरमीत सिंह कालका को 19,769 वोटों के अंतर से हराया था. आतिशी को 2020 में 55,897 वोट मिले थे. जो 2015 में AAP के अवतार सिंह को मिले वोट से सिर्फ 793 अधिक हैं. इसी अवधि में कांग्रेस को 8,587 वोटों का नुकसान हुआ, जबकि बीजेपी को 11,269 वोटों का फायदा हुआ था. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां से 12,000 वोटों की बढ़त ली थी.   जाहिर है कि इसका सीधा मतलब है कि साल दर साल यहां आम आदमी पार्टी कमजोर हो रही है. 

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2-रमेश बिधूड़ी को क्या कंट्रोवर्सी का लाभ मिलेगा?

कालका जी से बीजेपी प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी पर अकसर जिह्वा के बहक जाने का आरोप लगता रहा है. पर उनके माफी मांगने का अंदाज अलहदा है. इसलिए लोग जल्दी ही उनकी बातों को भूल जाते हैं .रमेश बिधूड़ी ने आतिशी को अपने सरनेम बदलने पर घेरा था. इसी तरह उन्होंने एक दिन आतिशी को हिरनी भी बोल दिया था. पर इस तरह के विवाद से रमेश विधूड़ी के वोटर्स पर कुछ प्रभाव नहीं पढ़ने वाला है.अलबत्ता आम आदमी पार्टी के एक नेगेटिव अभियान से जरूर विधूड़ी को फायदा हो सकता है.आम आदमी पार्टी विधूड़ी को बीजेपी का सीएम कैंडिडेट कहकर प्रचारित कर रही है. आम आदमी पार्टी की चाल यह है कि एंटी गुर्जर का मौहौल पैदा करके पंजाबियों और अन्य पिछड़ों के वोट का  ध्रुवीकरण किया जा सके.  पर इसका उल्टा प्रभाव पड़ रहा है. कालका जी सीट पर आने वाले गुर्जरों के लिए रमेश विधूड़ी प्राइड फील गुड दे रहे हैं. 

3-अलका लांबा क्या बनेंगी आतिशी की हार का कारण    

कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र यूनियन का अध्यक्ष रहीं अलका लांबा कांग्रेस की तेज  तर्रार नेता रही हैं. वो खुद को दिल्ली की बेटी के रूप में प्रचारित कर रही हैं. कुछ दिनों तक उन्होंने आम आदमी पार्टी में भी समय बिताया है. इसलिए उन्हें आम आदमी पार्टी के सारे पैंतरे पता हैं. दूसरे जिस तरह कांग्रेस आम आदमी पार्टी पर हमलावर हुई है उससे उनका उत्साह बढ़ा है. 

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उनका चुनावी प्रचार कांग्रेस शासन के दौरान, विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की उपलब्धियों पर आधारित है. वह बीजेपी की  महिला विरोधी मानसिकता और आप की शराब की राजनीति के खिलाफ जमकर हमला करती हैं.भागीदारी योजना से लेकर शहर की ग्रीन बेल्ट को संरक्षित करने, सीएनजी बसें लाने से मेट्रो तक, शीला जी ने शहर के विकास के लिए कई काम किए. शहर में जितने भी फ्लाईओवर हैं और जिस गति से दिल्ली उनके कार्यकाल में विकसित हुई, वह दिल्लीवासी हमेशा याद करेंगे। अगर लोग बदलाव चाहते हैं, तो उन्हें बदलाव के लिए वोट करना होगा. 

 वह लोगों को चांदनी चौक में विधायक के रूप में अपने कामों को याद कराती हैं. अलका बताती हैं कि विधायकों को पांच साल में लगभग 50 करोड़ रुपये का फंड मिलता है. क्या आपको लगता है कि मौजूदा विधायक ने 50 करोड़ रुपये खर्च किए हैं? मैं पहले विधायक रह चुकी हूं और मैंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए सारे फंड का उपयोग किया.

जाहिर है कि अलका लांबा की मेहनत से कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स हार जीत की चिंता किए बिना कांग्रेस को वोट देने का मन बना रहे हैं. अलका लांबा जितना मेहनत करेंगी वो दोनों ही पार्टियों बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों का ही वोट काटेंगी. 

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4-आतिशी के बारे में क्या सोचती है जनता 

आतिशी के बारे में कालका जी के पक्ष में जो बात की जा रही है वो है इस सीट पर करीब चौथाई हिस्सा पंजाबी वोटर्स का है. पर हरियाणा में जाटों के मुकाबले जिस तरह बीजेपी ने मनोहार लाल खट्टर को 10 साल सीएम बनाए रखा उससे पंजाबी ( खत्री-अरोड़ा) समुदाय को बीजेपी अपनी घर की पार्टी लगने लगी है. दूसरे दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी पंजाबी समुदाय से ही आते हैं. इसलिए ये कहना कि सारे पंजाबी वोट आतिशी को जाएंगे अतिशयोक्ति ही होगा. आतिशी को मुख्यमंत्री होने का फायदा मिल सकता था पर जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने उन्हें टेंप्रेरेरी मुख्यमंत्री कहकर तौहीन की है उसका गलत असर भी पड़ सकता है. दूसरी तरफ लोकसभी चुनावों में बीजेपी को कालकाजी की जनता ने 1200 वोटों से बढ़त दिलाया था.यही नहीं नगर निगम चुनावों में भी यहां की जनता का वोट बीजेपी को ही गया था.मतलब कहीं  न कहीं लोगों में नराजगी तो है.

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